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एक मंदिर जहाँ बहती है घी की नदी

मंदिरों में देवताओं को फूल सब चढ़ाते हैं. भक्त अपने सामर्थ्य के अनुसार फलों से लेकर दूध और स्वर्ण मुद्राएँ तक चढ़ाते हैं. परंतु गुजरात के गाँधीनगर के इस मंदिर में एक ऐसी महँगी तरल पदार्थ चढ़ाई जाती है जिसे खरीदने के लिए जेबें करनी पड़ती है ज्यादा ढ़ीली.

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गुजरात के गाँधीनगर में रूपल नाम का एक गाँव हैं. नवरात्रि की नवमी को यहाँ लकड़ी से बनी एक रथ को पूरे गाँव में घुमाया जाता है. वहाँ ऐसी मान्यता है कि यह रथ वरदायिनी होती है. इस रथ पर बने साँचे में पाँच स्थानों पर अखंड ज्योति जलाई जाती है. इस रथ को देखने के लिए इतनी भीड़ होती है कि गाँव से मुख्य मंदिर तक पहुँचने में रथ को करीब 10 घंटे लग जाते हैं.

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इस रथ पर माता के दर्शन करने वाले ग्रामीण अपने सामर्थ्य के अनुसार शुद्ध घी चढ़ाते हैं. रथ पर घी चढ़ाने का एक और कारण यह है कि इस रथ को जमीन से छूने ना दिया जाए जिसे अशुद्ध माना जाता है.

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इस वर्ष नवमी के दिन करीब 11 लाख लोगों ने इस रथ पर माता के दर्शन किए. घी की नदी बहाने में इस बार भी यहाँ के लोग पीछे नहीं रहे. भक्तों ने करीब 5.5 लाख किलो घी चढ़ावे के रूप में चढ़ाया. चढ़ाए गए घी की कीमत करीब 16 करोड़ रूपए आँकी गई.

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