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इन बड़े और विवादित मामलों का फैसला करेंगे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा!

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा का कार्यकाल 13 महीने का है। वे 2 अक्टूबर 2018 को इस पद से रिटायर्ड होंगे। इस दौरान उनके सामने कई ऐसे मुकदमे सुनवाई के लिए आएंगे, जो या तो बहुत विवादित रहे हैं या नीतिगत रूप से बहुत अहम हैं। जस्टिस दीपक मिश्रा ने कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसले दिए हैं, जो काफी चर्चित रहे। आइए नजर डालते हैं उन चार महत्वपूर्ण मामलों पर, जो जस्टिस दीपक मिश्रा के कार्यकाल में सुनवाई के लिए आएंगे।

justice deepak mishra

अयोध्‍या विवादित ढांचा मामला

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्वामित्व मामला काफी समय से अदालत में लंबित है। पूर्व चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने इस मामले को कोर्ट से बाहर हल करने और इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पेशकश की थी। विवाद में नए-नए पक्षों के शामिल होने से यह मामला काफी पेचीदा हो गया है। इसमें भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने याचिका दायर कर हर रोज सुनवाई की मांग की थी। इस मामले की सुनवाई 5 दिसंबर से शुरू होने वाली है।

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आधार कार्ड की अनिवार्यता

आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यों वाली संविधान पीठ ने इस मामले से जुड़े एक अन्य मामले में फैसला देते हुए निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया। यह मामला हल होने के बाद अब आगे आधार कार्ड की वैधता पर सुनवाई होनी है। जस्टिस खेहर के सेवानिवृत्‍त होने के बाद देखना होगा कि आधार कार्ड मामले की सुनवाई करने वाली बेंच की अगुवाई खुद जस्टिस मिश्रा करते हैं या किसी और वरिष्ठ जज को कमान सौंपेंगे।

जम्‍मू-कश्‍मीर के विशेष राज्‍य दर्जे का मामला

संविधान के अनुच्छेद 35 (ए) के तहत जम्मू एवं कश्मीर को दिए गए विशेष दर्जे का मामला कोर्ट के सामने है। इस प्रावधान को संविधान संशोधन की बजाय राष्ट्रपति के आदेश के तहत शामिल किया गया था। हो सकता है कि जस्टिस दीपक मिश्रा इस मामले पर जल्द ही एक संविधान पीठ का गठन करें।

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जजों की नियुक्ति का मामला

जस्टिस दीपक मिश्रा से पहले के दो मुख्य न्यायाधीशों जस्टिस टीएस ठाकुर और जेएस खेहर के समय से यह मामला लटका हुआ है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति को लेकर कॉलेजियम व्यवस्था को खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने साल 2014 में संविधान संशोधन कर एनजेएसी एक्ट बनाया था। मगर सुप्रीम कोर्ट ने इसे अगले साल ही खारिज कर दिया। जजों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच एक सहमति बनाने पर बात बनी थी, जो अभी भी अधर में है। इसे लेकर न्यायपालिका और विधायिका के बीच टकराव की नौबत आ गई है। ऐसे में सभी की नजर इस पर होगी कि चीफ जस्टिस इसे लेकर क्या रुख करते हैं।

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