अवतार भड़ाना लड़ेंगे जेवर से विधानसभा चुनाव, इंटरनेट मीडिया पर दी जानकारी

UP Assembly Election 2022 फरीदाबाद सीट से पूर्व सांसद और दिग्गज गुर्जर नेता अवतार भड़ाना उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिला के जेवर विधानसभा क्षेत्र से ही चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर ताजा जानकारी दी है कि उन्होंने चुनावी मैदान नहीं छोड़ा है।

Jp YadavPublish: Thu, 20 Jan 2022 06:31 PM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 09:09 AM (IST)
अवतार भड़ाना लड़ेंगे जेवर से विधानसभा चुनाव, इंटरनेट मीडिया पर दी जानकारी

नई दिल्ली/नोएडा/फरीदाबाद [बिजेंद्र बंसल]। फरीदाबाद सीट से पूर्व सांसद और दिग्गज गुर्जर नेता अवतार भड़ाना उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिला के जेवर विधानसभा क्षेत्र से ही चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर ताजा जानकारी दी है कि उन्होंने चुनावी मैदान नहीं छोड़ा है। उन्होंने ट्वीट किया है- 'हमारे पूर्वजों का  गौरवशाली इतिहास रहा है। चाहे कोई भी मैदान में हो, समाज के लिए, उनके अधिकारों के लिए, गरीबों के लिए वीरता से जंग लड़ी है। कोरोना के शुरुआती लक्षण थे, लेकिन आरटीपीसीआर की रिपोर्ट में कोरोना नहीं है। आपके लिए चुनाव लड़ूंगा।' 

थोड़ा कमजोर हुए हैं अवतार और करतार भड़ाना

बताया जा रहा है कि जब तक भड़ाना बंधु एकजुट थे, तब तक इन्होंने हरियाणा की राजनीति में अपना अलग मुकाम हासिल किया। दोनों की राजनीतिक राह जब अलग हुई तो इनका वर्चस्व भी टूटने लगा। खनन कारोबार से अकूत संपत्ति अर्जित करने वाले भड़ाना परिवार ने अवतार भड़ाना को ही राजनीति के लिए आगे किया था। एक समय था, जब बड़े भाई करतार भड़ाना ही छोटे भाई अवतार के चुनाव जीतने की गारंटी हुआ करते थे। करतार भड़ाना पर्दे के पीछे रहकर अवतार भड़ाना को चुनाव जीताने में सहयोग करते थे। चुनाव में पैसा पानी की तरह बहाने में माहिर करतार भड़ाना अपने भाई की जीत सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ा करते थे।

इन भाइयों की राजनीति का नजदीक से आकलन करने वाले स्थानीय नेता बताते हैं कि अवतार जमीन से जुड़े नेता हैं। अवतार हमेशा क्षेत्र व जनता के मुद्​दों को पहचानने में कामयाब रहे और राजनीति में सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ रहे थे, जबकि करतार कारोबार पर ध्यान देते थे। 1991 के लोकसभा चुनाव में जीत का श्रेय करतार को ही दिया गया।

1996 में हो गई दोनों राह अलग

1996 में करतार भड़ाना ने भी राजनीति में बदलाव की चाल पहचानते हुए हरियाणा विकास पार्टी में अपना स्थान बना लिया। पहली बार में ही समालखा से विधायक बन गए। फिर वर्ष 2000 में दूसरा चुनाव भी जीता और प्रदेश में मंत्री बन गए। इस बीच अवतार भड़ाना 1996 में लोकसभा चुनाव भाजपा के एक नए उम्मीदवार रामचंद्र बैंदा से हार गए। 1998 का चुनाव भी अवतार भड़ाना हार गए। कांग्रेस ने भी इस चुनाव में अवतार से पल्ला झाड़ लिया था। हालांकि, 1999 में अवतार मेरठ से जीतकर लोकसभा में पहुंच गए। फिर कांग्रेस से 2004 व 2009 में जीत दर्ज की, मगर इस दौरान दोनों भाइयों के बीच दूरियां बढ़ती चली गईं। करतार भी राजनीति में अलग अपनी जगह बनाने के लिए इधर-उधर चुनाव लड़ते रहे।

जेवर से चुनाव लड़ने से पहले करतार से पूछा था

उत्तर प्रदेश में जेवर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने से पहले अवतार भड़ाना ने अपने बड़े भाई करतार से मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि तब अवतार ने अपने बड़े भाई से चुनाव लड़ने के लिए पारिवारिक अनुमति मांगी थी। इसके बाद करतार भड़ाना यह कह रहे थे कि वे अब कहीं से चुनाव नहीं लड़ेंगे। परिवार में भी यह सहमति रही थी कि अवतार को जेवर से चुनाव जीताकर ही पारिवारिक राजनीति को आगे बढ़ाएंगे, लेकिन अब करतार खतौली से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि इसके बाद से अवतार का मन खट्टा हो गया।

Edited By Jp Yadav

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