दहेज हत्या के आरोप से कड़कड़डूमा कोर्ट ने पति समेत छह लोगों को किया बरी

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दीपाली शर्मा ने आदेश में कहा कि विवाहिता के आत्महत्या करने से पहले उनसे किसी तरह की क्रूरता किए जाने का साक्ष्य हैं जिस कारण दहेज हत्या का आरोप साबित नहीं होता है। क्योंकि पति बेरोजगार था और नशे का आदी था।

Ashish GuptaPublish: Sun, 06 Mar 2022 06:38 PM (IST)Updated: Sun, 06 Mar 2022 06:38 PM (IST)
दहेज हत्या के आरोप से कड़कड़डूमा कोर्ट ने पति समेत छह लोगों को किया बरी

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। सात साल पहले विवाहिता के आत्महत्या करने के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पति समेत छह लोगों को दहेज हत्या के आरोप से बरी कर दिया है। कोर्ट ने पति को केवल दहेज प्रताड़ना का दोषी माना है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दीपाली शर्मा ने आदेश में कहा कि विवाहिता के आत्महत्या करने से पहले उनसे किसी तरह की क्रूरता किए जाने का साक्ष्य हैं, जिस कारण दहेज हत्या का आरोप साबित नहीं होता है। क्योंकि पति बेरोजगार था और नशे का आदी था, उसके खिलाफ इस बात के पर्याप्त साक्ष्य हैं कि वह विवाहिता को प्रताड़ित करता था। इसलिए उसे दहेज प्रताड़ना का दोषी माना गया है।

2015 में फांसी लगाकर की थी आत्महत्या 

त्रिलोकपुरी ब्लाक-25 में छह जनवरी 2015 को विवाहिता विमलेश ने घर की दूसरी मंजिल पर अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतका के स्वजन की शिकायत पर पुलिस ने उसके पति पवन, ससुर शीशपाल यादव, सास बर्फी देवी, जेठ प्रभुदयाल, जेठानी सीमा देवी और ननद हेमा के खिलाफ कल्याणपुरी थाने में दहेज प्रताड़ना व दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। कोर्ट में मृतका के माता-पिता ने कहा था कि उनकी बेटी की शादी पवन से दस दिसंबर 2010 को हुई थी।

शादी के बाद कार की कर रहे थे डिमांड

शादी के वक्त पवन या उसके स्वजन की तरफ से दहेज की मांग नहीं की गई थी। लेकिन शादी के एक साल बाद से वह कार की मांग कर रहे थे। वहीं आरोपितों ने आरोपों को गलत करार देते हुए कोर्ट में बयान दिया कि विमलेश गुस्से वाली थी। वह धमकी भी देती थी। दोनों पक्षों को सुनने, गवाहों के बयान और साक्ष्यों को देखने के बाद कोर्ट ने सभी आरोपितों को दहेज हत्या के आरोप से बरी कर दिया।

Edited By: Prateek Kumar

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