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औरंगाबाद

बिहार-झारखंड की सीमा पर स्थित औरंगाबाद को मिनी चित्‍तौड़गढ़ कहा जाता है। यह सीट हमेशा सुर्खियों में रही है। अदरी नदी के तट पर स्थित इस शहर को पहले नौरंगा कहा जाता था। बाद में इसका नाम औरंगाबाद हो गया। 26 जनवरी 1973 को औरंगाबाद मगध प्रमंडल के गया जिले से हटकर स्‍वतंत्र जिला बना। जीटी रोड एवं औरंगाबाद-पटना रोड जिले की लाइफलाइन मानी जाती हैं। औरंगाबाद जिले में दो अनुमंडल-औरंगाबाद सदर एवं दाउदनगर है। इस जिले में 11 प्रखंड हैं। यहां की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। हालांकियहांसिंचाई की मुकम्‍मल व्‍यवस्‍था नहीं हो सकी है। औरंगाबाद की सियासत में कांग्रेस का दबदबा रहा है। यहां की राजनीति बिहार विभूति अनुग्रह नारायण सिंह के परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही है। यहां के पहले सांसद सत्येंद्र नारायण सिंह थे। कांग्रेस पार्टी यहां से नौ बार विजयी रही है। पहली बार 1989 में सत्येंद्र नारायण सिन्हा के परिवार को हार का सामना करना पड़ा था, तब रामनरेश सिंह ने जनता दल के टिकट पर जीत दर्ज की थी। 2014 में इस सीट पर पहली बार भाजपा का खाता खुला और सुशील कुमार सिंह सांसद बने।

 

विधानसभा सीटें और विकास

औरंगाबाद लोकसभा सीट के तहत कुटुंबा,रफीगंज, इमामगंज, गुरुआ,टिकारी विधानसभा सीटें आती हैं। औरंगाबाद जिला नक्सल प्रभावित है। यहां 1987 से 2000 तक कई नरसंहार हुए। यहां की सिंचाई व्यवस्था अब भी अधूरी है। 1970 के दशक के शुरू सेउत्तर कोयल नहर परियोजना अब तक अधूरी है। हड़ियाही परियोजना का भी यही हाल है। शिक्षा एवं स्‍वास्‍थ्‍य की भी यही हालत है। औरंगाबाद रेल सेवा से अब तक नहीं जुड़ा है।

 

प्रमुख घटनाएं और मुद्दे

2016 में नक्‍सलियों से मुठभेड़में सीआरपीएफ के दस जवान शहीद हो गए थे। 2019 में भाजपा विधान पार्षद के घर पर नक्‍सलियों की हत्‍या, दर्जन भर वाहन फूंके गए और उनके चाचा की हत्‍या की गई। औरंगाबाद-गया सीमा पर नक्‍सली हमले में सीआरपीएफ के सब इंस्‍पेक्‍टर शहीद हो गए। यहां के प्रमुख मुद्दों में उत्तर कोयल सिंचाई परियोजना एवं हड़ियाही सिंचाई परियोजना हैं। इनके अलावा पर्यटन स्थल देव को सूर्य सर्किट में शामिल करना,हड़ियाही सिंचाई परियोजना को पूर्ण करना,उमगा एवं पवई पहाड़ का सौंदर्यीकरण, नक्‍सलवाद, मेडिकल कॉलेज की स्‍थापना, औरंगाबाद को रेलमार्ग से जोड़ना आदि भी यहां के प्रमुख मुद्दे हैं।हालांकिउत्‍तर कोयल परियोजना का प्रधानमंत्री ने इसी साल शिलान्‍यास कर दिया है। यहांकुल मतदाताओं की संख्‍या13,76,323,जिले की कुल जनसंख्या25,40,073 और साक्षरता दर70.32 प्रतिशत है।

 

