दिल्ली की पहली सुरंग सड़क का निर्माण करने वाले इंजीनियरों ने बताया कितना मुश्किल था टारगेट, रोज आ रही थी नई समस्याएं

वर्ष 2018 में सुरंग सड़क का निर्माण शुरू हुआ था। मार्च 2020 में कोरोना आ गया। परियोजना पर काम कर रहे अभियंताओं को कोरोना महामारी का सामना करना पड़ा। काफी समय तक काम बंद रहा। निर्माण स्थल पर भी कोरोना का प्रभाव रहा कई लोग बीमार पड़े।

Vinay Kumar TiwariPublish: Fri, 24 Jun 2022 03:07 PM (IST)Updated: Fri, 24 Jun 2022 03:07 PM (IST)
 दिल्ली की पहली सुरंग सड़क का निर्माण करने वाले इंजीनियरों ने बताया कितना मुश्किल था टारगेट, रोज आ रही थी नई समस्याएं

नई दिल्ली [वी.के. शुक्ला]। दिल्ली की जिस प्रगति मैदान सुरंग सड़क की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जमकर तारीफ की है और सोमवार को इससे गुजरने वालों ने इसे अद्भुत अनुभव बताया है, उसका निर्माण लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। दिल्ली की इस पहली सुरंग सड़क पर काम शुरू करने पर अभियंताओं को यह आसान लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे निर्माण कार्य आगे बढ़ता गया, नित नई समस्याएं खड़ी होती गई। सात रेलवे ट्रैक के नीचे से सुरंग बनाना बेहद जटिल काम था। समस्याओं के कारण ही सुरंग का डिजाइन तक बदल दिया गया।

काम के दौरान आती रहीं जटिलताएं

वर्ष 2018 में सुरंग सड़क का निर्माण शुरू हुआ था। काम आगे बढ़ रहा था कि मार्च 2020 में कोरोना आ गया। परियोजना पर काम कर रहे अभियंताओं को कोरोना महामारी का सामना करना पड़ा। काफी समय तक काम बंद रहा। निर्माण स्थल पर भी कोरोना का प्रभाव रहा, कई लोग बीमार पड़े। कामगार अपने गांव चले गए। उन्हें जैसे-तैसे वापस लाया गया, तो प्रदूषण के कारण निर्माण गतिविधियों पर रोक लगा दने से परियोजना पर काम रुक गया।

वर्ष 2020-21 में कई माह तक काम बंद रहा। परियोजना के बीच आने वाली विभिन्न एजेंसियों की लाइनें, जैसे- दिल्ली जल बोर्ड की पानी और सीवर लाइन, बीएसईएस की बिजली के तारों की भूमिगत लाइन को परियोजना स्थल से हटाना बड़ा काम था। सुरंग के ऊपर प्रगति मैदान के पुनर्विकास का कार्य चल रहा है। कई बार इसकी वजह से सुरंग के डिजाइन में बदलाव किया गया। प्रगति मैदान में कई इमारतें सुरंग के ऊपर बनी हैं। वर्षा से जलभराव की दिक्कत का सामना करना पड़ा। जमीन से 12 मीटर नीचे काम करना बहुत कठिन था। जमीन से भी लगातार पानी निकल रहा था।

रिंग रोड, भैरों मार्ग और मथुरा रोड पर हमेशा यातायात का भारी दबाव रहता है। ऐसे में इन सड़कों पर काम करना और साथ में यातायात संचालित करना अत्यंत कठिन था। यहां काम करने के लिए सीमित समय भी मिलता था। एक दिन में मात्र चार घंटे काम करने का वक्त मिलता था। बता दें कि इस सुरंग सड़क के ऊपर से रेलवे के नई दिल्ली से कोलकाता के दो ट्रैक और नई दिल्ली से निजामुद्दीन के लिए पांच ट्रैक गुजरते हैं।

परियोजना में इन अभियंताओं ने दिया योगदान

पीके परमार (मुख्य अभियंता), इकबाल सिंह (कार्यपालक अभियंता), रवि वर्मा (कार्यपालक अभियंता), मुकुल जोशी (सहायक अभियंता), धीरज अग्रवाल (सहायक अभियंता), नवीन कपूर (सहायक अभियंता), कुमार गौरव (सहायक अभियंता)।

Edited By Vinay Kumar Tiwari

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