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प्याज की खेती का सही तरीका

Sohel Ahmed Khan
Sohel Ahmed Khan
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प्‍याज की खेती का तरीका-

खेत की जुताई व मिट्टी की तैयारी:-
प्याज को लगभग सभी तरह की मिट्टी में पैदा किया जा सकता है लेकिन बलुई दोमट मिट्टी में यह अच्छी तरह से पैदा की जा सकती है। दोमट मिट्टी प्याज के लिए अच्छी मानी जाती है। प्याज की खेती के लिए ज़ियादा गहरी जुताई की आवश्यकता नहीं होती। मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए तीन-चार बार गहराई से जुताई करें। मिट्टी में जैविक खाद की मात्रा बढ़ाने के लिए 4 से 5 टन गोबर की गली खाद भी पर्याप्त मात्रा में खेत की तैयारी करते समय ही खेत में मिला देते हैं।

प्याज की पौध तैयार करना:- पौधा लगाने के लिए चुनी हुई जगह की पहले अच्छे से जुताई करें उसके बाद उसमें पर्याप्त मात्रा में गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट डाले पौधे का आकार 3 mit × 0.80 mit रखा जाता है और दोनों के बीच 60 से 70 cm. की दूरी रखी जाती है। पौधशाला के लिए रेतीली मिट्टी अच्छी रहती है पौधशाला जमीन से लगभग 15 cm. ऊँचाई पर ही बनाना चाहिए । बुवाई के बाद नर्सरी में बीजो को 2 से 3 cm मोटी सतह जिसमें छनी हुई मृदा+सड़ी गोबर की खाद या कोई और खाद से ढंक देना चाहिए। बुवाई से पहले 250 से 260 gej पालीथीन उपचारित कर ले। बीजों को हमेशा पंक्तियों में ही बोना चाहिए।

खरीफ मौसम की फसल के लिए हर लाईन में 5-7 cm की दूरी रखते हैं। इसके बाद क्यारियों पर कम्पोस्ट-सूखी घास बिछा देते है जिससे मिट्टी में नमी पैदा हो सके। पौधो में अंकुरण हो जाने के बाद घास को हटा देना चाहिए। इस बात का ध्यान रखा जाये कि पौधशाला की सिंचाई पहले फव्वारे से ही करना चाहिए। पौधों को ज़ियादा पानी से बचाने के लिए पौधशाला या रोपणी को पौनिटेनल में उगाना ही सब से अच्छा होगा।

बीज को मिट्टी में डालने का समय :- खेत तैयार करने का सब से अच्छा समय अक्तूबर से नवबंर के बीच होता है। नए पौधे दिसंबर से जनवरी तक तक तैयार हो जाते है।रोपाई के लिए 15 से 20 cm के पौधे चुनें। नर्सरी में पौधों को सड़न से बचाने के लिए अंकुरण के 3 दिनों बाद रिडोमिल गोल्ड 15 से 20 gm प्रति 10 लीटर पानी में भिगोए। बुवाई के बाद 25 से 30 दिनों पर प्रति लीटर पानी में 19'19'19- 5gm और उसके साथ थायमेथोक्साम 0.25 gm मिलाकर पौधों पर छिड़काव करे।

 

खेत में पौध रोपण से उपचार :- फ्लैट कंटेनर या ड्रम में 20 लीटर पानी लें 40 ग्राम कार्बेन्डाजिम + 40 मिली इमिडाक्लोप्रिड मिलाएं। रोपाई से पहले 5 मिनट के लिए घोल में जड़ों को डुबोएं।

पौधों की दुरी:- बीजों को 15X10 cm की दुरी से बेड पर रोपाई करें। रोपाई से पहले पौधों के 1/3 ऊपरी भाग को काट लें और प्याज की सीधी बुवाई छिटकवां विधि से करें।

बीज की किस्में:- प्याज की किस्मे वैसे तो कई तरह की होती है जो ज़मीन और मिट्टी को देखते हुए उगाई जाती है लेकिन कुछ खास तरह के बिज भी होते है जो कम से कम समय प्रति एकड़ 160 से 170 क्विंटल प्याज प्रदान करते है। 1-भीमा किरण:- यह रबी के मौसम में उगाने लायक होती है। इसकी प्याज़ हल्के लाल रंग के और गोल से होते है। इस किस्म की प्याज 145 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है। इसके प्याज़ों को ज्यादा समय तक स्टोर करके रखा जा सकता है। इसकी ज़ियादा तर पैदावार प्रति एकड 165 क्विंटल होती है।

2-भीमा शक्ति :- यह खरीफ और रबी दोनों मौसम में उगाने लायक होती है। इस किस्म की प्याज पौधें लगाने से 130 दिनों तक में तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार प्रति एकड़ 170 क्विंटल होती है।

3-भीमा श्वेत :- यह रबी के मौसम में उगाने लायक है। इसकी प्याज़ सफेद और थोड़ी गोल होते है। इस किस्म का बिज लगभक 110 से1120 दिनों में तयार हो जाता है। इसकी औसतन पैदावार प्रति एकड 160 क्विंटल होती है।

प्याज और उसके लिए सहायक मशीनें:- देशी हल या हैरों खुर्पी, कुदाल, फावड़ा

प्याज की खरपतवार और नियंत्रण:- प्याज के खेत में अधिक गुड़ाई की ज़रूरत नहीं होती है। ज़ियादा से ज़ियादा 2 बार निराई-गुड़ाई पर्याप्त होती है।
पहली रोपाई के एक महीने बाद और दूसरी रोपाई के दो महीनें बाद। शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते हैं। इसलिए नुकसान से बचने के लिए निराई गुड़ाई की जगह रासायनिक खरपतवारनाशी का प्रयोग करें।

रसायनिक विधि:- खरपतवारों की रोकथाम के लिए बुवाई से 72 घंटे के बीच 200 लीटर पानी में 1 लीटर डीमिथाइल मिला कर प्रति एकड़ में स्प्रे (spray)करें। खरपतवारों के अंकुरण के उपरांत बुवाई से 7 दिन बाद
200 लीटर पानी में ऑक्सीफ्लोफैन 425 लीटर. प्रति एकड़ पर स्प्रे (spray) करें।

स्वास्थ्य और पौष्टिक गुणवत्ता:- प्याज़ के कई फायदे है प्याज में 89% पानी, 9% कार्बोहायड्रेट और 1% प्रोटीन होता है। प्याज़ जिस्म की सूजन को घटाने में मदत करती है साथ ही ब्लड शुगर को सामन्य करने में मदत करती है दिमाग तेज़ और संक्रमण नियंत्रण करने में भी मदत करती है।