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Prakash Karat - वाम विचार से ओत-प्रोत प्रकाश करात

prakash karatप्रकाश करात का जीवन परिचय

भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वर्तमान महासचिव प्रकाश करात का जन्म 7 फरवरी, 1948 को रंगून, बर्मा के एक मलयाली परिवार में हुआ था. इनके पिता ब्रिटिश काल के अंतर्गत भारतीय रेलवे में कार्यरत थे. पिता की मृत्यु के पश्चात, नौ वर्ष की आयु में प्रकाश करात अपने परिवार के साथ केरल आ गए. आर्थिक हालात खराब होने के कारण प्रकाश करात की मां ने भारतीय जीवन बीमा निगम में एजेंट के रूप में कार्य करना शुरू कर दिया. प्रकाश करात ने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से अर्थशास्त्र विषय के साथ स्नातक की पढ़ाई संपन्न की. अकादमिक स्तर के साथ अन्य गतिविधियों में भी अच्छे प्रदर्शन के लिए उन्हें विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया. गोल्ड मेडल के साथ प्रकाश करात ने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी, ब्रिटेन में स्नातकोत्तर की परीक्षा देने के लिए छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई जहां उनकी मुलाकात विख्यात मार्क्सवादी, प्रोफेसर विक्टर किरनन से हुई. किरनन से प्रभावित हो वह भी मार्क्स के सिद्धांतों के अनुयायी बन गए. कॉलेज में व्याप्त रंगभेद की नीति का विरोध करने पर उन्हें यूनिवर्सिटी से निकाल भी दिया गया. यद्यपि प्रकाश करात के अच्छे और सभ्य व्यवहार को देखते हुए उनका निष्कासन वापस ले लिया गया. वर्ष 1970 में भारत वापस आकर प्रकाश करात ने जवाहर लाल नेहरू जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में पीएचडी करने के लिए दाखिला लिया. इसी दौरान वर्ष 1971 से 1973 तक मार्क्सवादी, ए. गोपालन के सहयोगी बनकर भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के लिए कार्य करते रहे. प्रकाश करात ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कम्यूनिस्ट पार्टी से संबंधित छात्र दल, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की नींव रखी. वर्ष 1975 में प्रकाश करात का विवाह कम्यूनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो की पहली महिला सदस्य और प्रतिष्ठित मार्क्सवादी समर्थक ब्रिंदा करात से संपन्न हुआ.

प्रकाश करात का व्यक्तित्व

प्रकाश करात मार्क्स के सिद्धांतों के एक समर्पित समर्थक हैं. वह एक प्रतिक्रियावादी और तेज-तर्रार नेता हैं.

प्रकाश करात का राजनैतिक सफर

प्रकाश करात का राजनैतिक सफर पढाई के दिनों से ही शुरू हो गया था. एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, ब्रिटेन में रंग-भेद का विरोध करते हुए उनका राजनीति में प्रदार्पण हुआ. भारत आने पर उन्होंने कम्यूनिस्ट पार्टी की छात्र शाखा, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की नींव रखी. प्रकाश करात ने छात्र राजनीति में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वह यूनिवर्सिटी के तीसरे अध्यक्ष भी रहे. इसके अलावा वर्ष 1974 से 1979 तक वह स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के दूसरे अध्यक्ष भी रह चुके हैं. वे वर्ष 1975 में लगे आपातकाल के दौरान डेढ़ वर्ष तक भूमिगत रह कर पार्टी के लिए कार्य करते रहे. जिसके लिए प्रकाश करात को दो बार जेलयात्रा भी करनी पड़ी. वह लगभग 8 दिनों तक जेल में रहे. केरल के वरिष्ठ और प्रख्यात मार्क्सवादी नेता ए. गोपालन के सहयोगी के रूप में कार्य करते हुए प्रकाश करात को कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की दिल्ली समिति का सचिव निर्वाचित किया गया. इस पद पर वह वर्ष 1982 से 1985 तक रहे. वर्ष 1985 में सीपीआई(एम) की केंद्रीय समिति में चुने जाने के बाद 1992 में प्रकाश करात, पोलित ब्यूरो के सदस्य बनाए गए. आगे चलकर वर्ष 2005 में वह पार्टी के महासचिव नियुक्त हुए.

प्रकाश करात की अन्य उपलब्धियां

प्रकाश करात वर्ष 1992 से ही पार्टी के अकादमिक जर्नल, द मार्क्ससिस्ट के संपादकीय विभाग से जुड़े हुए हैं. इसके अलावा वह लेफ्टवर्ड के प्रबंध निदेशक भी हैं. प्रकाश करात ने निम्नलिखित किताबें भी लिखी हैं.


  • लैंग्वेज, नेशनलिटी एंड पॉलिटिक्स इन इंडिया (1972)

  • ए वर्ल्ड टू विन - एस्सेस ऑन कम्यूनिस्ट मेनिफेस्टो (1999)

  • अक्रोस टाइम एंड कॉंटिनेंट्स – अ ट्रिब्यूट टू विक्टर कीरनन (2003)

  • सबॉर्डिनेट ऐली – द न्यूक्लियर डील एंड इंडिया-यूएस स्ट्रेटजिक रिलेशंस (2008)

विद्यार्थी जीवन से ही क्रांतिकारी विचारों के समर्थक प्रकाश करात एक समर्पित कार्यकर्ता होने के साथ-साथ विपक्ष के मजबूत नेता भी हैं. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र संगठन के अध्यक्ष रहते हुए, सहयोगियों के साथ मिलकर प्रकाश करात ने एक ऐसे क्रांतिकारी घोषणापत्र को जारी किया था, जो अपने समय में मिसाल के रूप में जाना जाता था.