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गुडिया से बलात्कार : पाप और पुण्य का मनोविज्ञान

Somnath Danayak
तकनीकी कलम
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भ्रष्टाचार: गुड़िया नामक ५ वर्षीय बच्ची से बलात्कार (पाप और पुण्य का मनोविज्ञान)

आजसे २-३ दशक पहले तक इतनी दरिंदगी नहीं थी| कारण शायद यह नहीं कि पुरानेसमय में दरिंदों की कमी थी, बल्कि करने योग्य कार्य (शुभ कार्य) एवं वर्जितकार्य (अशुभ कार्य) क्रमश: पुण्य एवं पाप के रूप में परिभाषित थे| और सारासमाज इसका अनुसरण करते हुए एवं डर कर ही सही, किन्तु घृणित कार्यों से दूररहता था| आज समाज का एक बड़ा वर्ग अंध-विशवास समझ कर इस पुरातन आध्यात्मिक विज्ञान से दूर हटता जारहा है| मंदिर तोहम आज भी जाते हैं लेकिन वापस लौटकर वर्जित कार्य ही करते हैं |आज का मनुष्य आधुनिक विज्ञानसम्मत तर्क पर ही विश्वास करता है| डॉक्टर के डायबिटीसबतलाने और शक्कर बंद कर इन्सुलिन लेने की सलाह हम तुरंत मान लेते हैं | क्योंकि Test Reportयह कह रही होती है| इस प्रकार आज के दौर में पाप पुण्य के सीधे सीधे फार्मूला से कामनहीं चलने वाला बल्कि उनके वैज्ञानिक विश्लेषण दिए जाने की आवश्यकता है | आज चरित्रहीनता प्रदर्शित करने वाले धारावाहिको, कंप्यूटर पर पोर्न साइट्स इत्यादि की भरमार है| कुछ एक  दुष्परिणामों के चलते वैज्ञानिक नवीनीकरण को रोका भी नहीं जा सकता| ऐसी स्थितियों में भारत जैसे देश को सख्त क़ानून के साथ साथ पोलियो, चेचक आदि के सामान भ्रष्टाचार विरोधी एक वैज्ञानिक टीकेकी आवश्यकता है जो वैज्ञानिक तर्कों पर आधारित हो और एक रोग और इसके दुष्परिणामो के आधार पर इसे समझा सके|

अनुचित रूप से (shortcutतरीके से) हासिल की गयी कोई भीसफलता दिमाग को अस्थिर करती है| यह अस्थिरता सकारात्मक कार्यों से दूर करतेहुए सारे परिवार को प्रभावित करती है| मानसिक अस्थिरता की अधिकताब्लड-प्रेशर को जन्म देती है| बी.पी. की निरंतरता heart diseaseएवं Uric-Acidकी वृद्धि करते है| जिससे ह्रदय घात एवं किडनी फेल्योर होते हैं| मात्र शारीरिक रूप से ही नहीं वरन आचारव्यावहार पर भी प्रतिकूल असर होता है| आने वाली पीढ़ियों को संस्कार के रूपमें अकर्मण्यता एवं दुराचरण (एब) ही मिलता है| भ्रष्टाचार नहीं होगा तो system properlyकार्य करेगा और जानवर स्वत: ही डर करदरिंदगी करने से बचेगा|

Corruption is inversely proportional to prosperity

एक सज्जन ने एक प्रदेश के Electricity Board कोकरोड़ों रुपयों की चूना लगाया और मस्ती से रहने लगे| सेवानिवृत्ति के कुछ हीवर्षों उपरांत उन्होंने अपनी सारी चल एवं अचल संपत्ति सरकार को सौंपते हुएएक पत्र लिखा कि मैं इस संपत्ति का कभी भी धनात्मक उपयोग (Positive Use) नहीं कर सका | दो बेटे हैं जो कि अकर्मण्य एवं शराबी हो चुके हैं, बीवीमार्केटिंग करती रहती है एवं मैं स्वयं बीमार होकर बिस्तर पर पड़ा रहता हूँजिसे पानी देने वाला भी कोई नहीं| इस संपत्ति ने मेरे पूरे घर को उजाड़ कररख दिया है| मैं यह सारी सम्पत्ति सरकार को देता हूँ, शायद मेराप्रायश्चित्त हो सके एवं मेरा परिवार ठीक हो सके| यह पत्र एवं घटना एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में प्रकाशित भी की गयी थी, जिसे आज प्रचारित करनेकी आवश्यकता है|