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आज से शुरू हो रही हैं शुभ तिथियां और लगन, विवाह के लिए ये सही समय

विवाह और शुभ कार्यों के लिए आज से शुभ तिथियों की शुरुआत हो रही है। दरअसल, हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार भगवान सूर्य देव 6 महीने का दिन पूरा कर दक्षिणायन से उत्‍तरायण में प्रवेश कर रहे हैं। इसका मतलब है कि स्‍वर्ग में सभी देवताओं की रात खत्‍म होने के बाद दिन शुरू हो गया है। ऐसा होते ही शुभकार्यों को उचित माना गया है। इसलिए अगर आप विवाह करने की तैयारी में हैं तो यह सही समय है।

Rizwan Noor Khan
Rizwan Noor Khan14 Jan, 2020

 

 

 

 

खरमास का समापन और शुभतिथियों का आगमन
सनातन धर्म के अनुसार सूर्य देव के छह महीने बाद जागने को खरमास खत्‍म होना माना गया है। हिंदू धर्म के विद्वानों के अनुसार 14 जनवरी की रात 02:08 बजे सूर्य देव दक्षिणायन से उत्‍तरायण में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही स्‍वर्ग के सभी देवताओं समेत बैकुंठ में विराजमान भगवान विष्‍णु भी निद्रा से जाग जाएंगे। इस अवस्‍था को पुराणों में खरमास का खत्‍म होना बताया गया है। देवताओं के निद्रा से उठने के बाद आने वाली तिथियों को शुभ माना गया है।

 

 

 

दक्षिणायन और उत्‍तरायण
हिंदू शास्‍त्रों के अनुसार देवताओं के लिए एक दिन 6 माह का और एक रात भी 6 माह की अवधि की होती है। शास्‍त्रों में उत्‍तरायण के 6 माह देवताओं के लिए दिन बताया गया है जबकि दक्षिणायन के 6 माह रात बताई गई है। सूर्यदेव का दक्षिणायन से उत्‍तरायण में प्रवेश इस बात को दर्शाता है कि सभी देवता अपनी निद्रा से जाग चुके हैं। उत्‍तरायण में दिन लंबे और रातें छोटी हो जाती हैं। साल में दो संक्रांति तिथियां होती हैं, जिनमें उत्‍तरायण की पहली तिथि की संक्रांति को मकर संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। यह सकारात्‍मकता का प्रतीका माना गया है।

 

 

 

 

सूर्यदेव का राशि परिवर्तन और भ्रमण
उत्‍तरायण की पहली संक्रांति यानी मकर संक्रांति को अक्षय पुण्‍य हासिल करने के लिए सूर्य देव की उपासना की परंपरा है। इस दिन से शुभ कार्यों का आरंभ माना गया है। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव को जल अर्पित करने के पश्‍चात लाल कपड़े पर चंदन, अक्षत का अष्‍ट दल कमल बनाकर मूर्ति स्‍थापित की जाती है। इस दिन घृत और कंबल के दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन किया गया दान, जप, तप, श्राद्ध तथा अनुष्ठान आदि का दो-गुना अधिक महत्व है। मकर संक्रांति व्रत को खिचड़ी भी कहते हैं, इसलिए इस दिन खिचड़ी खाने तथा खीचड़ा तिल दान देने का विशेष महत्व माना जाता है।

 

 

 

 

शुभ तिथियां और विवाह मुहूर्त
जनवरी में 19 और 21 तारीख को छोड़कर 16 से 25 तक सभी शुभ तिथियां हैं। इन दिनों में कोई भी कार्य किया जा सकता है। खासकर नया व्‍यापार, नई नौकरी, यात्रा या फिर कोई अन्‍य अहम कार्य। ज्‍योतिषियों के अनुसार जनवरी की इन तिथियों में विवाह के शुभ योग हैं। इन तारीखों में विवाह बंधन में बंधने वाले युगलों पर स्‍वयं भगवान विष्‍णु और देवी लक्ष्‍मी की कृपा के योग हैं। जनवरी के अलावा फरवरी से लेकर जुलाई तक कई ऐसी शुभ तिथियां हैं जिनमें अतिमहत्‍वपूर्ण कार्यों की शुरुआत की जा सकती है या उनको पूरा किया जा सकता है।...Next

 

 

 

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