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अतिक्रमण ने नगर को नाले में बदला

dryogeshsharma
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मानसून ने दस्तक देनी प्रारम्भ कर दी है। इंद्र देवता भी अपने भक्तों को दर्शन देकर कहीं प्रसन्न कर रहे हैं और कहीं झमाझम बरस कर परेशान कर रहे हैं। गाज़ियाबाद भी बारीश के इस खेल से अछूता नहें है। मानसून के द्स्तक देते ही शहर में जल भराव की गम्भीर समस्या उत्पन्न हो जाती है और सारा शहर लगभग एक दरिया में तब्दील हो जाता है।

 

 

इस समस्या के लिये जितना प्रशासन दोषी है उससे भी ज्यादा दोषी नगर की जनता है। लोगों ने सभी नाले  को अवैध निर्माण से या तो ढ्क दिया है या फिर कब्जा कर लिया है। इससे नगर निगम के कर्मचारी नालियां और नालॉं की सफाई ही नहीं कर पाते हैं। इसके साथ ही साथे जब नाले और नाली भरे रहते हैं तो बारिश का पानी सड़्कॉं पर बहता है और सड़्कें गंदें पानी का दरिया बन जाते हैं।

 

 

 

इस समस्या का सबसे प्रमुख कारण अतिक्रमण है। अतिक्रमण ने सारा नगर बर्बाद कर दिया है। सिर्फ सख्त कार्यवाही ही इलाज है। कुछ क्षेत्र जैसे कैला भट्टा, इस्लाम नगर, शिब्बन पुरा, पटेल नगर, शहीद नगर, हिंडन विहार, तुराब नगर, घंटा घर, जस्सीपुरा, मालीवाणा आदि को अतिक्रमण ने बर्बाद कर दिया है,। इन क्षेत्रॉं में स्थिती बरसात के दिनॉं मे बहुत खराब हो जाती है। कालोनी, बाजार, सड़्कें आदि सभी इस बिमारी के गिरफ्त में हैं। इस अवैध अतिक्रमण के कारण सफाई में बहुत मुश्किल आती है। अतिक्रमण के कारण, नगर से नाली-नाले और सड़्कें गायब होती जा रही हैं। इसके साथे-साथ लोग सीवर में भी गाद, कूडा, पत्थर की घिसाई की गाद आदि सीवर में भरते हैं। इससे सीवर भी जाम और बंद हो जाते हैं। फलस्वरूप गंदा पानी सड़्कॉं पर आ जाता है।

 

 

सफाई के साथ ही साथ, नगर निगम को हर पार्क में रैन वाटर हार्वेस्टिंग की भी व्यवस्था करनी चाहिये। इससे बारीश के पानी को जमीन सोख लेगी। इससे सड़्कॉं पर जल भराव की समस्या भी कम हो जायगी। अगर जनता और प्रशासन सहयोग करें तो यहा समस्या बड़े आराम से हल हो जायेगी। जनता और प्रशासन दोनों ही अपनी-अपनी जिम्मेदारी समझें तो इस समस्या का निदान बड़े आराम से निकल जायेगा।

 

 

 

प्रशासन नालॉं, नाली और सीवर की सफाई पर करॉड़ॉं रुपये खर्च करती है परंतु जल भराव की समस्या का कोई निदान नहीं दिखाई पड़्ता है। प्रशासन इलाकों के हिसाब से कर्मचारियॉं और ठेकेदारॉं की जवाबदेही तय करे और अगर जलभराव होता है तो उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही सुनिशचित करे। एसी तरह नाली, नालों और सड़्कॉं पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ भी कठोर कार्यवाही करें तथा भारी अर्थदंड लगायें। जनता भी अपनी जबाबदेही सनझे। अपनी गलतियॉं के लिये प्रशासन पर दोष लगाने की मानसिकता का त्याग करना होगा। तभी इस समस्या का उचित समाधान होगा।

 

 

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण जंक्शन किसी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।