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रूस - यूक्रेन विवाद को समझिए आसान भाषा में। 

Suresh Kumar Choudhary
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यूक्रेन का उदय :

यूक्रेन पूर्व में सोवियत संघ का ही एक भाग था। वर्ष 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया तथा इस विघटन के परिणाम स्वरूप सोवियत संघ की जगह रूस अस्तित्व में आया।  सोवियत संघ के विघटन के दौरान 15 देश भी स्वतंत्र हो गये थे । जिसमें से एक देश का नाम था यूक्रेन। वर्ष 1996 में यूक्रेन ने डेमोक्रेसी (लोकतंत्र) को अपना लिया तथा स्वंय का सविंधान भी बनाया और करेंसी के रूप में यूक्रेनियाई रिविन्या नामक मुद्रा जारी की।  यूक्रेन भौगोलिक दृष्टि से यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा देश है। इसकी सीमा एक ओर रूस से लगती है तो दूसरी ओर पोलेंड, हंगरी, रोमानिया और स्लोवाक जैसे देशों से लगती है। यूक्रेन की आबादी लगभग सवा 4 करोड़ है। यूक्रेन की राजधानी कीव है। वर्तमान में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडाइमिर जेलेंस्की है।

रूस : 

रूस दुनिया का सबसे बड़ा देश है। रूस की जनसंख्या 146.7 मिलियन है। रूस की राजधानी मॉस्को है। रूस के वर्तमान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन है। रूस वर्तमान में एक शक्तिशाली देश है, जो विश्व के किसी भी बड़े देश से मुकाबला कर सकता है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की स्थिति : 

वर्ष  1945 में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद पूरी दुनिया मुख्यतः दो खेमो में बंट गयी।  इनमें एक खेमा पूंजीवादी विचारों वाले राष्ट्रों का बन गया तो दूसरा खेमा साम्यवादी व्यवस्था को अपनाने वाले राष्ट्रों का बन गया।  पूंजीवादी खेमे में अमेरिका , ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और जर्मनी जैसे देश शामिल थे। वर्ष 1980 से इन दोनों खेमो में शीत युद्ध की स्थिति बनी हुयी है। 4 अप्रैल 1949 को पूंजीवादी देशों ने मिलकर अपनी सामूहिक सुरक्षा हेतु एक सैन्य संगठन बनाया, जिसे नाटो के नाम से जाना जाता है।

विवाद की जड़ " नाटो " :

हाल ही में यूक्रेन ने यह घोषणा कर दी कि वह वर्ष 2024 तक नाटो संगठन का सदस्य बन जाएगा।  इस घोषणा के साथ ही रूस - यूक्रेन विवाद तेजी से पनपा।  रूस किसी भी हालत में यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनने देना नहीं चाहता। क्योंकि यदि यूक्रेन नाटो का सदस्य देश बन जाता है तो यूक्रेन पर अमेरिका व पश्चिमी यूरोप के देशों का दबदबा हो जाएगा। जिसके परिणाम स्वरूप इन देशों के कहने पर यूक्रेन भविष्य में रूस की सीमा से लगते अपने इलाको में नाटो की सेना की तैनात कर देगा। जिससे नाटो की सेना रूस के बिल्कुल नाक के नीचे पहुंच जाएगी तथा भविष्य में नाटो द्वारा रूस की राजधानी मॉस्को में मात्र 5 मिनिट के अल्प समय में मिसाइल दागी जा सकती है। रूस इस खतरे से निपटने के लिए यूकेन को नाटो से दूर रहने की नसीयत देता रहा है। परन्तु यूक्रेन लगातार नाटो के पक्ष में अपने बयान दे रहा था। अतः रूस ने 24 फ़रवरी 2022 को यूक्रेन पर हमला कर दिया। 

रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने से तीसरे विश्व युद्ध के हालात उत्पन्न हो सकते है। क्योंकि यूक्रेन अमेरिका व पश्चिमी देशों के सपोर्ट के बिना रूस से युद्ध में मुकाबला नहीं कर सकता है। यूकेन रूस और अमेरिका के लिए उसी तरह एक अखाड़ा बन गया है, जिस तरह का अखाड़ा पूर्व में अफगानिस्तान और सीरिया बन गए थे। अतः बेहतर होगा की इस विवाद को जल्द समाप्त किया जाए।  ताकि कम से काम जनहानि हो और मानवता बनी रहे।