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दुआ से काम लेता हूं

Madan Mohan saxena
मैं, लेखनी और जिंदगी
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दुआ से काम लेता हूं

हुआ इलाज भी मुश्किल, नहीं मिलती दवा असली
दुआओं का असर होता दुआ से काम लेता हूं

मुझे फुर्सत नहीं यारों कि माथा टेकूं दर-दर पे
अगर कोई डगमगाता है उसे मैं थाम लेता हूं

खुदा का नाम लेने में क्यों मुझसे देर हो जाती
खुदा का नाम से पहले मैं उनका नाम लेता हूं

मुझे इच्छा नहीं यारों कि मेरे पास दौलत हो
सुकून हो, चैन हो दिल को इसी से काम लेता हूं

सब कुछ तो बिका करता मजबूरी के आलम में
सांसों के जनाज़े को सुबह से शाम लेता हूं

सांसे हैं तो जीवन है तभी है मोल मेहनत का
जितना है जरुरी बस उसी का दाम लेता हूं