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बातचीत में सितारों का उदासीन रवैया

टीवी पर फिल्मी सितारों के इंटरव्यू देखते समय आपने गौर किया होगा कि वे कैमरे की ओर नहीं देख रहे होते हैं। कई बार कैमरामैन को सही एंगल नहीं मिल पाता, लेकिन ज्यादातर अवसरों पर ये सितारे कैमरे से आंखें चुराते हैं। उन्हें अपने दर्शकों से नजरें मिलाकर बातें करने में डर लगता है। उन्हें डर रहता है कि उनका झूठ कहीं आंखों से न पकड़ लिया जाए। कैमरा सब कुछ कैच करता है। वह वक्ता की ईमानदारी और झूठ दोनों जाहिर कर देता है।

दरअसल.. मीडिया से बातचीत करने के प्रति सितारे उत्साह नहीं दिखाते। उनकी कोशिश रहती है कि बातचीत न हो, तो ज्यादा अच्छा। खासकर प्रिंट मीडिया से तो एलर्जी जैसी हो गई है। इन दिनों अधिकांश स्टार इसी यत्न में रहते हैं कि सभी को एक साथ बिठाकर जनता बाइट (बीस-पच्चीस पत्रकारों को एक साथ संबोधित करने की प्रक्रिया) दे दिया जाए। नतीजा सामने दिखता है कि सभी चैनलों और पत्र-पत्रिकाओं में एक जैसी बातें ही देखने-पढ़ने को मिलती हैं। संजय दत्त, सलमान खान और कई दूसरे सितारे तो मीडिया को देखते ही असहज हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि न जाने मीडियाकर्मी उनसे क्या पूछ बैठें? और वे अपने मूड में क्या उल्टा-सीधा बोल जाएं।

अगर कभी ये आमने-सामने हो जाएं तो फिर अनमने से बैठे रहते हैं। टालने के अंदाज में जवाब देते हैं और कई बार तो बगैर सवाल सुने ही बोलना शुरू कर देते हैं। सवाल कुछ भी हो, उनके जवाब सुनिश्चित होते हैं। लगता है कि तोते ने कुछ रट लिया है और इशारा मिलते ही सब कुछ उगल देना है। फिल्म की रिलीज के पहले सभी अपनी फिल्मों को मुगल -ए-आजम और शोले की तरह पेश करते हैं। एक जवाब आम है कि फिल्म करते हुए मजा आया। पूरी यूनिट परिवार की तरह थी। सभी ने एक-दूसरे का खयाल रखा और पिकनिक का आनंद आया। फिल्म निर्माण में पिकनिक का आनंद लेने का नतीजा सभी के सामने है। ज्यादातर फिल्मों में कलाकारों और तकनीशियनों की मेहनत व भागीदारी नहीं दिखती। शायद वे शूटिंग के दरम्यान पिकनिक की मौज-मस्ती कर रहे होते हैं।

कुछ कलाकार बातचीत करते समय केवल शारीरिक रूप से ही मौके पर मौजूद रहते हैं। उनका दिमाग किसी और जगह रहता है। बातें करते समय वे अपने मोबाइल के बटन दबा रहे होते हैं। पढ़े हुए मैसेज को ही पढ़ रहे होते हैं या फिर मैसेज लिख रहे होते हैं। फोन आ जाने पर सॉरी का इशारा कर फोन उठा लेते हैं और देर तक बातें करते रहते हैं। चूंकि अभिनय उनके रग-रग में है, इसलिए बुरे अभिनेता होने पर भी वे आत्मीयता का अभिनय करते हैं। हाथ मिलाते हैं। सीने से लगते हैं, लेकिन मन ही मन बुदबुदा रहे होते हैं कि न जाने क्यों इन लोगों से मिलना पड़ता है। जिस सवाल का जवाब न देना हो, उसे वे अपनी प्राइवेसी के खाते में डाल देते हैं और फिर शिकायत करते हैं कि मीडिया के लोग हमारी निजी जिंदगी में ज्यादा इंटरेस्टेड रहते हैं। जबकि इन सभी सितारों को कॉफी विद करण में करण जौहर के साथ तमाम निजी बातें शेयर करने में दिक्कत नहीं होती। अगर उन सवालों को ही कोई टीवी या प्रिंट पत्रकार पूछ दे, तो वे भड़क जाते हैं।

फिल्म इंडस्ट्री में आमिर खान, शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन जैसे कुछ अपवाद हैं, जो बातचीत करते समय हर सवाल को ध्यान से सुनते हैं और संतोषजनक जवाब देने की कोशिश करते हैं। आमिर और शाहरुख तो पत्रकार की मानसिकता और जरूरत समझते हुए बातचीत को गंभीर, एंटरटेनिंग, रसदार और दमदार बना देने की कला जानते हैं। उन्हें मीडिया से ऊब नहीं होती, शायद यही वजह है कि मीडिया के मार्फत दर्शक भी उनसे प्यार करते हैं।

-अजय ब्रह्मात्मज

Source: Jagran Sinemaza