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Share Market Tips: जानिए अप्रैल महीने में किस स्तर तक पहुंचेगा बाजार, इन शेयरों पर दें ध्यान

Share Market Tipsवर्तमान में भारत का बाजार पूंजीकरण 2.75 ट्रिलियन डॉलर है जबकि जीडीपी 2.7 ट्रिलियन डॉलर है और इसलिए अब यह अनुपात 100 को पार कर 101.85 पर पहुंच गया है। हमारे पास 120 तक पहुंचने की गुंजाइश है जिसका मतलब है 20 फीसद तेजी।

Pawan JayaswalTue, 30 Mar 2021 06:36 AM (IST)
Share Market Tips: जानिए अप्रैल महीने में किस स्तर तक पहुंचेगा बाजार, इन शेयरों पर दें ध्यान

नई दिल्ली, किशोर ओस्तवाल। जिस तरह से बाजार नए सेटलमेंट के पहले दिन रिकवर हुआ, उससे यह स्पष्ट है कि निफ्टी में 1000 अंक की गिरावट का कारण वही है, जो हमने अपनी पिछली चार रिपोर्ट्स में बताया है। यील्ड को लेकर डर जिस तरह बढ़ रहा है और कोरोना के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए तो बाजार को शुक्रवार को भी गिरना चाहिए था।

गुरुवार को PC रेश्यो .66 के निम्न स्तर पर पहुंच गया। हम सभी को बता रहे थे कि यह टिकाऊ नहीं है। शुक्रवार को निफ्टी में रिकवरी आई और एसजीएक्स में यह 14635 पर बंद हुआ। हालांकि, पुट कॉल रेश्यो बहुत खराब है, जो 29 अप्रैल 2021 के अनुसार, ओआई आधार पर 1.55 दिख रहा है। यह अप्रैल, 2021 में एक बड़ी रैली का संकेत देता है। चरम पर यह रेश्यो 1.58 था और अब 29 अप्रैल OI पर यह 1.55 पर दिखाई दे रहा है। .66 रेश्यो मार्च 2020 के .47 के सर्वकालिक निम्न स्तर के करीब है, इसलिए वर्तमान स्तर पर बेचना आत्मघाती होगा। .66 यह भी बताता है कि बियर्स अभी भी शॉर्टिंग कॉल्स के पक्ष में हैं, हालांकि यह मैनिपुलेटिव हो सकता है।

पुट/कॉल रेश्यो (PCR) एक लोकप्रिय डेरिवेटिव संकेतक है, जिसे विशेष रूप से ट्रेडर्स को बाजार के ओवरऑल सेंटीमेंट (मूड) को मापने में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस रेश्यो की गणना ऑप्शन ट्रेडिंग वॉल्यूम के आधार पर या किसी विशेष अवधि के लिए ओपन इंट्रेस्ट के आधार पर की जाती है। यदि रेश्यो 1 से अधिक है, तो इसका मतलब है कि दिन के दौरान अधिक पुट ट्रेड हुए हैं और यदि यह 1 से कम है, तो इसका मतलब है कि अधिक कॉल ट्रेड हुए हैं। पीसीआर की गणना संपूर्ण रूप से ऑप्शन सेगमेंट के लिए की जा सकती है, जिसमें सूचकांकों की तरह ही इंडिविजुअल स्टॉक्स भी शामिल होते हैं।

यह अनुपात बताता है कि अधिक से अधिक कॉल बेचे गए थे। बिक्री इतनी बढ़ गई कि बाजार स्पष्ट रूप से ओवरसोल्ड जोन में है। बेशक आप यह नहीं कह सकते कि यह बिल्कुल बॉटम है, क्योंकि आक्रामक बियर्स और अधिक कॉल राइटिंग की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन ऐतिहासिक रूप से यह देखा जाता है कि ऐसे परिदृश्य में भले ही बाजार में कुछ गिरावट की गुंजाइश होती है, लेकिन उछाल भी समान रूप से तेज और उग्र होती है, जो कि शॉर्ट सेलर्स के लिए अधिक खतरनाक हो सकती है। यह उछाल चंद व्यापारिक सत्रों में पूरे घाटे को मिटा सकती है। उदाहरण के लिए टाटा स्टील गिरकर 693 पर आ गया था और फिर सिर्फ एक दिन में ही उछलकर अपने पहले के उच्च स्तर 780 पर पहुंच गया। जो हमने टाटा स्टील में देखा है, वह निफ्टी के साथ-साथ अन्य शेयरों में भी देख सकते हैं।

अप्रैल में निफ्टी की रेंज 14000 से 15500 होगी। 14000 क्यों....? बियर्स यह साबित करने की कोशिश करेंगे कि बाजार ओवरवैल्यूड है और आक्रामक रूप से शॉर्ट किया जाए। इसके लिए वे बॉन्ड यील्ड का उपयोग करेंगे। हम यह बात कह चुके हैं कि बॉन्ड यील्ड का हव्वा बनाया हुआ है और इसका भारतीय बाजारों पर कोई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा। बॉन्ड यील्ड का डर दिखाकर केवल अस्थिरता क्रिएट की जा सकती है। और 15500 क्यों...? 29 अप्रैल 2021 का पुट कॉल रेश्यो 1.55 है, जो निफ्टी के उच्च स्तर 15300 वाले 1.58 के करीब है। इसलिए हमने लक्ष्य 15500 रखा है।

