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ईपीएस पेंशन में बढ़ोतरी के मसले पर असमंजस में श्रम मंत्रालय

Thu, 07 Dec 2017 12:12 PM (IST)

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। कर्मचारी भविष्य निधि की पेंशन स्कीम के तहत अधिक पेंशन के लिए कर्मचारियों के योगदान के अनुरोध का मामला वित्त मंत्रालय पहुंच गया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रिटायर्ड कमचारी और मौजूदा कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद ज्यादा पेंशन पाने के लिए अपने वेतन से पेंशन में अंशदान के लिए आवेदन कर रहे हैं। ऐसे आवेदनों की बाढ़ सी आ गई है। श्रम मंत्रालय की भी समझ में नहीं आ रहा कि क्या किया जाए क्योंकि यदि इन्हें स्वीकार किया जाता है तो ईपीएफ कोष गड़बड़ा जाएगा। स्थिति की नजाकत को देख मंत्रालय ने गेंद वित्त मंत्रालय के पाले में डाल दी है। यही नहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय को भी इससे अवगत करा दिया गया है।

ईपीएस के कुछ पेंशनरों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अनुरोध किया था कि उन्हें ईपीएफ के अलावा ईपीएस में भी मनमाफिक योगदान की छूट दी जाए ताकि वे अधिक पेंशन प्राप्त कर सकें। पिछले साल अक्टूबर में दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पेंशनरों के पक्ष में फैसला सुनाया था और पिछले वर्षो के सेवाकाल के लिए एकमुश्त अतिरिक्त योगदान लेकर पेंशनरों को ज्यादा पेंशन देने का ईपीएफओ को आदेश दिया था। तबसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को ईपीएस में योगदान के अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं।

ईपीएफओ ने इस मामले में स्पष्टीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की भी तैयारी शुरू कर दी है। वह विभिन्न हाईकोर्टो में चल रहे इसी तरह के मामले सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करवाने का भी प्रयास करेगा। इस संबंध में उसने आंतरिक सकरुलर जारी किया है जिसमें इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने का इरादा जताया गया है।

इस बीच ट्रेड यूनियनों ने भी ईपीएस के तहत न्यूनतम पेंशन को एक हजार रुपये से बढ़ाकर 3000 या 5000 रुपये करने के लिए सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इस तरह सरकार के समक्ष दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ उसे ये देखना है कि स्कीम के तहत अधिक योगदान देने के इच्छुक पेंशनरों को अधिक पेंशन कैसे दी जाए तो दूसरी तरफ न्यूनतम पेंशन को किस तरह बढ़ाया जाए। दोनो ही मामलों में सरकार के ऊपर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। इसे देखते हुए श्रम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय व पीएमओ से हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। यदि सुप्रीम कोर्ट सभी कर्मचारियों को इसका लाभ देने का आदेश देते है तो सरकार को ईपीएस स्कीम में संशोधन करना पड़ सकता है।

अभी ईपीएस में कर्मचारियों से कोई योगदान नहीं लिया जाता है। केवल नियोक्ता और सरकार योगदान करती है। पीएफ में नियोक्ता के 12 फीसद योगदान में से 8.33 फीसद ईपीएस में जाता है जबकि 1.16 फीसद योगदान सरकार करती है। इस तरह हर महीने कर्मचारी के वेतन (मूल वेतन व महंगाई भत्ता) का 9.49 फीसद ईपीएस में जाता है। योगदान के लिए वेतन की सीमा है।

Tags: # Labor ministry ,  # EPS ,  # pension Hike ,  # EPFO ,  # High Court ,  # Business news in hindi , 

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