औरंगाबाद की खास बातें

औरंगाबाद बिहार का महत्‍वपूर्ण लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है। इस लोकसभा के अंतर्गत 6 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। प्राचीन काल में औरंगाबाद, मगध राज्‍य का हिस्‍स था। इस क्षेत्र के उमगा में एक वैष्णव मंदिर है। इसे उमगा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां सूर्य देव मंदिर धार्मिक रूप से महत्‍वपूर्ण है। औरंगबाद में विद्युत उत्‍पादन के लिए एनटीपीसी का बड़ा प्‍लांट भी है। यहां सीमेंट उत्पादन, कालीन और कंबल बनाने के कारखाने भी हैं। यह क्षेत्र प्रदेश की राजधानी पटना से करीब 148 किलोमीटर दूर है, जबकि राष्‍ट्रीय राजधानी नई दिल्‍ली से इस क्षेत्र की दूरी 993 किलोमीटर है।

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  • सीटें534
  • महिला मतदाता710,533
  • पुरुष मतदाता825,574
  • कुल मतदाता1,536,153

लोकसभा चुनाव

    सुशील कुमार सिंह

    विजयी सांसद – 2014
    • जन्मतिथि27 जून 1963
    • जेंडरM
    • शिक्षापोस्ट ग्रेजुएट
    • संपत्ति12.78 करोड़

    पूर्व सांसद

    • सुशील कुमार सिंह

      जेडीयू 2009

    • निखिल कुमार

      कांग्रेस2004

    • श्यामा सिंह

      कांग्रेस1999

    • सुशील कुमार सिंह

      एसएपी1998

    • वीरेन्द्र कुमार सिंह

      जेडी1996

    • राम नरेश सिंह

      जेडी1991

    • राम नरेश सिंह

      जेडी1989

    • सत्येंद्र नारायण सिंह

      कांग्रेस1984

    • सत्येंद्र नारायण सिंह

      जेएनपी1980

    • सत्येंद्र नारायण सिंह

      बीएलडी1977

    • सत्येंद्र नारायण सिन्हा

      एनसीओ1971

    • एम सिंह

      कांग्रेस1967

    • ललिता राज्य लक्ष्मी

      एसडब्लूए1962

    • सत्येंद्र नारायण सिंह

      कांग्रेस1957

    वीडियो

    किसने क्या कहा और पढ़ें

    • नरेंद्र मोदी(भाजपा)

      आज भारत दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है, लेकिन कांग्रेस, डीएमके और उनके महामिलावटी दोस्त इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए वे मुझसे नाराज हैं

      अन्य बयान
    • राबड़ी देवी(राजद)

      जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर लालू जी से मिलने उनके और तेजस्वी यादव के आवास पर पांच बार आए थे। नीतीश कुमार ने वापस आने की इच्छा जताई थी और साथ ही कहा था कि तेजस्वी को वो 2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और इसके लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में लालू उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दें।

      अन्य बयान
    • साक्षी महाराज(भाजपा)

      मैं एक संत हूं और वोट मांगने आए हूं। एक वोट का दान कई कन्यादान के बराबर होता है। संन्यासी लोगों का भला करते हैं। मैं आपसे घर, खेती या अन्य चीज दान में नहीं मांग रहा, सिर्फ आपका वोट मांग रहा हूं। संत की मांग जो पूरी नहीं करता वह उसके किए गए पुण्य ले जाता है।

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    • राजनाथ सिंह(भाजपा)

      अगर हमारी सरकार सत्ता में दोबारा आती है, तो हम देशद्रोह कानून को और ज्यादा सख्त करेंगे। अगर जम्मू-कश्मीर के लिए अलग पीएम की मांग की जाती रही तो हमारे पास अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

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    • राहुल गांधी(कांग्रेस)

      लोकसभा 2019 का चुनाव देश की दो विचारधाराओं की लड़ाई है। कांग्रेस कहती है कि देश की सभी विचारधारा, अवसर, भाषा, इतिहास, संस्कृति सब हंसी-खुशी से साथ रहें। सबको अपनी बात रखने का हक है। लेकिन संघ और बीजेपी चाहती है कि देश में एक ही विचारधारा का राज कायम रहे।

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