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Union Budget 2021-22 : राजग-2 का तीसरा बजट आज पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, तेज विकास की जमीन होगी तैयार

कोरोना के चुनौतीपूर्ण काल में केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर जो नीतियां लागू की हैं सोमवार को पेश होने वाला आम बजट कमोबेश उन्हीं नीतियों को आगे बढ़ाने वाला होगा। जानें बजट में कल किन पर रहेगा जोर....

Krishna Bihari SinghMon, 01 Feb 2021 06:46 AM (IST)
Union Budget 2021-22 : राजग-2 का तीसरा बजट आज पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, तेज विकास की जमीन होगी तैयार

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। कोरोना के चुनौतीपूर्ण काल में केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर जो नीतियां लागू की हैं, सोमवार को पेश होने वाला आम बजट कमोबेश उन्हीं नीतियों को आगे बढ़ाने वाला होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दिन में 11 बजे आम बजट पेश करेंगी। यह राजग-2 का तीसरा बजट होगा। इससे पहले 10.15 पर कैबिनेट की बैठक होगी। सुधारों को लेकर राजनीतिक विरोध के बावजूद बजट 2021-22 में अर्थव्यवस्था के कुछ सेक्टरों में साहसिक सुधारों की घोषणा की जा सकती है। 

अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियां

  • सरकार का खजाना खाली, राजकोषीय घाटा रिकार्ड स्तर की तरफ
  • लगातार कोशिशों के बावजूद विनिवेश के मोर्चे पर नाकामी
  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अब भी संकट में
  • बैंकों की वजह से वित्तीय सेक्टर में अनिश्चितता का माहौल
  • राजनीतिक विरोध की वजह से सुधारों पर मंडरा रहा खतरा

हेल्थ सेक्टर को मिलेगी तरजीह 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह तीसरा आम बजट होगा। इस बजट में वे सारे उपाय किए जाएंगे, जिनका जमीनी असर अगले दो-तीन वर्षोंं में दिख सके, ताकि वर्ष 2024 के आम चुनाव में जब भाजपा उतरे, तब तक उसके खाते में आर्थिक उपलब्धियों का पूरा ब्योरा हो। उद्योग चैंबर एसोचैम के महासचिव दीपक सूद का कहना है कि हेल्थ सेक्टर को बजट में सर्वप्रथम प्राथमिकता मिलेगी।

क्या हो सकते हैं उपाय

  • सुधारों पर साहसिक कदम उठाने से नहीं हिचकेगी सरकार
  • खजाने की चिंता के बावजूद सरकारी खर्चे में नहीं होगी कटौती
  • राजस्व बढ़ाने के लिए कई सेक्टरों पर अतिरिक्त कर के आसार
  • स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर दिख सकती है नई सोच
  • कुछ सेक्टरों में नियमन के पेंच ढीले किए जाने के संकेत
  • देश की टैक्स व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने की होगी कोशिश

आत्मनिर्भर भारत पर होगा जोर 

वर्ष 2019 में कारपोरेट सेक्टर को कर में कटौती का तोहफा देने के बाद इस बार उन पर नियमन के बोझ को घटाने का संकेत दिया जाएगा, ताकि आत्मनिर्भर भारत के एजेंडे को मजबूत किया जा सके। राजकोषीय स्थिति चिंताजनक होने के बावजूद समाजिक व बुनियादी ढांचे के लिए जरूरी सरकारी खर्चे का स्तर पहले ही की तरह बढ़ाया जाएगा। ऐसे में अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए कुछ सेक्टरों पर टैक्स बोझ बढ़ाए जाने के भी पूरे आसार हैं।

अर्थव्यवस्था के सकारात्मक तथ्य

  • लॉकडाउन के बाद तकरीबन हर सेक्टर में तेजी से सुधार
  • कोरोना वैक्सीन लगने के बाद हालात और सामान्य होने के आसार
  • महंगाई का खतरा काफी हद तक काबू में
  • चीन को लेकर वैश्विक स्तर पर उपजी आशंका से निर्यात को फायदा संभव
  • श्रम और कृषि सुधारों की वजह से वैश्विक निवेशक समुदाय में भारत के प्रति आकर्षण

मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट भी एजेंडे में 

दूसरे स्थान पर मैन्युफैक्चरिंग रहेगा, तीसरे स्थान पर छोटे व मझोले उद्योग, चौथे स्थान पर रियल एस्टेट और इसके बाद इंफ्रास्ट्रक्चर। साथ ही घरेलू मांग को बढ़ाना भी वित्त मंत्री के एजेंडे में होगा। अब देखना होगा कि वह कारपोरेट टैक्स में कटौती के बाद पर्सनल टैक्स दर को घटाती हैं या नहीं।

मध्यम वर्ग का रखा जाएगा ध्‍यान  

सीआइआइ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी के मुताबिक, आर्थिक सर्वेक्षण से स्पष्ट है कि देश की अर्थव्यवस्था में वी-शेप रिकवरी (बहुत तेजी से सामान्य होना) हो चुकी है। ऐसे में बजट इस रिकवरी को और पुख्ता बनाने वाला और लंबे समय तक आर्थिक विकास की गति को तेज बनाए रखने वाला होगा। सरकार निश्चित तौर पर मध्यम वर्ग का भी ध्यान रखेगी, ताकि घरेलू मांग से जुड़ी समस्या का समाधान निकले।

वैश्विक निवेशकों को भी लुभाने की होगी कोशिश 

खजाने के स्तर पर भारी चुनौती का सामना कर रहीं वित्त मंत्री राजकोषीय प्रबंधन पर क्या रोडमैप दिखाती हैं, इस पर ना सिर्फ देश की, बल्कि विदेशी एजेंसियों की भी नजर होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, 2020 में विदेशी निवेश आकर्षित करने में बहुत सफल रहने के बाद भारत वैश्विक निवेशकों के समक्ष अपनी भावी राजकोषीय व्यवस्था का खाका निश्चित तौर पर पेश करेगा। ऐसा नहीं होने पर निवेशकों के मन में अनिश्चितता का भाव पनप सकता है। 

विकास की गति देनी होगी रफ्तार    

मौजूदा वित्त वर्ष की अप्रत्याशित स्थिति में 12 लाख करोड़ रुपये का भारी भरकम कर्ज ले चुकी केंद्र सरकार के भावी उधारी कार्यक्रम को लेकर भी सभी की उत्सुकता है। आर्थिक सर्वेक्षण का संकेत है कि अगर भारत को उधारी लेकर विकास की गति तेज करनी हो तो इससे घबराना नहीं चाहिए।