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बस्तर

रामायणकालीन दंडकारण्य के पठार पर स्थित बस्तर लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। यह नक्सल प्रभावित क्षेत्र है, जहां हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं। फॉर्स ने नक्सलियों की मांद में घुसकर घेराबंदी कर दी है। वर्ष 1951 के पहले लोकसभा चुनाव से लेकर वर्ष 1996 तक यह कांग्रेस की परंपरागत सीट मानी जाती रही, लेकिन वर्ष 1996 में पहली बार निर्दलीय प्रत्याशी को यहां के लोगों ने चुना। 1998 से यह सीट भाजपा के पास है। पिछले दो दशक से कश्यप परिवार के सदस्य यहां से लगातार जीत रहे हैं। यहां की कुल जनसंख्या करीब 22 लाख है। यह आदिवासी बहुल है और यहां की आबादी का करीब 65 फीसद हिस्‍सा आदिवासियों का है।

 

आठ विधानसभा सीटें

मध्य और दक्षिण बस्तर के आठ विधानसभा क्षेत्र इस सीट के तहत आते हैं। आठ में सात विधानसभा सीटें कांग्रेस के पास हैं। सिर्फ दंतेवाड़ा विधानसभा सीट भाजपा के कब्जे में है। यहां से भीमा मंडावी भाजपा विधायक हैं। कोंडागांव से कांग्रेस के मोहन मरकाम,  नारायणपुर से चंदन कश्यप, बस्तर से बघेल लखेश्वर, चित्रकोट से दीपक बैज विधायक हैं। बीजापुर व कोंटा विधानसभा सीट आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित हैं। कोटा से कांग्रेस के कवासी लखमा व बीजापुर से विक्रम मंडावी विधायक हैं। बस्तर संभाग की एकमात्र अनारक्षित सीट जगदलपुर भी इसका भाग है। वर्चस्व की बात करें तो पिछले दो दशक से बस्तर सीट पर भाजपा का वर्चस्व है। बलीराम कश्यप चार बार लगातार जीते हैं। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव व 2014 में उनके पुत्र दिनेश कश्यप जीते हैं। लेकिन इस बार भाजपा से यह सीट कांग्रेस ने छीन ली। यहां से कांग्रेस के रेख चंद्र जैन विधायक हैं।

 

पिछले पांच साल में बड़ी घटनाएं

बीजापुर जिले के जांगला से प्रधानमंत्री ने आयुष्मान योजना का शुभारंभ किया था। अब टाटा के प्रभावितों की जमीन राज्य सरकार के द्वारा लौटाई जा रही है। इसे बड़ी घटना के तौर पर देखा जा रहा है। नक्सलवाद को नियंत्रित करने में फोर्स को सफलता कुछ हद तक मिली है, हालांकि अब भी बड़े भू-भाग पर उनका प्रभाव है।
 

विकास का हाल और मुद्दे

बस्तर के अंदरूनी इलाकों में सड़क, पानी, बिजली समेत मूलभूत सुविधाओं की कमी आज भी बनी हुई है। संचार की बदहाली भी दंतेवाड़ा समेत दक्षिण बस्तर के जिलों में है। खेती में पिछड़ापन बना हुआ है, यद्यपि इस दिशा में काफी प्रयास हो रहे हैं। यहां के प्रमुख मुद्दे ये हैं- 1. बैलाडीला की लौह अयस्क खदानों के निजीकरण व नगरनार के एनएमडीसी स्टील प्लांट के विनिवेशीकरण का मामला। 2. वर्तमान सांसद की सक्रियता और पिछले 20 साल से कश्यप परिवार के पास सांसदी होना। 3. भाजपा के 15 साल के कार्यकाल में कराए गए विकास के कार्य और पिछले दो माह में किसानों की कर्जमाफी, टाटा स्टील प्लांट के लिए जमीन देने वाले किसानों की जमीन वापसी समेत कांग्रेस के द्वारा पूरा किए गए जन घोषणापत्र के विषय।

 

