Menu
blogid : 314 postid : 1151

एक अल्हड़ कवि कुमार विश्वास

कहते हैं कि एक कवि अपनी छोटी सी कविता में हजारों बातों को कह देता है. कविता ना सिर्फ आपके दिमाग को सुकून देती है बल्कि यह आपके दिल को भी एक अलग मजा देती है. और जब बात हास्य कवि की हो तो क्या कहने. एक हास्य कवि के कविता पढ़ने का ढंग ही आपको पेट पकड़ कर हंसने को मजबूर कर देता है. हास्य कविता की नई पीढ़ी के एक कवि कुमार विश्वास भी हैं जिन्होंने अपनी कविताओं से ना सिर्फ लोगों का मनोरंजन किया है बल्कि रामलीला मैदान में अन्ना हजारे को भी समर्थन दिया. एक आम छवि वाले कुमार विश्वास आज देश के सबसे चहेते कवि बन चुके हैं.

Kumar Vishwasकुमार विश्वास का जीवन परिचय

कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी, 1970 को पिलखुआ, गाज़ियाबाद (Pilkhuwa, Ghaziabad) में हुआ था. कुमार विश्वास की प्रारंभिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ (Lala Ganga Sahay School, Pilkhuwa) में हुई थी. उनके पिता डॉ. चन्द्रपाल शर्मा आर. एस. एस. डिग्री कालेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से संबद्ध) पिलखुआ में प्रवक्ता रहे चुके हैं. उनके पिता विश्वास को एक इंजीनियर बनाना चाहते थे लेकिन बचपन से ही कविताओं के शौक ने कुमार विश्वास को कवि बनने पर विवश कर दिया. साहित्य के क्षेत्र में आगे बढने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया. तत्पश्चात उन्होंने "कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना" विषय पर पीएचडी प्राप्त किया. उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया.

dr.kumar-vishwas_16कुमार विश्वास का जीवन परिचय

डॉ. कुमार विश्वास ने अपना कॅरियर राजस्थान में प्रवक्ता के रूप में 1994 में शुरू किया. तत्पश्वात वो अब तक महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं. इसके साथ ही डॉ. विश्वास हिन्दी कविता मंच के सबसे व्यस्ततम कवियों में से हैं. उन्होंने अब तक हज़ारों कवि-सम्मेलनों में कविता पाठ किया है. उनकी एक मशहूर कविता है कोई दीवाना कहता है जिसे वह प्राय: हर सम्मेलन में सुनाते हैं. इस कविता को इंटरनेट की वीडियो वेबसाइट यू-ट्यूब पर पांच लाख से भी ज्यादा बार देखा गया है जो अपने आप में एक बड़ी बात है. कुमार विश्वास ना सिर्फ बेहतरीन हास्य कविताएं लिखते हैं बल्कि उन कविताओं को प्रस्तुत करने का तरीका भी उन्हें सबसे अलग बनाता है.

कुमार विश्वास की एक और खासियत उनकी सोशल नेटवर्किंग है जो उन्हें प्रसिद्ध बनाती है. ऑरकुट हो या फेसबुक कुमार विश्वास की प्रोफाइल में हजारों-लाखों लोग जुड़े हुए हैं.

कुमार विश्वास को दिए गए पुरस्कार

डा कुंवर बेचैन काव्य-सम्मान एवम पुरस्कार समिति द्वारा 1994 में 'काव्य-कुमार पुरस्कार', साहित्य भारती, उन्नाव द्वारा 2004 में 'डॉ. सुमन अलंकरण' और साल 2006 में हिन्दी-उर्दू अवार्ड अकादमी द्वारा 'साहित्य-श्री प्रदान किया गया था.

यूं तो हास्य कवि कुमार विश्वास की कई और भी कविताएं हैं जो लोगों को बहुत पसंद हैं पर उनकी एक खास कविता “कोई दीवाना कहता है” बहुत ही लोकप्रिय है. तो चलिए वीडियो में देखते हैं कुमार विश्वास की जादूगरी को.