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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने स्ट्राॅइड को लेकर कही गंभीर बातें, आप भी जान लें नहीं होगा ब्लैक फंगस

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली में 20 मई को 3231 कोरोना संक्रमण के मामले आए थे जबकि संक्रमण दर 5.5 फीसदी रही है। दिल्ली में पहले जहां अधिकतम मामले 28000 तक पहुंचे थे वह अब घटकर तीन हजार के करीब आ गए हैं।

Prateek KumarSat, 22 May 2021 06:10 AM (IST)
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने स्ट्राॅइड को लेकर कही गंभीर बातें, आप भी जान लें नहीं होगा ब्लैक फंगस

नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली में ब्लैक फंगस के अब तक 197 मामले आए हैं, जिसमें कुछ मरीज दिल्ली के बाहर के भी शामिल हैं। उन्होंने डाॅक्टर की सलाह पर ही स्ट्राॅइड लेने की अपील करते हुए कहा कि खून में शुगर बढ़ने और स्ट्राॅइड लेने से इम्युनिटी कम होने पर ब्लैक फंगस हो रहा है। जिन कोरोना मरीजों को इलाज के दौरान स्ट्रॉइड दिया गया है, वे इसके बंद होने के बाद एक सप्ताह तक सतर्क रहें और घर से बाहर न निकलें। ब्लड शुगर जब बढ़ता है, तो वायरस, फंगस और बैक्टीरिया बहुत तेजी से हमला करते हैं। दिल्ली समेत पूरे देश में ब्लैक फंगस की दवा की किक्कत है। यह दवा केंद्र सरकार के नियंत्रण में है और राज्य को कोटे के मुताबिक दवा दे रही है। इस बार कोरोना पीड़ित बच्चों के ज्यादा मामले नहीं आए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अगली लहर बच्चों को अधिक प्रभावित कर सकती है।  जैन ने कहा कि दिल्ली में संक्रमण दर घटकर 5.5 फीसदी आ गई है और अस्पतालों में 16,712 कोविड बेड व 1748 आईसीयू बेड खाली हैं।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली में 20 मई को 3231 कोरोना संक्रमण के मामले आए थे, जबकि संक्रमण दर 5.5 फीसदी रही है। दिल्ली में पहले जहां अधिकतम मामले 28,000 तक पहुंचे थे, वह अब घटकर तीन हजार के करीब आ गए हैं। इसके अलावा, संक्रमण दर 36 फीसदी से कम होकर 5 फीसदी के करीब रह गई है। यह थोड़ी सी राहत की बात है, लेकिन इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। दो-तीन महीने तक कोरोना के केस बिल्कुल नहीं आए थे, लेकिन फिर अचानक से बढ़ गए। हमें अभी भी 3 हजार मामले कम लग रहे हैं, क्योंकि 28 हजार से ये कम होकर यहां तक आए हैं। दिल्ली में जब 200-300 मामले आ रहे थे, तब एक हजार मामले भी हमें बहुत ज्यादा लग रहे थे। ऐसे में तीन हजार मामले कम नहीं होते हैं। सभी को कोरोना गाइडलाइंस का पालन करना है और लॉकडाउन में घर से बाहर निकलने से बचे। यदि सब्जी- राशन सहित कुछ जरूरी सामान लेने जाएं, तो मास्क लगाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में ब्लैक फंगस के 19 मई तक सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में 197 मामले आए हैं। इसमें दिल्ली और दिल्ली के बाहर के भी मरीज हैं। अधिकांश मामलों में यह देखने में आ रहा है कि अस्पातल से कोरोना मरीजों की छुट्टी होने के बाद ब्लैंक फंगस होने पर वापस आ रहे हैं।

लोगों को ब्लैक फंगस के बारे में आगाह करते हुए कहा कि ब्लैक फंगस दो कारणों से हो रहा है। पहला, खून के अंदर शुगर का स्तर बढ़ना और दूसरा स्ट्रॉइड की वजह से इम्यूनिटी का कम होना। पहली बात कि स्ट्राइड डॉक्टर की सलाह पर ही लें, बिना डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल भी न लें। ऐसे कई लोग हैं, जो कि घर जाने के बाद भी स्ट्रॉइड दोबारा लेते रहते हैं। स्ट्रॉइड बहुत खतरनाक हैं। इससे आपकी इम्यूनिटी बिल्कुल जीरो हो जाती है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि ब्लैक फंगस वातावरण में होता है। खासकर मिट्टी, कंस्ट्रक्शन साइट्स में और घर के अंदर जो चीजें सड़ रही होती हैं, उनके अंदर फंगस हो सकता है। स्वस्थ आदमी को फंगस का कोई भी असर नहीं पड़ता है। जिनकी इम्यूनिटी स्ट्रॉयड लेने से कम हो गई है, उनको ब्लैंक फंगस होने की संभावना रहती है।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों को स्ट्रॉइड दिए गए हैं, वे इनके बंद होने के लगभग एक सप्ताह तक पूरी तरह सतर्क रहें। फंगस वाली चीजों को लेकर सतर्क रहें और घर से बाहर न निकलें। दूसरी बात कि ब्लैक फंगस से बचने के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। जब ब्लड शुगर बढ़ता है, तो वायरस, फंगस और बैक्टिरिय बहुत तेजी से अटैक करता है। ब्लड शुगर को किसी भी तरह से दवाई लेकर कम करना है। कई सारे शुगर से पीड़ित लोग जो पहले गोली लेते थे, उनका ब्लड शुगर तेजी से बढ़ गया। डॉक्टर ने अस्पताल में इंजेक्शन लगाना शुरू किया। अस्पताल से घर जाते ही इंजेक्शन लगाना छोड़ देते हैं और गोली पर ही निर्भर रहते हैं। शुगर को नियंत्रित करना ज्यादा जरूरी है, ऐसे में बिल्कुल रिस्क न लें। इंजेक्शन अपने आप 10 से 15 दिन में बंद हो जाएगा।

