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शिमला की सैर और मेरा प्रश्न आप सबके लिए

jack
थोडा हल्का - जरा हटके (हास्य वयंग्य )
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आज जागरण जंक्शन पर मैं मन में एक सवाल के साथ आया हूं. कई लोगों के मुझ पर गंभीर आरोप हैं कि मैं कमेंट ज्यादा ब्लॉग कम लिखता हूं. अरे जब यहां इतने महानुभाव अपने अनुभव रखते हैं तो भला कोई तो कमेंट करने वाला भी होना चाहिए ना. हां रही बात ब्लॉग लिखने की तो उसका शौक है लेकिन लिखूं किस विषय पर यह असमंजस का विषय बना हुआ है. वैसे मुझे घूमने का काफी शौक है और भारत के कई जगहों पर अपनी घुमक्कडी के शौक पूरे कर चुका हूं जैसे उदयपुर और अभी हाल में शिमला.

अब जब ब्लॉगिंग करने का मन किया तब तो जागरण जंक्शन पर लिखने लगे पर अब मन हो रहा है कि अपनी यात्राओं के विषय में कुछ लिखें. माना कि हम इब्ने बतुता जैसे घुमक्कड नहीं हैं लेकिन उनकी बिरादरी से तालुकात तो रखते ही हैं!

अभी हाल ही में हम शिमला गए थे. दिल्ली की गर्मी से बचने के लिए (हालांकि राहत वहां भी कम थी लेकिन थी जरुर ). दिल्ली स्टेशन से कालका-हावडा ट्रेन पकडी. रात के साढे नौ बजे थी. अब ट्रेन अगर भारत में समय पर आए तो उस समय सूरज की दिशा देखनी पडती है कि आखिर भाई आज निकला किधर से. वैसे जैसे-तैसे 11 बजे ट्रेन आई. पहले से ही टिकट रिजर्व थी सो दिक्कत कुछ थी नही. ट्रेन में सबसे बढिया जगह होती है विंडो सीट. हम भी वही बैठे थे. साथ में दो दोस्त भी थे. मजे से गाने सुनते हुए सफर शुरु किया. हमारी ट्रेन सुबह साढे पाँच बजे कालका स्टेशन पर पहुँच गयी. वहीं से टॉय-ट्रेन की रिजर्वेशन थी. सबसे ज्यादा मजा इसी में आया बडे बडे अंधेरे सुरंगो से गुजरती. सोलन-धर्मपुर-डिगशोई-बारोग स्टेशनों से होते हुए टॉय ट्रेन निकल चली अपने पाँच घँटों के शिमला के सफर पर .  कमाल देखिए शिमला पहुचते ही बजरी वाली बर्फ गिरने लगी. मन को मानों भगवान मिल गए. वैसे यह बात अलग थी कि जैसे ही हम आनंद लेते चार –पांच कुलियों ने घेर कर अपनी मच्छी मार्किट लगा ली. उनमें से एक को हमने पकडा और अपने होटल चल दिए. शिमला में हम पूरे पांच दिन रहे जिसमें से पहला दिन तो आसपास घूमने में ही बीत गया. लेकिन इस यात्रा का भी हम ज्यादा बखान नहीं करेंगे क्योंकि जो मजा हमने वहां पाया उसके लिए शब्द नही है. बर्फ की मस्ती, ठंडे मौसम में घूमना, मंदिरों के चक्कर और पर्वतों के नजारे से लेकर सुरंगों की गहराई सबने आखिर जता दिया कि भारत क्यों इतना अलग है.

इन सबके बीच एक प्रश्न मन में उमड़-घुमड़ रहा है कि जागरण यात्रा पर भी यदि ऐसी व्यवस्था होती जिससे जन सामान्य अपने यात्रा-अनुभवों को इमेज या वीडियो सहित डाल सकते तो ज्यादा बेहतर होता. मेरी जागरण जंक्शन के माध्यम से जागरण समूह से यह गुजारिश है कि इस महत्वपूर्ण वेबसाइट पर भी अपने अनुभवों को अनुरेखित करने की सुविधा प्रदान करनी चाहिए, इससे निश्चित रुप से सभी को लाभ होगा और भ्रमण के शौकीन यात्रार्थियों को नए और रोचक स्थलों तथा मजेदार व प्राकृतिक परिदृश्यों से साक्षात्कार का अवसर मिलेगा.