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पूरी दुनिया को अहिंसा का संदेश देने वाले गांधी को नामांकन के बाद क्यों नहीं मिला नोबेल

बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की सामाजिक कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई ने शुक्रवार को 2014 के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से जीता. सत्यार्थी मदर टेरेसा के बाद शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं वहीं पाकिस्तान की मलाला सबसे कम आयु की नोबेल पुरस्कार विजेता बन गई हैं.

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आइए कुछ ऐसे ही शांति का नोबोल पुरस्कार से संबंधित आंकडों पर नजर डालाते हैं.


  1. 1901 से 2014 तक कुल 95 शांति के नोबेल पुरस्कार दिए गए.

  2. मलाला सहित इस पुरस्कार को पाने वाली कुल महिलाओं की संख्या 16 है

  3. शांति का नोबल पुरस्कार जितने वालों की औसत उम्र 62 है

  4. पुरस्कार मिलने के दौरान कैद में रहे लोगों की संख्या 3 है

  5. अब तक दो बार तीन व्यक्तियों को एक साथ यह पुरस्कार दिया गया.

कितनी बार

लगभग 19 बार इस पुरस्कार को नहीं दिया गया, प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस पुरस्कार को नहीं दिया गया.

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युवा विजेता

1976 में मैरीड कोरीगन को 32 साल की उम्र में यह पुरस्कार दिया गया. इन्ही के साथ ही संयुक्त रुप से 33 वर्षीय ब्रेटी विलियम्स को यह पुरस्कार दिया गया.

1992 में रिगोबर्टा मेंचु को 33 साल की उम्र में यह पुरस्कार दिया गया

सबसे उम्रदराज विजेता

जोसेफ रोबाल्ट को 1995 में 87 साल की उम्र में यह पुरस्कार दिया गया

महिला विजेता:

1905 बर्शा वोन सटनर

1931 जेन एडम्स

1946 इमिली ग्रीन वाल्च

1976 ब्रेटी विलियम्स

1976 मेरी कोरीगन

1979 मदर टेरेसा

1982 अल्वा मइरदई

1991 आंग सान यू की

1992 रिगोबर्टा मेंचू तुम

1997 जोडी विलियम्स

2003 शिरीन इबादी

2004 वांगरी मधाई

2011 एलिन जॉनसन सरलीफ, लेमाह गोवी, तवाकुल करमान

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नहीं चाहिए पुरस्कार

1973 में वितनाम के राजनेता ली डक थो अमेरिकी सक्रेटरी ऑफ स्टेट हेनरी किसिंगर के साथ संयुक्त रूप से शांति का नोबेल पुरस्कर दिया गया. नोबेल के इतिहास में यही एकमात्र हस्ती हैं जिन्होंने पुरस्कार लेने से माना कर दिया.

मरणोपरांत

1961 में डैगहैमरसोल्ड को

नामांकन की गोपनीयता

नामांकन वाले व्यक्तियों का नाम 50 साल तक उजागर नहीं किया जाता है. नोबेले शांति पुरस्कार समिति हर साल नामांकन की संख्या उजागर करती है.

जिनको नहीं मिला नोबेल

महात्मा गांधी: 20वीं सदी के अहिंसा के इस सबसे बड़े पुजारी को शांति के नोबेल के लिए बार बार नामांकित किया गया. 1937, 1938, 1939, 1947 और अंत में जनवरी 1948 में हत्या किए जाने के ठीक पहले नामांकन के बावजूद नोबेल नहीं मिला. हालांकि नोबेल कमेटी ने सावर्जनिक रूप से इस भूल के लिए माफी भी मांगी. 1948 में महात्मा गांधी की मौत के साल कमेटी ने ‘कोई भी जीवित व्यक्ति योग्य नहीं’ कहते हुए किसी शांति का पुरस्कर नहीं दिया गया. 1989 में दलाईलामा को शांति का नोबेल पुरस्कार दिए जाने पर कमेटी के चेयरमैन ने इसे महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दिए जाने का एक हिस्सा बताया.

जवाहरलाल नेहरू: भारत के प्रथम प्रधानमंत्री को नामांकन के बाद नहीं मिला नोबेल

जोसेफ स्टालिन: सोवियत संघ के इस नेता को द्वितीय विश्वयुद्ध खत्म करने के सराहनीय प्रायस के चलते 1945 और 1948 में नामांकन के बावजूद भी नहीं मिला नोबेल

सर्वाधिक नामांकन

अमेरिका की जेन एडम्स को 1916-1931के बीच 91 बार नामांकिय किया गया. 1931 में मिला नोबेल

कहां दिया जाता है शांति का नोबेल

शांति के नोबेल को छोड़कर बाकी सभी नोबेल पुरस्कार स्वीडन के स्टॉकहोम में दिए जाते हैं. शांति का नोबेल पुरस्कार नार्वे के ओस्लो में दिया जाता है. नोबेल पुरस्कार के संस्थापक अल्फ्रेड नोबेल स्वीडन के निवासी थे. अपनी वसीयत में उन्होंने घोषणा की है कि शांति का नोबेल पुरस्कार किसी एक नार्वे की कमेटी द्वारा दिया जाए. जब अल्फ्रेड नोबेल जीवित थे तो नार्वे और स्वीडन एक ही राजशाही के अंतर्गत थे. 1905 में नार्वे स्वतंत्र राज्य बना.

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