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Digvijay Singh - विवादित बयानों के लिए मशहूर दिग्विजय सिंह

digvijay singhदिग्विजय सिंह का जीवन-परिचय

मध्य-प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी के वर्तमान महासचिव दिग्विजय सिंह का जन्म 28 फरवरी, 1947 को गुणा जिले, मध्य प्रदेश के एक शाही परिवार में हुआ था. दिग्विजय सिंह की प्रारंभिक शिक्षा इंदौर के एक प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूल में हुई थी. आगे की पढ़ाई उन्होंने डैली कॉलेज, इन्दौर से पूरी की.

दिग्विजय सिंह का व्यक्तित्व

राजनीति के क्षेत्र में दिग्गी राजा के नाम से विख्यात दिग्विजय सिंह एक तेज-तर्रार नेता हैं. उन्हें रुक्ष स्वभाव की वजह से भी अधिक जाना जाता है. दिग्विजय सिंह के विरोधी उन्हें एक लापरवाह और मुंहफट नेता मानते हैं. दिग्विजय सिंह के विषय में यह मशहूर है कि वह बिना सोचे समझे किसी पर भी कोई भी आरोप मढ़ देते हैं.

दिग्विजय सिंह का राजनीतिक सफर

22 वर्ष की आयु में दिग्विजय सिंह राजोगढ़ नगरपालिका के अध्यक्ष बने. उसके बाद वर्ष 1971 में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली. 1977 में दिग्विजय सिंह कांग्रेस की ओर से पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े और जीते भी. अर्जुन सिंह के कार्यकाल के दौरान, वर्ष 1980-1984 के बीच दिग्विजय सिंह पहले केन्द्रीय राज्य मंत्री और बाद में कैबिनेट मंत्री बनाए गए. 1985 में वह मध्य-प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भी बने. 1984 से 1991 तक दिग्विजय सिंह राजोगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से जीतकर सांसद भी बने. वह लगातार दो बार मध्य-प्रदेश के मुख्यमंत्री बने सबसे पहले 1993 में और फिर वर्ष 1998 में. वह लगातार कई वर्षों तक अपने गृहनगर और निर्वाचन क्षेत्र राजोगढ़ का प्रतिनिधित्व करते रहे.

दिग्विजय सिंह से जुड़े विवाद


  • वर्ष 2001 में दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए उन पर पैसों के गैरकानूनी लेन-देन को लेकर कई आरोप लगे. भोपाल में शराब उत्पादन की फैक्ट्रियों पर जब आयकर विभाग का छापा पड़ा, तो उनके खातों में कई बड़े सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की बात सामने आई. उन्हीं बड़े नामों में एक नाम दिग्विजय सिंह का भी था. उन पर 100 मिलियन रूपयों की रिश्वत लेने का आरोप लगा जिसे दिग्विजय सिंह ने विपक्षी दलों द्वारा लगाया गया बेबुनियाद आरोप बताया.

  • ईसाई मठों में रह रही ननों के साथ बलात्कार जैसी घटनाओं के पीछे बिना किसी ठोस सबूतों के होने हुए, हिंदूवादी संगठनों को दोषी ठहराए जाने के खिलाफ एक स्थानीय वकील ने जन अवमानना का दावा करते हुए दिग्विजय सिंह के खिलाफ झाबुआ अदालत में केस दायर कर दिया. जिसके लिए दिग्विजय के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी निकाला गया. लेकिन भोपाल न्यायालय ने इस वारंट को खारिज कर दिग्विजय सिंह को 5,000 रूपए के श्योरिटी बॉन्ड के एवज में बरी कर दिया

  • वर्ष 2004 में मध्य-प्रदेश लोकायुक्त द्वारा इंदौर भूमि घोटाले में दिग्विजय के संलिप्त होने के सबूत मिलने के बाद चार साथियों समेत दिग्विजय के खिलाफ केस दायर किया गया.

  • वर्ष 2009 में उत्तर प्रदेश में एक चुनावी रैली के दौरान मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ अपमानजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग करने पर भी दिग्विजय सिंह के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया.

  • फरवरी 2009 में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्विजय सिंह समेत 10 अन्य लोगों पर इन्दौर आइलैंड मॉल के निर्माण में पैसों की लेन-देन और धोखाधड़ी जैसे आरोपों से भी दिग्विजय सिंह को दो-चार होना पड़ा.

  • वर्ष 2011 में मध्य प्रदेश अदालत की इन्दौर बेंच ने दिग्विजय सिंह पर पैसों की अनियमितता को लेकर भी आरोप लगाए.

  • दिग्विजय सिंह द्वारा हिंदूवादी संगठनों जैसे आरएसएस, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद को आतंकवादी गुट कहे जाने पर भी उन्हें कानूनी पचड़ों में फंसना पड़ा. 2009 में हुए मुंबई आतंकवादी हमलों में शहीद हुए पुलिस अफसर हेमंत करकरे की हत्या के पीछे इन्हीं हिंदू संगठनों का हाथ होने की बात कहने पर इन्हें लोगों की कड़वी बातें सुननी पड़ीं.

  • ओसामा-बिन-लादेन की हत्या के बाद अमेरीकी सेना द्वारा उसे जल-समाधि दे दी गई थी, तो ऐसे में अमेरिका के इस कदम को गलत ठहराते हुए दिग्विजय सिंह द्वारा अपने बयान में ओसामा बिन लादेन को ओसामा जी कहना भी आतंकवाद पीडितों और आम जनता को बहुत खटका.

  • दिग्विजय सिंह ने बाटला हाउस मुठभेड़, जिसमें दो पुलिसवाले शहीद हो गए थे, को भी फर्जी ठहराया.

दिग्विजय सिंह की वार्ता और बयान शैली को लेकर आए दिन कोई ना कोई विवाद खड़ा होता ही रहता है. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि वह बिना सोचे-समझे कुछ भी कह देते हैं. वह एक अनुभवी और काबिल नेता हैं. समय-समय पर राहुल गांधी के लापरवाह बयानबाजी को संरक्षण देने जैसे आरोप भी दिग्विजय सिंह पर लगते रहे हैं.