Post Office में PPF खाता कौन खोल सकता है, कितना ब्याज मिलता है और क्या नियम हैं? यहां जानें

PPF Account पीपीएफ यानी सार्वजनिक भविष्य निधि योजना का लाभ देश का कोई भी नागरिक उठा सकता है। डाकघर में आसानी से पीपीएफ खाता खुलवाया जा सकता है। इसपर डाकघर में आसानी से पीपीएफ खाता खुलवा सकते हैं।

Lakshya KumarPublish: Tue, 19 Apr 2022 08:01 AM (IST)Updated: Tue, 19 Apr 2022 08:33 AM (IST)
Post Office में PPF खाता कौन खोल सकता है, कितना ब्याज मिलता है और क्या नियम हैं? यहां जानें

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। निवेश करना एक अच्छी आदत हो सकती है। हालांकि, निवेश कई तरह के होते हैं। कुछ निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन होते हैं और कुछ निवेश ऐसे होते हैं, जिनमें बाजार के उतार-चढ़ाव का उनके रिटर्न से कोई लेना देना नहीं होता। जिस निवेश में बाजार के जोखिमों का खतरा नहीं होता, उन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है। ऐसे में अगर आप अपने लिए सुरक्षित निवेश के विकल्प तलाश रहे हैं, तो आज हम आपको पीपीएफ यानी सार्वजनिक भविष्य निधि योजना की जानकारी देने वाले हैं। आप किसी भी डाकघर में आसानी से पीपीएफ खाता खुलवा सकते हैं। चलिए, इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।

Post Office में PPF खाता कौन खोल सकता है?

भारतीय डाक की वेबसाइट के अनुसार, कोई भी भारतीय नागरिक पीपीएफ खाता खुलवा सकता है। इसके अलावा, नाबालिग या मानसिक रूप से बीमार/कमजोर व्यक्ति की ओर से उसके अभिभावक खाता खुलवा सकते हैं। यहां गौर देने वाली बात यह है कि पूरे देश में डाकघर या किसी भी बैंक में केवल एक ही खाता खोला जा सकता है।

पीपीएफ खाते पर कितना ब्याज मिलता है?

पीपीएफ खाते पर 7.1 फीसदी का वार्षिक ब्याज मिलता है। यह चक्रवृद्धि वार्षिक ब्याज होता है। ब्याज की गणना कैलेंडर माह के लिए पांचवें दिन की समाप्ति और महीने के अंत के बीच खाते में सबसे कम शेष राशि पर की जाती है। ब्याज प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत में खाते में जमा किया जाता है।

जमा के क्या हैं नियम?

एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम राशि 1,50,000 रुपये जमा किए जा सकते हैं. जमा करने की अधिकतम सीमा 1.50 लाख रुपये है, जिसमें किसी भी व्यक्ति के अपने खाते और उसके द्वारा एक नाबालिग की ओर से खोले गए खाते में जमा राशि शामिल होगी. इस सीमा के अंदर वित्त वर्ष में कितनी भी बार 50 रुपये के गुणक की किस्तों में राशि जमा की जा सकती है।

Edited By Lakshya Kumar

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