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बिहार चुनाव : खेल राजनीति का

tsdarbari
ts_darbari
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नमस्कार मित्रों, मैं आपका मित्र टी एस दरबारी अपने इस ब्लॉग के प्रथम लेख को बिहार चुनावों को समर्पित करता हूँ। भारत में यूँ तो अनेको चुनाव हुए हैं और होते रहेंगे; और भारत में होने वाला हर चुनाव स्वयं में अत्यंत मनोरम और मनोरंजक होता है। भारत के नागरिको और मतदाताओं को इस खेल की आदत हो गयी है और वो इस खेल का रस भी भरपूर लेते हैं। लेकिन बिहार चुनाव हमेशा से भारत में खास और लोकप्रिय रहे हैं और इसकी वजह अनेक हैं।

बिहार के चुनावों का और भी ज्यादा लोकप्रिय बनाने का श्रेय जाता है माननीय लालू जी को। कोई विरला ही होगा जो भारतीय राजनीति से पूर्ण रूप से अनभिज्ञ होगा। यदि किसी को भारतीय राजनीति की एक प्रतिशत भी जानकारी है तो उसे माननीय लालू जी का नाम अवश्य ही पता होगा। फिलहाल अति लोकप्रिय लालू जी के सिवाय एक और भी राजनेता बिहार में बहु-चर्चित रहे। फिलहाल न केवल राजनीति की वजह से बल्कि अपनी बेहतरीन छवि और राजनीति के ज्ञान की वजह से। हम सभी जानते हैं कि स्वर्गीय श्री रामविलास पासवान जी की लोकप्रियता गगनचुम्बी थी एवं स्वयं लालू जी उन्हें राजनीति का मौसम वैज्ञानिक कहते थे। किन्तु इस बार चुनावों में दोनों ही अनुपस्थित हैं। स्वर्गीय पासवान जी अब हमारे बीच नहीं रहे और साथ ही कानूनी कारणों की वजह से माननीय लालू जी भी इन चुनावों में सक्रिय नहीं हैं। ऐसे में दोनों ही महारथी नेताओं के उत्तराधिकारी इन चुनावों में अपना परचम लहराने को रणभूमि में उतरे हैं। अब देखना ये है कि कौन किस पर भरी पड़ता है।
इन दोनों ही नेताओं के उत्तराधिकारियों से लोहा लेने के लिए अनेक महारथी भी युद्ध मैदान में दुदुंभी का उद्घोष करते नज़र आ रहे हैं। हालांकि इस युद्ध में यदि नितीश कुमार जी को हम भीष्मपितामह मान लें (क्यूंकि वो सभी राजनेताओं से वयोवृद्ध हैं तथा इन दोनों उत्तराधिकारियों के पिता के समकालीन हैं) तो उनके साथ युद्ध में राजनीति का चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह जी भी बिहार चुनावों की रणभूमि में हैं जिनकी बिछाई बिसात को समझ पाने बेहद मुश्किल है।
फिलहाल चुनावों में रंगत तब आयी जब चिराग पासवान जी ने अकेले ही युद्धभूमि में अपना पराक्रम दिखाने का निर्णय ले लिया तथा साथ ही यह भी उद्घोष कर दिया कि वे माननीय प्रधानमंत्री जी के हनुमान हैं। ये एक अद्भुत रणभूमि है जहां महाभारत और रामायण के किरदार एक साथ ही मौजूद हैं। किन्तु कौन किसके पक्ष में है इसका अनुमान लगाना असंभव सा प्रतीत होता है। इसकी ख़ास वजह सभी नेताओं के एक- दुसरे के प्रति नर्म प्रतिक्रिया भी है। जहां तेजश्वी यादव खुल के लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान का विरोध नहीं करते तो भाजपा के बड़े नेता भी उनके प्रति उदार है। साथ ही चिराग पासवान जी खुल कर चुनाव पश्चात भाजपा समर्थ की बात भी कर रहे हैं।
अगले अंश में इस विषय पर और चर्चा करेंगे। कृपया अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें।

धन्यवाद,
आपका टी एस दरबारी

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं, जागरण डॉटकॉम किसी भी दावे, आंकड़े या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है।