वहीं, ब्लैक फंगस की दवाई के संबंध में कहा कि इनकी सिर्फ दिल्ली नहीं, बल्कि पूरे देश में दिक्कत है। ब्लैक फंगस की, जो दवाई है, उसको केंद्र सरकार नियंत्रित कर रही है। केंद्र सरकार सभी को कोटे के हिसाब से दवाई दे रही है। दिल्ली को अभी उन्होंने 2000 दवाई लेने के देने के लिए कहा है। दवाइयां जैसे ही मिलेंगी हम अस्पतालों को देंगे। ब्लैंक फंगस का घर पर इलाज नहीं हो सकता है। इसकी वजह से सीधे अस्पतालों को दवाई दे रहे हैं।

उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति को एक दिन में 5-6 इंजेक्शन लगते हैं। ऐसे में 4000 इंजेक्शन की जरूरत होती है तो एक हजार मिलते हैं। ऐसे में सभी मरीजों और अस्पातलों को पूरे इंजेक्शन नहीं मिल सकते। दवाइयों की कमी को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार को जहां से भी उपलब्ध हों, वहां से इंजेक्शन का आयात करना चाहिए। ब्लैंक फंगस के इंजेक्शनों को मेडिकल स्टोर से नहीं ले सकते हैं। एक कमेटी बनाई गई है, जिससे सीधे अस्पताल दवाई मांगेंगे। इसके बाद कमेटी दवाई देगी।

दिल्ली के अंदर अभी 28,595 बेड हैं, जिसमें से 16,712 बेड खाली हैं। दिल्ली में 1748 आईसीयू बेड अभी उपलब्ध हैं। इसके अलावा दिल्ली के अंदर 18 से 44 वर्ष तक के लिए कोवैक्सीन कई दिन पहले खत्म हो गई थी और कोवीशील्ड भी अब खत्म हो गई है। ऐसे में कई सारे वैक्सीनेशन सेंटर बंद हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें वैक्सीन की एक लाख डोज मिली तो वो सिर्फ एक दिन में लग जाएंगी। हमारा वैक्सीन लगाने का तंत्र अच्छा है। एक दिन में हम तीन से चार लाख वैक्सीन लगा सकते हैं। शेड्यूल के अंदर वैक्सीन बहुत कम दी जा रही है। शेड्यूल के जरिए जितनी पूरी महीने में वैक्सीन दे रहे हैं, उतनी हम तीन-चार दिन में लगा देंगे।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते अस्पतालों में ज्यादा बच्चे अस्पतालों में भर्ती नहीं हुए हैं। ऐसे मामले सामने आए कि पूरा परिवार कोरोना संक्रमित हुआ, लेकिन सौभाग्य से बच्चे ज्यादा गंभीर रूप से बीमार नहीं हुए हैं। ऐसे में अस्पातलों में काफी कम बच्चों को भर्ती करना पड़ा है। पिछली बार कोरोना की पीक में एक दिन में 8600 मरीज अधिकमत आए, जबकि इस बार 28 हजार मामले एक दिन में आए थे, यानी कि पहली लहर के मुकाबले 3 गुना अधिक मामले आए हैं। अभी एक रिपोर्ट पढ़ रहा था कि पिछली बार एक अस्पताल के अंदर 6 से 7 बच्चे भर्ती हुए थे, लेकिन इस बार 18 बच्चे भर्ती हुए हैं। ऐसे में इस बार मरीज भी 3 गुना थे, तो बच्चे भी तीन गुना अधिक आए हैं। इस बार बच्चों में कोरोना के मामले ज्यादा नहीं थे, लेकिन विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अगली लहर बच्चों को ज्यादा प्रभावित करेगी, जिसकी हम तैयारी कर रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वैक्सीनेशन के बारे में अभी कुछ कहना बहुत मुश्किल है। वैक्सीनेशन की पूरी प्रक्रिया कोविन सॉफ्टवेयर के जरिए पूरी होती है, जिसके ऊपर केंद्र सरकार का नियंत्रण है। उसके जरिए ही वैक्सीन लग सकती हैं। कोविन सॉफ्टवेयर के बिना हम वैक्सीन नहीं लगा सकते। कोई भी कंपनी हमें वैक्सीन किसी भी रेट पर नहीं दे सकती, जब तक केंद्र सरकार अनुमति न दे। केंद्र सरकार जितना चाहेगी, उतनी ही वैक्सीन हमें देगी। ऐसे में केंद्र सरकार अपने हिसाब से वैक्सीन दे रही है।

Edited By: Prateek Kumar

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