वैवाहिक दुष्कर्म के अपराधीकरण की मांग वाली याचिका पर अदालत मित्र की दलील, पति नहीं बना सकता जबरन यौन संबंध

वैवाहिक दुष्कर्म के अपराधीकरण की मांग वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट में शुक्रवार को भी जारी रही। अदालत मित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जान ने दलील दी कि विवाह में यौन संबंधों की अपेक्षा से पति पत्नी के साथ जबरन यौन संबंध नहीं बना सकता है।

Pradeep ChauhanPublish: Sat, 22 Jan 2022 01:47 PM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 02:08 PM (IST)
वैवाहिक दुष्कर्म के अपराधीकरण की मांग वाली याचिका पर अदालत मित्र की दलील, पति नहीं बना सकता जबरन यौन संबंध

नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। वैवाहिक दुष्कर्म के अपराधीकरण की मांग वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट में शुक्रवार को भी जारी रही। अदालत मित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जान ने दलील दी कि विवाह में यौन संबंधों की अपेक्षा से पति, पत्नी के साथ जबरन यौन संबंध नहीं बना सकता है। विवाह में दोनों पक्षों में वैवाहिक संबंधों की अपेक्षाएं हो सकती हैं। हालांकि, ऐसी अपेक्षा का परिणाम पति द्वारा पत्नी के साथ जबरन यौन संबंध बनाने में नहीं हो सकता है।

न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ के समक्ष रेबेका जान ने कहा कि यह पति की इच्छा के बारे में न होकर उस व्यक्ति के बारे में है जो अपनी पत्नी पर अपने अधिकार का प्रयोग करता है। वह भी तब, जब पत्नी कहती है कि वह उसके साथ यौन संबंध नहीं बना सकती और नहीं बनाएगी। इस पर न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर ने कहा कि विवाहित पक्षों और अविवाहित पक्षों के बीच गुणात्मक अंतर है। रेबेका जान ने कहा कि दोनों पक्षों की अपेक्षाएं हो सकती हैं।

हालांकि, उम्मीद का नतीजा यह नहीं हो सकता है कि पति जबरन यौन संबंध बनाए। बृहस्पतिवार को पीठ ने पूछा था कि एक पति को अपनी पत्नी के साथ गैर-सहमति वाले यौन कृत्य के लिए अभियोजन से बचाने वाला कानून क्या असंवैधानिक माना जा सकता है। अदालत मित्र ने विभिन्न कानूनों में विभिन्न प्रविधानों का उदाहरण देते हुए कहा कि आइपीसी, सीआरपीसी और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की योजना में महिला को प्रविधान के केंद्र में रखकर संशोधन किया गया है।

दलील सुनने के बाद पीठ ने आगे की सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट दिल्ली पुलिस को कहा है कि परिवार की इच्छा के खिलाफ शादी करने वाली युवती को सुरक्षा दें। युवती का पति चेन्नई में कार्यरत है और उसने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति एजे भंभानी की पीठ ने नोट किया कि दोनों बालिग हैं और मर्जी से 22 नवंबर, 2021 को आर्य समाज मंदिर में शादी की थी।

उन्होंने विवाह प्रमाणपत्र सुबूत के रूप में पीठ के समक्ष पेश किया। याचिका में कहा था कि उसकी पत्नी को माता-पिता ने बंद कर लिया है। सुनवाई के दौरान वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये युवती कोर्ट में पेश हुई और उसने थाने की सुरक्षा में पक्ष रखने की इच्छा जताई। पीठ ने पुलिस को महिला को थाना ले जाने के साथ पुलिस को निर्देश दिया कि जब तक युवती चेन्नई नहीं जाती है, तब तक उसे निर्मल छाया होम में महिला इंस्पेक्टर निशा शर्मा की देखरेख में रखा जाए।

Edited By Pradeep Chauhan

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