हम पहले ही बता चुके हैं कि अगर निफ्टी 14000 पर आ जाता है, तो कोई भी ऑपरेटर प्रभावित नहीं होगा, क्योंकि वे 8000-10000 के स्तर से लॉन्ग हैं और वे केवल इसे 15500 पर ले सकते हैं, जिसका मतलब है कि उनके पास 1500 अंक की  रैली का लाभ लेने का मौका है। केवल एक वर्ग जो प्रभावित होगा, वह है ट्रेडर्स, जो रुख के साथ चलते हैं। यहां तक ​​कि 3 से 5 फीसद की गिरावट का मतलब है ट्रेडर्स का अंत, जबकि हमने कुछ समय में टिस्को जैसे शेयरों में 15 फीसद की रैली देखी है। अब BPCL, BHARATI, TATA MOTORS, MAHINDRA, MNM FIN, SBI, ITC, ZEE इत्यादि को देखें, जो अप्रैल में 15 से 20 फीसद बढ़ेंगे और कोई भी इसे पकड़ नहीं पाएगा।

कुल्हाड़ी हमेशा ट्रेडर्स पर गिरती है। उन्हें स्टॉप लॉस के साथ ट्रेड करना सिखाया गया है और इतिहास बताता है कि 10 में से 7 बार स्टॉप लॉस ट्रिगर होता है, जिसका मतलब है कि ट्रेडर्स का शुद्ध घाटा। इसके विपरीत निवेशक सफल रहते हैं, क्योंकि वे बॉटम फिशिंग नहीं करते हैं और बाजार को समय देते हैं।

अगले हफ्ते से नए सिरे से फंडिंग शुरू होगी और एनबीएफसी रिटेल के लिए नई बुक्स खोलेंगे। ऐसे कई कारक हैं, जो बाजार को उसी तरह चलाएंगे जैसा हम मई 2020 से देख रहे हैं।

अब तथ्यों और आंकड़ों पर ध्यान दें कि 1000 से 2000 करोड़ रुपये की बिक्री जो कि एफपीआई से आती है, कभी-कभी राउंड ट्रिपिंग और हेज फंडों के कारण होती है। कृपया ध्यान दें कि एफपीआई द्वारा मई 2020 से मार्च 2021 तक 2,80,000 करोड़ रुपये डाले गए थे और अकेले मार्च में भी यह आंकड़ा सकारात्मक रूप से 10000 करोड़ रुपये था, जबकि निफ्टी 1000 अंक गिर गया। यह साबित करता है कि एफपीआई ने भारत में बिकवाली शुरू नहीं की है और विरूपण ऑपरेटर्स से आया है और हम संभावित कारणों को समझा चुके हैं।

अब फेड ने हर महीने 80 बिलियन यूएस डॉलर की बॉन्ड खरीद को मंजूरी दे दी है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए एक और 3 ट्रिलियल डॉलर का उपयोग किया जा रहा है। जिसका अर्थ है कि भारत में हर महीने 6 बिलियन यूएस डॉलर का प्रवाह होगा। 

इसके आधार पर हम निफ्टी के लिए लक्ष्य 16600 और उसके बाद 17500 पर रखते हैं। एनएसई 39.15 पीई दिखाता है, जो 1 अप्रैल 2021 से 31.32 में बदल जाएगा। ब्लूमबर्ग के अनुसार, पीई 34.51 पर है और सीएनआई के अनुसार यह 27.6 पर है, इसलिए आपको तय करना होगा कि आप किस पीई को फॉलो करना चाहते हैं। अब इसकी तुलना यूएस डॉउ से करें, जो 29.53 पर ट्रेड करता है और आमतौर पर बहुत उच्च  ग्रोथ के चलते भारत डॉउ से 20 फीसद प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा था। हमारा मानना ​​है कि भारत अभी भी सुरक्षित जोन में है। उस अनुपात पर 18500 भी संभव है। वर्तमान तरलता परिदृश्य को देखते हुए 16600 और 17500 अधिक दूर नहीं हैं।

वर्तमान में भारत का बाजार पूंजीकरण 2.75 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि जीडीपी 2.7 ट्रिलियन डॉलर है और इसलिए अब यह अनुपात 100 को पार कर 101.85 पर पहुंच गया है। हमारे पास 120 तक पहुंचने की गुंजाइश है, जिसका मतलब है 20 फीसद तेजी, जो हमें 17500 पर ले जाता है। दिसंबर 2007 में हम 149 फीसद के उच्च स्तर पर भी पहुंचे थे, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। इसलिए हम मानते हैं कि हर गिरावट एक खरीद का अवसर है।

(लेखक cniresearchltd.com के सीएमडी हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)