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जुगलबंदी जो यादगार रहेगी

तुम बिन जीवन कैसा जीवन भारतीय सिनेमा में मुहम्मद रफी, किशोर कुमार और मुकेश कुमार से ऊपर भी अगर किसी को रखा जा सकता है तो वह हैं मन्ना डे. 1942 से 2013 के बीच मन्ना डे ने 4000 गाने गाए. उनके गानों शास्त्रीय संगीत को समेटे होते थे. किशोर कुमार के आने बाद सिनेमा में गानों का एक नया दौर आया जिसमें मन्ना डे फिट नहीं बैठते थे. इसके बावजूद उन्होंने कई गाने साथ गाए. पड़ोसन का प्रसिद्ध गाना एक ‘चतुर नार...’ किशोर कुमार और मन्न डे की जुगलबंदी का यादगार गाना है. राजेश खन्ना भी किशोर कुमार और मन्ना डे के लिए समान रूप से यादगार रहे. कहते हैं किशोर कुमार की आवाज राजेश खन्ना से इतनी मिलती थी कि राजेश खना खुद उनकी आवाज को अपने गाने गवाने के लिए सिफारिश किया करते थे. मन्ना डे के साथ भी ऐसा ही कुछ था और उन्होंने राजेश खन्ना के लिए कई गाने गाए. आज सुरों का यह सितारा भले ही हमेशा के लिए संगीत और दुनिया को अलविदा कह गया हो लेकिन उनकी आवाज और गाने हमेशा जिंदा रहेंगे और उनके साथ भी मन्ना डे भी हमेशा याद आएंगे. पेश है उनका एक चर्चित गाना ‘जिंदगी कैसी है पहेली..