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तुमने अपनी मां बदली है

Somnath Danayak
तकनीकी कलम
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तुमने अपनी मां बदली है 

पढ़ लिख कर तुम हुए सयाने 

अंग्रेजी के हुए दीवाने 

भूल गए तुम मां की भाषा 

अंग्रेजी में लगे बताने

जिस मां ने रक्त-स्वेद से सींचा 

उसकी सुधि तुमने क्या ली है? 

मातृभूमि धिक्कारे तुमको 

तुमने अपनी मां बदली है।

 

मां से सुन मुख खोल रहे थे 

तुतलाते से बोल रहे थे 

शब्दों का संसार बना कर 

जीवन पथ पर दौड़ रहे थे 

एक फिरंगी आकर्षण में 

अपनी माता दीन लगी है? 

मातृभूमि धिक्कारे तुमको 

तुमने अपनी मां बदली है।

 

उड़िया असमी या बंगाली

जगन्नाथ या माता काली 

तेलुगू कन्नड़ मलयालम हो 

या भाषा रामेश्वर वाली 

सिंधी गुजराती पंजाबी 

मराठी हो या गढ़वाली 

मैथिली उर्दू मणिपुरी हो 

कश्मीरी हो या संथाली 

वात्सल्य से भरी हुई 

अपनी माताएं हीन लगी है? 

मातृभूमि धिक्कारे तुमको 

तुमने अपनी मां बदली है।

 

श्लोकों में विज्ञान बसा था 

धातुकर्म का ज्ञान बसा था 

ज्योतिष गणित खगोल ज्ञान का 

अमृत कलश यहाँ बरसा था 

इसी मूल ज्ञान के बल पर 

पाश्चात्य अब महाबली है 

मातृभूमि धिक्कारे तुमको 

तुमने अपनी मां बदली है।

 

दुरुपयोग शक्ति का छोड़ो 

समझौतों से रिश्ता तोड़ो 

इतिहासों से शिक्षा लेकर 

कर्म युद्ध से नाता जोड़ो 

सच्चे कर्मों में तन मन और

भारत मां की शक्ति बसी है 

मातृभूमि धिक्कारे तुमको 

तुमने अपनी मां बदली है।