प्रीमियम भरने में जीवन बीमा ग्राहकों की अब ज्‍यादा कटेगी जेब, जानिए कब से हुआ लागू

डाक विभाग ने नोटिफिकेशन में कहा है कि सरकारी पोर्टल से अधिकृत बैंक और उनके पीजी/पीजीए को कोई एमडीआर भुगतान (MDR Payment) नहीं किया जाएगा। सभी MDR rates का भुगतान ग्राहक/कार्ड धारक से होगा। PLI/RPLI ऑनलाइन प्रीमियम भुगतान लेन-देन के लिए जरूरी आदेश लागू किए जा रहे हैं।

Ashish DeepPublish: Thu, 20 Jan 2022 09:42 AM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 09:15 AM (IST)
प्रीमियम भरने में जीवन बीमा ग्राहकों की अब ज्‍यादा कटेगी जेब, जानिए कब से हुआ लागू

नई दिल्‍ली, बिजनेस डेस्‍क। जीवन बीमा ग्राहकों के लिए जरूरी खबर है। अब उन्‍हें प्रीमियम भरने में ज्‍यादा चार्ज देना होगा। जिन लोगों के पास ग्रामीण डाक जीवन बीमा (RPLI) और डाक जीवन बीमा (PLI) पॉलिसी हैं, उन्हें 17 जनवरी, 2022 से बीमा प्रीमियम का ऑनलाइन भुगतान करते समय मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant discount rate, MDR) शुल्‍क चुकाना होगा। डाक विभाग ने 18 जनवरी, 2022 को इसका ऐलान कर दिया है।

डाक विभाग ने नोटिफिकेशन में कहा है कि सरकारी पोर्टल से अधिकृत बैंक और उनके पीजी/पीजीए को कोई एमडीआर भुगतान (MDR Payment) नहीं किया जाएगा। सभी MDR rates का भुगतान ग्राहक/कार्ड धारक से होगा। PLI/RPLI ऑनलाइन प्रीमियम भुगतान लेन-देन के लिए जरूरी आदेश लागू किए जा रहे हैं। अब से MDR Rate का भुगतान ग्राहक/कार्ड धारक द्वारा होगा, जहां भी ऑनलाइन पीएलआई/आरपीएलआई प्रीमियम भुगतान लेन-देन के लिए लागू हो। यह आदेश 17 जनवरी 2022 से प्रभावी हो गया है।

क्‍या है MDR

MDR एक शुल्क है, जो एक व्यापारी को उनके जारीकर्ता बैंक द्वारा अपने ग्राहकों से क्रेडिट और डेबिट कार्ड के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने के लिए लिया जाता है। ग्रामीण डाक जीवन बीमा (RPLI) 24 मार्च, 1995 को भारत में ग्रामीण समुदायों के लिए पेश की गई थी। मल्होत्रा ​​समिति के मुताबिक 1993 में देश की बीमा योग्य आबादी का केवल 22% बीमा किया गया था जो कुल जीवन बीमा संपत्ति का केवल 10% थी। वेबसाइट के अनुसार, योजना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर वर्गों और महिला श्रमिकों पर ध्यान देने के साथ-साथ ग्रामीण आबादी के बीच बीमा ज्ञान को बढ़ाने के साथ कवरेज देना है।

क्‍या है PLI

पीएलआई (डाक जीवन बीमा) पहली बार 1 फरवरी, 1884 को लागू किया गया था। यह डाक कर्मचारी सामाजिक कार्यक्रम के रूप में शुरू हुआ और बाद में 1888 में टेलीग्राफ विभाग के कर्मचारियों को शामिल करने के लिए इसका विस्तार किया गया।

Edited By Ashish Deep

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept