आम नागरिकों की बेहतरी के लिए प्रदेश में जो कदम उठाए जा रहे हैं उसके सुखद परिणाम दो वर्षो में दिखने लगेंगे

औद्योगिक विकास गरीबी कम करने और आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए सबसे शक्तिशाली साधन है। मजबूत आर्थिक विकास ही मानव विकास को आगे बढ़ाता है। इसी भावना को नीतियों में परिवर्तित कर नए जम्मू-कश्मीर की नई कहानी लिखी जा रही है।

Sanjay PokhriyalPublish: Sat, 22 Jan 2022 10:18 AM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 10:21 AM (IST)
आम नागरिकों की बेहतरी के लिए प्रदेश में जो कदम उठाए जा रहे हैं उसके सुखद परिणाम दो वर्षो में दिखने लगेंगे

मनोज सिन्हा। वर्ष 2018 में लंदन स्कूल आफ इकोनामिक्स एंड पालिटिकल साइंस के शोधार्थी रिकाडरे क्रेसेंजी ने किसी खास भौगोलिक क्षेत्र में निवेश पर टिप्पणी करते हुए लिखा था, ‘निवेश के लिए जगह का चुनाव एक शादी की तरह है। इसलिए सफल विवाह के लिए दोनों पार्टनर (भौगोलिक क्षेत्र और कंपनी) का एक-दूसरे पर अटूट विश्वास आवश्यक है।’ आजादी के बाद करीब सात दशक तक जम्मू-कश्मीर अर्थव्यवस्था के इस अटूट विश्वास के मामले में अपवाद था।

पूरे देश में 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद बीमारू राज्यों में भी औद्योगिक क्रांति ने पांव पसारे, लेकिन प्रतिगामी कानूनों की वजह से जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। तत्कालीन केंद्र सरकारों ने जम्मू-कश्मीर को दोनों हाथों से पैसे तो दिए, लेकिन आर्थिक सुधारों के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयान करते हैं। शुरुआती 72 वर्षो में मात्र 15,000 करोड़ रुपये का निवेश सात दशकों की नीति पर बहुत बड़ी टिप्पणी है। प्राइवेट सेक्टर में रोजगार पैदा करने की कोशिश तक नहीं की गई, जिसकी वजह से उच्च शिक्षा प्राप्त युवा भी छोटी-मोटी सरकारी नौकरी करने के लिए मजबूर थे।

2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साहसिक निर्णय के बाद पहली बार निवेशक और देश के मुकुट-मणि के बीच एक अटूट विश्वास कायम हो रहा है। आज नए सूर्योदय की किरण फूटी है। नए इंफ्रास्ट्रक्चर, भय-मुक्त तथा भ्रष्टाचार-मुक्त पारदर्शी व्यवस्था, सभी वर्गो की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिगामी कानूनों की समाप्ति जम्मू-कश्मीर में नए आत्मविश्वास का संचार कर रही हैं। औद्योगिक परिदृश्य में मौलिक परिवर्तन किया जा रहा है, ताकि देश के औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों के साथ स्पर्धा करने में जम्मू-कश्मीर सक्षम हो सके। जहां 72 साल में 15,000 करोड़ रुपये का निवेश आया, वहीं मात्र पिछले एक साल में 48,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं। लैंड यूज पालिसी में परिवर्तन के बाद तमाम उद्योगपति अपने स्तर पर निवेश का प्रयत्न कर रहे हैं। त्वरित विकास की परिभाषा कहती है कि सभी क्षेत्रों का समान औद्योगिक विकास हो। इसी को ध्यान में रखते हुए उद्योगों को ब्लाक स्तर तक ले जाने की योजना बनाई गई है।

