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BPCL के प्राइवेटाइजेशन के बाद इन कंपनियों को शेयर खरीदने की मिली छूट, Dipam ने बनाई यह व्‍यवस्‍था

BPCL privatisation news सार्वजनिक क्षेत्र की भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (BPCL) के प्राइवेटाइजेशन के बाद खुली पेशकश की स्थिति में पेट्रोनेट एलएनजी और इंद्रप्रस्थ गैस लि. (IGL) के शेयर आईओसी गेल और ओएनजीसी (ONGC) खरीद सकती हैं।

Ashish DeepThu, 22 Jul 2021 10:40 AM (IST)
BPCL के प्राइवेटाइजेशन के बाद इन कंपनियों को शेयर खरीदने की मिली छूट, Dipam ने बनाई यह व्‍यवस्‍था

नई दिल्‍ली, पीटीआइ। सार्वजनिक क्षेत्र की भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (BPCL) के प्राइवेटाइजेशन के बाद खुली पेशकश की स्थिति में पेट्रोनेट एलएनजी और इंद्रप्रस्थ गैस लि. (IGL) के शेयर आईओसी, गेल और ओएनजीसी खरीद सकती हैं। सूत्रों ने बताया कि बीपीसीएल की देश की सबसे बड़ी तरलीकृत प्राकृतिक गैस आयातक पेट्रोनेट में 12.5 प्रतिशत और खुदरा गैस बेचने वाली इंद्रपस्थ गैस लि. (आईजीएल) में 22.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। BPCL दोनों सूचीबद्ध कंपनियों की प्रवर्तक है और उनके निदेशक मंडल में शामिल है।

निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के कानूनी स्थिति के मूल्यांकन के तहत BPCL को अधिग्रहण करने वाली कंपनी को 26 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने को लेकर पेट्रोनेट एलएनजी और आईजीएल के अल्पांश शेयरधारकों के लिये खुली पेशकश करनी होगी। दीपम सरकार की BPCL में पूरी 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में है।

मामले से जुड़े तीन लोगों ने बताया कि इस प्रकार की स्थिति से बचने के लिये दीपम ने बाजार नियामक सेबी को पेट्रोनेट और आईजीएल में खुली पेशकश को लेकर छूट देने का आग्रह किया है।

सूत्रों के अनुसार हालांकि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Sebi) ने कहा है कि आईजीएल और पेट्रोनेट के प्रवर्तक के रूप में बीपीसीएल को निर्धारित प्रारूप में आवेदन देने की जरूरत होगी। उसके बाद बीपीसीएल ने आवेदन दिया।

उसने कहा कि छूट नहीं मिलने और खुली पेशकश की स्थिति में, पेट्रोनेट और आईजीएल के अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के प्रवर्तक इन कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए BPCL का अधिग्रहण करने वाली कंपनी के साथ इस तरह के शेयर की पेशकश में संयुक्त रूप से भाग ले सकते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे दोनों कंपनियों में सबसे बड़े शेयरधारक बने रहें।

गैस कंपनी गेल की आईजीएल में 22.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है और वह कंपनी में बीपीसीएल के साथ सह-प्रवर्तक है। पेट्रोनेट के मामले में गेल, रिफाइनरी कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और तेल एवं गैस उत्पादक ओएनजीसी की 12.5-12.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बीपीसीएल की भी इतनी ही हिस्सेदारी है।

पेट्रोनेट और एलएनजी के शेष शेयर सार्वजनिक और संस्थागत निवेशकों के पास हैं। बीपीसीएल के निजी कंपनी बनने से आईजीएल और पेट्रोनेट में सार्वजनिक क्षेत्र की शेयरधारिता कम होगी। इससे दोनों कंपनियों की स्थिति बदल सकती है।

आईजीएल में बीपीसीएल को अधिग्रहण करने वाली कंपनी की खुली पेशकश के बाद 48.5 प्रतिशत हिस्सेदारी हो जाएगी। पेट्रोनेट में 38.5 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जो आईओसी, ओएनजीसी और गेल की 37.5 प्रतिशत हिस्सेदारी से ज्यादा है।

सूत्रों के अनुसार इन कंपनियों को सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई बनाये रखने के लिये यह सुझाव दिया गया है कि आईजीएल और पेट्रोनेट के अन्य प्रवर्तक बीपीसीएल के अधिग्रहणकर्ता के साथ खुली पेशकश में संयुक्त रूप से भाग ले सकते हैं। इससे वे सामान्य शेयरधारकों के कुछ शेयर अधिग्रहण कर अपनी हिस्सेदारी इन कंपनियों में बढ़ा सकते हैं।

इससे यह सुनिश्चित होगा कि सार्वजनिक उपक्रम इन कंपनियों में सबसे बड़े शेयरधारक बने रहेंगे। इससे सरकार का मकसद पूरा होगा। अधिग्रहणकर्ता को खुली पेशकश के लिए मजबूर न होना पड़े, इसके लिये दूसरा विकल्प BPCL के लिए पेट्रोनेट और आईजीएल में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचना हो सकता था जिससे उसका प्रवर्तक का दर्जा खत्म हो जाए।

हालांकि, BPCL इसके पक्ष में नहीं है। उसका कहना है कि इससे मूल्यांकन प्रभावित होगा। सूत्रों के अनुसार सरकार का विचार है कि BPCL का अधिग्रहण करने वाले के लिये पेट्रोनेट और आईजीएल के लिये खुली पेशकश को लेकर मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

उसका मानना है कि पेट्रोनेट और आईजीएल के लिए खुली पेशकश उन बोलीदाताओं को रोक सकती है जो मुख्य रूप से BPCL की तेल शोधन परिसंपत्तियों और ईंधन विपणन कारोबार में 22 फीसदी हिस्सेदारी पर नजर टिकाए हुए हैं।

सरकार की BPCL में 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी का मूल्य मौजूदा शेयर भाव के हिसाब से 52,125 करोड़ रुपये है। अतिरिक्त 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिये कंपनी के छोटे शेयरधारकों के लिये खुली पेशकश को लेकर 25,580 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत आएगी। इसके अलावा, आईजीएल में 26 प्रतिशत के लिये खुली पेशकश को लेकर 9,800 करोड़ रुपये और पेट्रोनेट के मामले में करीब 8,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत आएगी।