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टाइम का फूलन देवी को सलाम

आपको ये जानकर हैरत होगी कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने इतिहास की 16 सबसे विद्रोही महिलाओं की सूची में दिवंगत दस्यु सुंदरी फूलन देवी को चौथे स्थान पर रखा है. मैगजीन ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) पर जारी लिस्ट में फूलन देवी के बारे में लिखा है, उन्हें भारतीय गरीबों के संघर्ष को आवाज देने वाली और इस आधुनिक राष्ट्र के सबसे दुर्दांत अपराधियों के रूप में याद किया जाएगा

folandeviभारतीय नारियों को जहां कोमलता का पर्याय समझा जाता है वहीं अगर वह अपने रौंद्र रुप में आ जाएं तो दुर्गा जैसी हो जाती हैं. 1963 में जालौन जिले के कालपी क्षेत्र के शेखपुर गुढ़ा गांव में जन्मी फूलन देवी पर बचपन से ही अत्याचार होते रहे लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. 11 साल की उम्र में फूलन देवी का विवाह कर दिया गया, उसके बाद कुछ दबंगों ने बेहमई गांव में फूलन देवी को निर्वस्त्र कर सबके सामने घुमाया और उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया.

इस अत्याचार और घिनौने कृत्य के बाद फूलन देवी ने चंबल का रास्ता पकड़ लिया और बदले की आग में झुलसते हुए 1981 में अपने साथी डकैतों की मदद से ऊंची जातियों के गांव में 20 से अधिक लोगों की हत्या कर दी. 12 फरवरी 1983 को फूलन ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के चरणों में बंदूक रखकर हजारों की भीड़ में अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. फूलन 11 साल तक जेल में रहीं. 1994 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उनका मुकदमा वापस लेकर उन्हें रिहा कर दिया. फूलन देवी अत्याचार, प्रतिशोध और विद्रोह की एक अनोखी दास्तां हैं.

फूलन देवी को इंसाफ की देवी और गरीबों के हितों के लिए संघर्ष करने वाली बता कर टाइम मैगजीन ने एक नए विवाद को जन्म दिया है. इतना ही नहीं उनके विषय में टाइम कहता है कि “फूलन को इस आधुनिक राष्ट्र के सबसे दूर्दांत अपराधियों के रूप में याद किया जाएगा.”

pd2सही अर्थों मे देखा जाय तो टाइम का ये वक्तव्य भारतीय न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था का मखौल उड़ाता नजर आता है जहॉ एक दूर्दांत दस्यु सुंदरी को व्यवस्था तोड़क और अनिष्टकारी बताने की बजाय महिमामंडित करने की कोशिश की गयी है और उनके रुख को रॉबिनहुड की तरह दर्शाया गया है.