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Investment Tips : पोर्टफोलियो संतुलित है तो उतार-चढ़ाव से क्या डरना, बाजार का भविष्य है बेहतरीन

Investment Tips वर्तमान में हर तरह के निवेश पर दबाव है और थोड़े वक्त के लिए ऐसा ही रहने वाला है। ऐसे में खुदरा निवेशकों को इक्विटी पोर्टफोलियो पर नजर रखनी चाहिए। अपने पोर्टफोलियो की बीएसई-सेंसेक्स या एनएसई-निफ्टी-50 जैसे बेंचमार्क सूचकांकों से तुलना करनी चाहिए।

Pawan JayaswalMon, 17 May 2021 12:10 PM (IST)
Investment Tips : पोर्टफोलियो संतुलित है तो उतार-चढ़ाव से क्या डरना, बाजार का भविष्य है बेहतरीन

नई दिल्ली, विनोद नायर। खुदरा निवेशकों, खासतौर पर पिछले एक वर्ष के दौरान निवेश बाजारों में आने वाले बहुत से निवेशकों के लिए पिछला कुछ समय खासा दबाव वाला रहा है। सच यह है कि पोर्टफोलियो को संतुलित और मुश्किल वक्त में खुद के लिए लाभकारी बनाने के लिए ऐसे वक्त बेहद उपयुक्त होते हैं। इतना निश्चित है कि बाजार का भविष्य बेहतरीन है और वर्तमान दबाव बहुत थोड़े वक्त का है।

जिस तरह के आर्थिक हालात से इस वक्त हम सब गुजर रहे हैं, उसमें खुदरा निवेशकों का एक बड़ा वर्ग खुद को तनाव-दबाव में महसूस कर रहा है। जिन निवेशकों ने पिछले एक वर्ष या उससे कुछ ही पहले निवेश बाजार में कदम रखा है, उनके मामले में यह तनाव अस्वाभाविक भी नहीं है। लेकिन ऐसे मुश्किल वक्त में सकारात्मक रहने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि अपने निवेश पोर्टफोलियो को बदलते बाजार के हिसाब से जहां तक संभव हो, संतुलित रखा जाए।

इसके लिए अपने पोर्टफोलियो पर समय-समय पर नजर डालते रहना और उसमें उचित बदलाव करते रहना भी जरूरी है। वित्तीय योजना बनाने के लिए विशेषज्ञों और वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेना और म्यूचुअल फंड निवेश पर नजर रखना अच्छा तरीका है। इन सबके बावजूद, आपका अपना नजरिया आपके निवेश और संपित्त अर्जन को अतिरिक्त बल प्रदान करता है। मेरा मानना है कि लंबी अवधि में संपत्ति अर्जन के लिए इक्विटी में निवेश से अच्छा साधन नहीं है।

वर्तमान में हर तरह के निवेश पर दबाव है और थोड़े वक्त के लिए ऐसा ही रहने वाला है। ऐसे में खुदरा निवेशकों को इक्विटी पोर्टफोलियो पर नजर रखनी चाहिए। अपने पोर्टफोलियो की बीएसई-सेंसेक्स या एनएसई-निफ्टी-50 जैसे बेंचमार्क सूचकांकों से तुलना करनी चाहिए। आप देखेंगे कि पिछले एक वर्ष के दौरान सेंसेक्स ने करीब 55 फीसद का रिटर्न दिया है।

वहीं, इस वर्ष 12 मई के आधार पर मैं कह सकता हूं कि पिछले एक वर्ष के दौरान निफ्टी का रिटर्न 67 फीसद रहा है। ऐसे में अगर आपका पोर्टफोलियो अच्छा रिटर्न दे रहा है तो यकीन मानिए कि आपको भविष्य के प्रति चिंतित होने की कतई जरूरत नहीं है। समय-समय पर सरकार द्वारा दिए गए आर्थिक पैकेज की वजह से कोरोना काल में भी बाजार का प्रदर्शन सालाना आधार पर अच्छा रहा है। इसके साथ ही कई सेक्टर ऐसे भी रहे, जिनके लिए यह आपदा एक अवसर के रूप में आई।

आइटी, फार्मा और केमिकल्स ऐसे ही कुछ सेक्टर हैं जिनकी मांग इस दौरान घरेलू और विदेशी बाजारों में भी अच्छी बनी रही है और बनी रहेगी। फिर, एफएमसीजी, टेलीकॉम, ई-कॉमर्स और ग्रीन एनर्जी की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के भविष्य को देखते हुए इन सेक्टरों का प्रदर्शन भी बेहतर रहने वाला है। इन्फ्रा, मेटल, कंज्यूमर गुड्स और इंडस्टि्रयल सेक्टर बरसों तक इकोनॉमी की बुनियाद रहे हैं। इन सेक्टरों में सरकारी और निजी स्तर पर जिस मात्रा में निवेश की तैयारी है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि लंबी अवधि में कुल मिलाकर मांग जबर्दस्त बनी रहने वाली है और बाजारों का प्रदर्शन अच्छा रहने वाला है।

बाजार में इस वक्त का दबाव बहुत छोटी अवधि के लिए है। यह दबाव इस वर्ष फरवरी में अपने चरम पर था। कोरोना की दूसरी लहर से ज्यादा घबराने की इसलिए जरूरत नहीं है क्योंकि लॉकडाउन, सामूहिक प्रतिरोधी क्षमता या हर्ड इम्युनिटी तथा टीकाकरण अभियान के गति पकड़ने के साथ-साथ यह दो-तीन महीनों में तेजी से उतर जाएगी। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इक्विटी बाजार हमेशा भविष्य को देखकर चलता है। और जहां तक भविष्य का प्रश्न है, तो एक-दो वर्षो के दौरान उद्योग, उत्पादन और मांग सबमें तेज विकास दर दिखेगी।

इसलिए मेरी समझ से खुदरा निवेशकों और नए निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को इक्विटी, डेट और गोल्ड, इन सभी का संतुलित मिश्रण रखना चाहिए। कुल मिलाकर कहें तो बाजार का भविष्य बेहतर है और संतुलित पोर्टफोलियो बनाकर नए निवेशक भी मौके का फायदा उठा सकते हैं।

(लेखक जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च प्रमुख हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)