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निसंतान राजा सुकेतुमान के पिता बनने की दिलचस्‍प कहानी, जंगल में मिला संतान पाने का मंत्र

संसार के सबसे बड़े दुखों में से एक है निसंतान होना। दुनियाभर में ऐसे कई दंपति हैं जो तमाम प्रयासों, दवाओं और आधुनिक तकनीक की बदौलत भी पिता बनने का सुख नहीं भोग पा रहे हैं। ऐसे ही प्राचीन काल में सबसे धनवान राजा रहे सुकेतुमान भी संतान सुख से वंचित रहे। निराश होकर वह जंगल पहुंचे तो वहां उन्‍हें पुत्रदा एकादशी के दिन संतानसुख भोगने का मंत्र हासिल हुआ।

Rizwan Noor Khan
Rizwan Noor Khan6 Jan, 2020

 

 

 

 

भ्रदावतीपुरी के राजा को संतान सुख नहीं
प्राचीन काल में भद्रावतीपुरी के शासक सुकेतुमान बेहद शक्तिशाली और धनवान राजाओं में से एक थे। उनकी सुंदर रानी और पूरा परिवार था। लेकिन, उनके खुद की कोई संतान नहीं थी। विवाह के कई साल बीत जाने के बाद भी जब उन्‍हें संतान प्राप्‍त नहीं हुई तो उत्‍तराधिकारी की चिंता मंत्रियों और सलाहकारों को होने लगी।

 

 

 

उत्‍तराधिकार की लड़ाई शुरू
राजा और रानी ने संतान हासिल करने के लिए हर जतन कर लिए, लेकिन वह सफल नहीं हो पा रहे थे। उधर, राज्‍य के उत्‍तराधिकार के लिए भी परिवारीजन अपनी अपनी चाल चलने लगे थे। मुश्किल दौर से गुजर रहे राजा सुकेतुमान बेहद निराश हो गए और मन को शांत करने के लिए शिकार का बहाना कर जंगल की ओर चल दिए।

 

 

 

 

 

घर छोड़ जंगल पहुंचे राजा
अपने घोड़े पर सवार राजा सुकेतुमान कई दिन चलते रहे और फिर चारों ओर घने जंगल के बीच बहती नदी के किनारे जल ग्रहण करने को ठहर गए। अचानक उन्‍हें किसी के आने की आहट सुनाई दी तो वह उस ओर बढ़े। आगे उन्‍हें एक बुढि़या की कुटिया दिखाई दी। कुटिया में मौजूद बुढि़या की राजा ने कई दिन तक सेवा की।

 

 

 

 

राजा की सेवा से खुश बुढि़या ने बताया राज
राजा ने पहचान और समस्‍या बताई तो बुढि़या ने कुछ मील दूर तपस्‍वी मुनियों के आश्रम में जाने की सलाह दी। राजा आगे बढ़ा और कुछ दिन चलने के बाद वह मुनियों के आश्रम पहुंच गया। वहां राजा के आने का प्रयोजन जान मुनियों ने बताया कि वह पौष मास के शुक्‍ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी को व्रत पालन करेगा तो उसकी समस्‍या हल हो जाएगी।

 

 

 

 

 

 

मुनियों ने दिया संतान पाने का मंत्र
राजा ने तपस्‍वी मुनियों के बताए अनुसार अपनी रानी के साथ भगवान विष्‍णु की प्रतिमा स्‍थापित कर व्रत और पूजा विधि का पालन किया। कुछ ही दिन बाद रानी के गर्भधारण की सूचना आई और निश्चित समय बाद राजा को संतान प्राप्ति हुई। तभी से मान्‍यता है कि पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत पालन से निसंतान दंपतियों को संतान हासिल हो जाती है।

 

 

 

पुत्रदा एकादशी मुहूर्त और पूजा विधि
एकादशी तिथि का मुहूर्त 6 जनवरी दिन सोमवार को सुबह 03:06 बजे से शुरू होकर 7 जनवरी दिन मंगलवार को सुबह 04:02 बजे खत्‍म होगा। पारण का समय 7 जनवरी दिन मंगलवार को दोपहर 01:30 बजे से 03:35 बजे तक रहेगा। इस दौरान स्नान के बाद पति और पत्नी भगवान विष्णु या बाल गोपाल की प्रतिमा स्थापित कर पंचामृत से स्नान कराएं। फिर चंदन तिलक और वस्त्र पहनाएं। पीले पुष्प, पीले फल, तुलसी दल अर्पित करें और धूप-दीप आदि से आरती करें। पूजा के समय संतान गोपाल मन्त्र का जाप करें।...Next

 

 

 

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