Modi Government 8 Years: मोदी सरकार के सक्षम नेतृत्व और सुशासन के आठ साल

आज जब आजादी के अमृत महोत्सव में केंद्र सरकार अपने आठ साल पूरे कर रही है तो यही ध्यान में आता है कि राष्ट्रभक्ति ले हृदय में हो खड़ा यदि राष्ट्र सारा तो संकटों को मात देकर राष्ट्र विजयी हो हमारा।

Sanjay PokhriyalPublish: Thu, 26 May 2022 07:01 AM (IST)Updated: Thu, 26 May 2022 10:01 AM (IST)
Modi Government 8 Years: मोदी सरकार के सक्षम नेतृत्व और सुशासन के आठ साल

जी किशन रेड्डी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 मई, 2014 को जब पहली बार केंद्र की सत्ता संभाली थी तब देश निराशा के वातावरण से गुजर रहा था। भ्रष्टाचार चरम पर था। सामान्य जनमानस के मन में यह भाव था कि अब इस देश का कुछ नहीं हो सकता। आज यह गर्व की बात है कि मोदी सरकार में बीते आठ वर्षों में एक भी घोटाला नहीं हुआ। यह इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि नरेन्द्र मोदी ने संसद को लोकतंत्र का मंदिर माना और देश की देवतुल्य 135 करोड़ जनता के सामने प्रण लिया कि 'न खाऊंगा न खाने दूंगा।' मोदी सरकार के सामने विश्व गुरु भारत का लक्ष्य है। यह लक्ष्य जनभागीदारी से ही पूर्ण होगा। अब देश के सामान्य नागरिक की बुनियादी जरूरत सिर्फ रोटी, कपड़ा और मकान नहीं हो सकती। 21वीं सदी में इन सबके अलावा कनेक्टिविटी चाहिए, अच्छी शिक्षा चाहिए, चिकित्सा सुविधा चाहिए, पीने का स्वच्छ जल चाहिए, बिजली चाहिए, इंटरनेट चाहिए, शौचालय चाहिए, सुरक्षा चाहिए, सम्मान चाहिए और विकास में भागीदार बनने के नए अवसर चाहिए। इसी लक्ष्य को पाने के लिए 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के सोच को केंद्र में रखकर मोदी सरकार ने अपनी यात्रा की शुरुआत की।

सुशासन किसी भी लोकतांत्रिक देश की सबसे बड़ी ताकत होती है। यह पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति को मिलने की बात कही है। मोदी सरकार में न सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति को मिला, बल्कि पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च सम्मान भी उन सामान्य लोगों के हाथों में आए, जो हर दृष्टि से इसके हकदार थे।

यह सत्य है कि छोटी-छोटी बातों से बड़े बदलाव आते हैं। इसलिए मोदी सरकार ने सबसे पहले उन योजनाओं पर ध्यान दिया, जिन्होंने सामान्य जन के आत्मगौरव, आत्मविश्वास को बढ़ाया और उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा किया। देश के करोड़ों लोग ऐसे थे, जिन्होंने बैंक में प्रवेश तक नहीं किया था। ऐसे लोगों के लिए जनधन योजना चलाई गई। इस योजना के तहत लगभग 45 करोड़ देशवासियों को बैंक से जोड़ा गया। यह एक बड़ी उपलब्धि है। ऐसी ही उपलब्धि वाला है स्वच्छ भारत अभियान। इस अभियान के तहत देश में 11 करोड़ से अधिक शौचालय बने और देश के छह लाख से अधिक गांव शौच मुक्त हुए। उज्ज्वला योजना के तहत भी गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन मिला। देश की नौ करोड़ महिलाओं को परंपरागत चूल्हे के धुएं से आजादी मिली है। मोदी सरकार ने नया जल शक्ति मंत्रालय बनाया, जिससे अब तक नौ करोड़ से अधिक परिवारों को पीने का स्वच्छ जल मिला है। देश में 22 एम्स बन रहे हैं और आयुष्मान भारत योजना के जरिये गरीबों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देकर स्वस्थ भारत का सपना पूरा किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, भारत माला परियोजना और पर्वत माला परियोजना के माध्यम से सारा भारत सड़कों से जुड़ गया है। इन आठ वर्षों में पहली बार पूर्वोत्तर के कई राज्य रेलवे से जुड़े हैैं। देश के जनमानस को स्वावलंबी बनाने के लिए मुद्रा योजना, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप और ग्राम उदय से लेकर भारत उदय जैसे अभियानों की शुरुआत हुई। हुनर हाट जैसी गतिविधियों के जरिये देश की स्थानीय कारीगरी, कला और कौशल को उचित सम्मान मिला। केंद्र सरकार ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, मुस्लिम महिलाओं को तत्काल तीन तलाक से मुक्ति और हर क्षेत्र में महिला भागीदारी सुनिश्चित करने की भी सकारात्मक पहल की है। डिजिटलीकरण और एक राष्ट्र-एक टैक्स यानी जीएसटी देश के इतिहास में एक भारत-श्रेष्ठ भारत की दिशा में एक नया अध्याय है। इसी प्रकार सैन्य शक्ति को मजबूत करते हुए आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड का पुनर्गठन किया गया। भारत ने राफेल लड़ाकू विमान और 48,000 करोड़ रुपये से 83 स्वदेशी तेजस विमान खरीदे। हमने दुनिया को अपनी ताकत का अहसास भी कराया, जब हमारे जवानों ने दुश्मन के घर में घुसकर सर्जिकल और एयर स्ट्राइक की तथा सुरक्षित अपने वतन लौटे।

