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5 राज्यों में सबसे ज्यादा कोरोना वैक्सीन वेस्‍टेज, तमिलनाडु पहले नंबर पर, जानें क्‍या है वेस्‍टेज का कारण

कोरोना महामारी को खत्‍म करने के लिए देश में 16 जनवरी से टीकाकरण अभियान चल रहा है। अब तक 3.50 करोड़ से ज्‍यादा लोगों को वैक्‍सीन का डोज लगाया जा चुका है। इस बीच वैक्‍सीन वेस्‍टेज की समस्‍या चिंता का कारण बन गई है। प्रधानमंत्री ने मुख्‍यमंत्रियों से बैठक के दौरान वैक्‍सीन वेस्‍टेज रोकने और संक्रमण थामने के प्रयासों पर जोर देने की अपील की।

Rizwan Noor Khan
Rizwan Noor Khan17 Mar, 2021

राज्‍यों को दिए गए 7.54 करोड़ वैक्‍सीन डोज
कोरोना महामारी ने दुनियाभर के लोगों को मुसीबत में डाल रखा है। महामारी को थामने के लिए टीकाकरण अभियान का दूसरा चरण चल रहा है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने विभिन्‍न राज्‍यों को 7 करोड़ 54 लाख वैक्सीन के डोज अब तक उपलब्‍ध कराए हैं। 17 मार्च की सुबह की रिपोर्ट के अनुसार देश के 3,50,64,536 लोगों को कोरोना का डोज लग चुका है। इनमें दूसरा डोज लेने वालों की संख्‍या भी शामिल है।

प्रधानमंत्री बोले- वैक्‍सीन वेस्‍टेज गंभीर विषय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में मुख्‍यमंत्रियों से कोरोना संक्रमण रोकने के प्रयासों और वैक्‍सीन वेस्‍टेज की समस्‍या रोकने पर जोर दिया। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें वैक्सीन डोज व्यर्थ होने की समस्या को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश में वैक्सीन वेस्टेज 10% से ज़्यादा है और उत्तर प्रदेश में भी वैक्सीन वेस्टेज क़रीब इतना ही है। वैक्सीन वेस्टेज की राज्यों में समीक्षा होनी चाहिए।

5 राज्‍यों में सबसे ज्‍यादा वैक्‍सीन की बर्बादी
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने बताया कि देश में वैक्सीन वेस्टेज का औसत 6.5 फीसदी है। 5 राज्‍यों में सर्वाधिक वेस्‍टेज दर्ज किया गया है। इनमें तेलंगाना में सबसे ज्‍यादा 17.6 फीसदी वेस्‍टेज हुआ है। वहीं, आंध्र प्रदेश में 11.6 फीसदी, उत्‍तर प्रदेश में में 9 फीसदी, कर्नाटक में 6 फीसदी से अधिक वेस्‍टेज है। उन्‍होंने बताया कि जम्मू कश्मीर में वैक्‍सीन वेस्‍टेज औसत 6.6 फीसदी है।

क्‍यों हो रहा वैक्‍सीन वेस्‍टेज
वैक्‍सीन वेस्‍टेज का कारण सही मैनेजमेंट न होना माना जा रहा है। वैक्‍सीन के एक वाइल में एक से ज्‍यादा डोज के लिए दवा मौजूद होती है। अनुमान है कि वायल से एक डोज लगने के बाद वायल में बची दवा का इस्‍तेमाल नहीं होता है तो वह कुछ देर में खुद ही खराब हो जाती है। वहीं, कई बार वैक्‍सीन वायल को निश्‍चित टेंपरेचर नहीं मिलने या रखरखाव बेहतर नहीं होने पर भी वैक्‍सीन खराब हो जाती है।

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