अर्थव्यवस्था में वृद्धि मुख्यत: दो स्नेतों से होती है। पहला भूमि, श्रम, पूंजी, सामग्री और सेवाओं में सुधार तथा दूसरा मानव संसाधन, नीतिगत वातावरण, प्रतिस्पर्धा, वित्तीय और बुनियादी ढांचे में अनुकूल परिवर्तन। अन्य अर्थव्यवस्थाओं का अध्ययन इन दोनों स्नेतों में संतुलन पर जोर देता है। 2014 के बाद अनेक राज्यों में इन दोनों स्नेतों में सुधार ने वहां आमूलचूल परिवर्तन किया, लेकिन जम्मू-कश्मीर में कई बंदिशें थीं, जिनकी वजह से भू-स्वामियों के लिए जमीन का मोल आजादी के बाद से नहीं बढ़ा था। इसमें भी आवश्यक सुधार किए गए। जम्मू-कश्मीर के इतिहास में पहली बार आर्थिक संपन्नता एवं रोजगार के प्रमुख ड्राइवर रियल एस्टेट सेक्टर को विकसित करने का कदम उठाया गया। जाने-माने रियल एस्टेट कारोबारियों के साथ 18,300 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव पर पिछले वर्ष दिसंबर में मुहर लगाई गई। इससे लोकल कंपनियों को विकास की नई ऊंचाइयों को छूने का अवसर मिलेगा। सूक्ष्म तथा लघु उद्योग भी मजबूत होंगे।

यह शाश्वत सत्य है कि जब कोई कंपनी किसी विशेष क्षेत्र में व्यवसाय शुरू करती है तो वह पूरे परिवेश को प्रभावित करती है। भूमि सुधारों का असर सिर्फ उद्योगीकरण तथा रियल एस्टेट सेक्टर पर नहीं पड़ा है, बल्कि इससे किसान भी लाभान्वित हुए हैं। एक विशिष्ट वर्ग को कृषि भूमि खरीदने का अवसर मिला है। पिछले एक वर्ष में सात लाख लोगों को कृषि और बागवानी में रोजगार के अवसर भी प्राप्त हुए हैं। जम्मू-कश्मीर में बिजली देश के अन्य भागों से सस्ती है। बिजली उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनने के भी प्रयत्न हो रहे हैं। कारोबारियों को जीएसटी में 300 प्रतिशत प्रोत्साहन दिया जा रहा है। ईज आफ डूइंग बिजनेस के सारे मानक अब आनलाइन कर दिए गए हैं, लेकिन समावेशी विकास के इन सभी प्रयत्नों के खिलाफ चंद लोगों द्वारा एक नई कहानी चलाई जा रही है कि जम्मू-कश्मीर को बेचा जा रहा है। ये लोग वही हैं जिन्होंने 72 वर्षो से किसी न किसी रूप में जम्मू-कश्मीर में उद्योगीकरण और समृद्धि को नहीं आने दिया। आम नागरिकों की बेहतरी के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं, उसके सुखद परिणाम दो वर्षो में देखने को मिलेंगे। विकास विरोधी तत्व लोगों की भावनाओं को भड़काने का काम करना चाह रहे हैं, लेकिन जनता जैसे-जैसे विकास देख रही है, झूठी अफवाहों को खारिज कर रही है।

अभी कुछ हफ्ते पहले ही दुबई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में जम्मू-कश्मीर में विदेशी निवेश की राह भी खोली गई। जम्मू-कश्मीर सरकार ने कई विदेशी कंपनियों के साथ 3,000 करोड़ रुपये के करार पर हस्ताक्षर किए। रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर, टूरिज्म, हेल्थकेयर, मानव संसाधन, हास्पिटैलिटी जैसे अनेक क्षेत्रों में आ रहे विदेशी निवेश रोजगार के अवसरों के अलावा अन्य अनेक क्षेत्रों को भी नई गति प्रदान करेंगे। दुनिया की लाजिस्टिक्स की सबसे बड़ी कंपनी डीपी वल्र्ड 250 एकड़ में इनलैंड कंटेनर डिपो का निर्माण करेगी। इस डिपो के बन जाने से राज्य के बागवानी से जुड़ी समस्याएं कम होंगी। फल-ड्राई फ्रूट के स्टोरेज से वितरण तक काम आसान होंगे तथा किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा।

हेल्थ सेक्टर में अपोलो के साथ करार हो चुका है। देश के अन्य बड़े हास्पिटल भी निवेश के इच्छुक हैं। मात्र एक वर्ष में इंडस्ट्री तथा रियल एस्टेट को मिलाकर 70,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव आजादी के बाद के भारतवर्ष की सफलतम कहानियों में से एक है। यह निवेश समाज के हर तबके को प्रभावित करने के साथ कम से कम पांच लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगा। 

(लेखक जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल हैं)

Edited By Sanjay Pokhriyal

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