बस्तर की खास बातें

बस्तर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र छत्तीसगढ़ 11 संसदीय क्षेत्रों में से एक है। इस संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इस वनीय क्षेत्र का जिला मुख्यालय जगदलपुर में है। 14वीं सदी में यहां पर काकतीय वंश का राज रहा। इस क्षेत्र पर अंग्रेज कभी अपना राज स्थापित नहीं कर पाए। इस क्षेत्र में गोंड एवं अन्य आदिवासी जातियां रहती हैं। इंद्रावती के मुहाने पर बसा यह इलाका वनीय क्षेत्र है। यहां पर टीक तथा साल के पेड़ बड़ी मात्रा में हैं। इस इलाके की खूबसूरती यहां के झरने और बढ़ा देते हैं। यहां खनिज पदार्थों में लोहा, अभ्रक सबसे ज्यादा मिलता है।

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  • सीटें534
  • महिला मतदाता665,241
  • पुरुष मतदाता632,842
  • कुल मतदाता1,298,083

लोकसभा चुनाव

    दिनेश कश्यप

    विजयी सांसद – 2014
    • जन्मतिथि18 नवम्बर 1962
    • जेंडरM
    • शिक्षाएम ए
    • संपत्ति1.61 करोड़

    पूर्व सांसद

    • बलिराम कश्यप

      बीजेपी2009

    • बलिराम कश्यप

      बीजेपी2004

    • बलिराम कश्यप

      बीजेपी1999

    • बलिराम कश्यप

      बीजेपी1998

    • महेंद्र कर्मा

      निर्दलीय1996

    • मंकुराम सोढ़ी

      कांग्रेस1991

    • मंकुराम सोढ़ी

      कांग्रेस1989

    • मंकुराम सोढ़ी

      कांग्रेस1984

    • लक्ष्मण करमा

      कांग्रेस1980

    • दृगपाल शाह केशरी शाह

      बीएलडी1977

    • लम्बोदर बलियार

      निर्दलीय1971

    • जे सुन्दरलाल

      निर्दलीय1967

    • लखमू भवानी

      निर्दलीय1962

    • सुर्ती किसताया एसटी

      कांग्रेस1957

    • मुचाकी कोसा

      निर्दलीय1952

    वीडियो

    किसने क्या कहा और पढ़ें

    • नरेंद्र मोदी(भाजपा)

      आज भारत दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है, लेकिन कांग्रेस, डीएमके और उनके महामिलावटी दोस्त इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए वे मुझसे नाराज हैं

      अन्य बयान
    • राबड़ी देवी(राजद)

      जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर लालू जी से मिलने उनके और तेजस्वी यादव के आवास पर पांच बार आए थे। नीतीश कुमार ने वापस आने की इच्छा जताई थी और साथ ही कहा था कि तेजस्वी को वो 2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और इसके लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में लालू उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दें।

      अन्य बयान
    • साक्षी महाराज(भाजपा)

      मैं एक संत हूं और वोट मांगने आए हूं। एक वोट का दान कई कन्यादान के बराबर होता है। संन्यासी लोगों का भला करते हैं। मैं आपसे घर, खेती या अन्य चीज दान में नहीं मांग रहा, सिर्फ आपका वोट मांग रहा हूं। संत की मांग जो पूरी नहीं करता वह उसके किए गए पुण्य ले जाता है।

      अन्य बयान
    • राजनाथ सिंह(भाजपा)

      अगर हमारी सरकार सत्ता में दोबारा आती है, तो हम देशद्रोह कानून को और ज्यादा सख्त करेंगे। अगर जम्मू-कश्मीर के लिए अलग पीएम की मांग की जाती रही तो हमारे पास अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

      अन्य बयान
    • राहुल गांधी(कांग्रेस)

      लोकसभा 2019 का चुनाव देश की दो विचारधाराओं की लड़ाई है। कांग्रेस कहती है कि देश की सभी विचारधारा, अवसर, भाषा, इतिहास, संस्कृति सब हंसी-खुशी से साथ रहें। सबको अपनी बात रखने का हक है। लेकिन संघ और बीजेपी चाहती है कि देश में एक ही विचारधारा का राज कायम रहे।

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