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MSME का कर्ज बार-बार नामंजूर करना बैंकों को पड़ेगा भारी, मंत्रालय के कंट्रोल रूम को मिल जाएगी सूचना

छोटे उद्यमियों की कर्ज गुजारिश को कोई बैंक बार-बार जानबूझ कर रिजेक्ट करता है तो उस बैंक को यह भारी पड़ सकता है।

Manish MishraThu, 21 May 2020 09:35 AM (IST)
MSME का कर्ज बार-बार नामंजूर करना बैंकों को पड़ेगा भारी, मंत्रालय के कंट्रोल रूम को मिल जाएगी सूचना

नई दिल्ली, राजीव कुमार। छोटे उद्यमियों की कर्ज गुजारिश को कोई बैंक बार-बार जानबूझ कर रिजेक्ट करता है तो उस बैंक को यह भारी पड़ सकता है। एमएसएमइ मंत्रालय के कंट्रोल रूम में उस बैंक की विस्तृत जानकारी आर्टिफिशियल इंटेंलिजेंस की मदद से पहु्ंच जाएगी। एआइ की मदद से छोटे उद्यमियों को उनके शहर के मूड की भी जानकारी दी जाएगी ताकि वे उनकी जरूरतों के मुताबिक उत्पाद का निर्माण कर सके। हाल ही में एमएसएमइ मंत्रालय की तरफ से पहली बार एआइ सुविधा वाला पोर्टल लांच किया गया है जो एमएसएमइ के लिए कंट्रोल रूम की तरह काम करेगा। 

चैंपियन नामक इस पोर्टल का मकसद कोरोना के संकट काल में छोटे उद्यमियों को वित्तीय मदद से लेकर उन्हें कारोबार की संभावनाओं की जानकारी तक देना है। छोटे उद्यमी मंत्रालय के इस कंट्रोल रूम में अपनी किसी भी प्रकार की समस्या को रख सकते हैं। अपने आइडिया साझा कर सकते हैं और सरकार को सुझाव भी दे सकते हैं। एमएसएमइ सचिव ए.के. शर्मा ने चैंपियन नामक इस कंट्रोल रूम में आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए मंत्रालय के अधिकारियों की टीम नियुक्त की है। वह स्वयं हर 15 दिनों पर इसका पूरा जायजा लेंगे। 

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मंत्रालय के सचिव के निर्देश के मुताबिक इस पोर्टल पर अगर कोई उद्यमी किसी भी प्रकार की कोई पूछताछ करता है या अपनी समस्या रखता है तो तीन दिनों के भीतर समस्या को हर हाल में अटेंड करना होगा। अधिकारियों को सचिव की तरफ से कहा गया कि उद्यमियों को सात दिनों के भीतर उनकी समस्या का हल देना अनिवार्य होगा।पोर्टल का हर राज्य में कंट्रोल रूम होगा। ताकि स्थानीय स्तर पर एमएसएमइ की समस्या की निगरानी हो सके। मंत्रालय के सचिव के मुताबिक किसी जिले में कोई बैंक बार-बार उद्यमी के कर्ज को नामंजूर कर देता है तो उन्हें इसका पता लग जाएगा। फिर उनकी टीम बैंक से यह पूछताछ कर सकती है कि कर्ज किस आधार पर नामंजूर किए गए। 

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शर्मा के मुताबिक चैंपियन पोर्टल छोटे उद्यमियों के लिए वन शॉप सोल्यूशन है। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एमएसएमइ की हिस्सेदारी 29 फीसद है। देश के छह करोड़ एमएसएमइ 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं। चैंपियन पोर्टल का काम उन छोटे उद्यमियों की पहचान करना भी है जिन्हें घरेलू फलक के साथ दुनिया के बाजार में धूम मचाने का जज्बा हो।