मोदी सरकार ने देश के किसानों को समृद्ध करने की दिशा में भी अनेक कदम उठाए हैं। किसानों को ड्रोन सिस्टम, कृषि सिंचाई, फसल बीमा योजना, किसान सम्मान निधि, सोलर पंप, सोलर पैनल आदि सुविधा देने की नीति बनी है। इन आठ वर्षों के दौरान पिछले दो साल ऐसे रहे, जो कोविड महामारी के चलते न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया के लिए मुसीबत बने। बड़े-बड़े विकसित देश इसकी चपेट में आने से खुद को बचा न सके। भारत ने इस चुनौती भरी महामारी का मुकाबला करते हुए आपदा को अवसर में बदला और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लिया। ऐसा पहली बार हुआ, जब भारत ने दुनिया के सैकड़ों देशों को सर्वे भवंतु सुखिन: की भावना से वैक्सीन दी और अपने देश में महामारी के खिलाफ सबसे कम समय में सौ प्रतिशत टीकाकरण का इतिहास बनाया। यह केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का ही प्रणाम है कि 70 वर्षों से लंबित अनुच्छेद 370 को हटा कर 'एक राष्ट्र-एक संविधान-एक ध्वज' के सपने को पूरा किया गया। राम मंदिर के निर्माण जैसे सर्वाधिक विवादित माने जाने वाले विषय भी बड़ी सरलता से निपट गए। योग

भारतीय प्राचीन सांस्कृतिक विरासत है, जिसे नरेंद्र मोदी के प्रयासों के बाद वैश्विक पटल पर एक अलग पहचान मिली। साढ़े तीन दशक के बाद लागू हुई नई शिक्षा नीति और सेंट्रल विस्टा बनाने जैसे साहसी निर्णय भी मोदी सरकार की दूरदृष्टि के उदाहरण हैं। इसी कड़ी में भारत ने अपने 100वें यूनिकार्न का जन्म देखा। किसी भी स्टार्टअप के लिए यूनिकार्न बनना एक बड़ी उपलब्धि है। आज वैश्विक स्तर पर हर दस में से एक यूनिकार्न का उदय भारत में हो रहा है। यह सब इसलिए हो रहा है, क्योंकि भारत का भारत के प्रति स्वाभिमान जागृत हुआ।

भारत आज हर मोर्चे पर सफल नेतृत्व करता हुआ दिखाई देता है। आज जब आजादी के अमृत महोत्सव में केंद्र सरकार अपने आठ साल पूरे कर रही है तो यही ध्यान में आता है कि राष्ट्रभक्ति ले हृदय में, हो खड़ा यदि राष्ट्र सारा, तो संकटों को मात देकर, राष्ट्र विजयी हो हमारा।'

(लेखक केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री हैं)

Edited By Sanjay Pokhriyal

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