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मन्ना डे: तू संगीत का सागर है, तेरी एक गीत के प्यासे हम (Manna Dey Profile)

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गुजरे दौर के महान पार्श्र्वगायक मन्ना डे (Manna Dey) का बुधवार देर रात करीब साढ़े तीन बजे बैंगलुरू में निधन हो गया. वह 94 वर्ष के थे. मन्ना डे (Manna Dey) के निधन से पूरा बॉलीवुड शोक के सागर में डूबा हुआ है. मन्ना डे (Manna Dey) ने अपने कॅरियर में 4000 से भी ज्यादा गाने गाए.

MANNA DEYमन्ना डे का जीवन

मन्ना डे (Manna Dey) का जन्म 1 मई 1920 को कोलकाता में हुआ. उनका पूरा नाम प्रबोध चन्द्र डे था. मन्ना डे के बचपन के दिनों का एक दिलचस्प वाकया है. मन्ना डे का जब जन्म हुआ उस समय उनके कान में पहली आवाज एक संगीत के रूप में पड़ी. जन्म के समय उनके पिता और चाचा गाने का रियाज कर रहे थे. उस समय किसी को यह नहीं पता था कि यह बच्चा आने वाले समय में बहुत ही बड़ा गायक बनने वाला है.

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मन्ना डे (Manna Dey) की गायिकी का पता पहली बार उस समय लगा जब उस्ताद बादल खान और मन्ना डे के चाचा एक बार साथ-साथ रियाज कर रहे थे. तभी बादल खान ने मन्ना डे की आवाज सुनी और उनके चाचा से पूछा, यह कौन गा रहा है? जब मन्ना डे को बुलाया गया तो उन्होंने कहा कि बस, ऐसे ही गा लेता हूं. लेकिन बादल खान ने मन्ना डे में छिपी प्रतिभा को पहचान लिया और इस घटना के बाद वह अपने चाचा से संगीत की शिक्षा लेने लगे.

संगीत की शिक्षा लेने के साथ-साथ मन्ना डे ने अपनी पढ़ाई भी पूरी की. उन्होंने 'स्कॉटिश चर्च कॉलिजियेट स्कूल' व 'स्कॉटिश चर्च कॉलेज' से पढ़ाई करने के बाद कोलकाता के 'विद्यासागर कॉलेज' से स्नातक की शिक्षा पूरी की.

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मन्ना डे का कॅरियर

मन्ना डे 40 के दशक में अपने चाचा के साथ संगीत के क्षेत्र में अपने सपनों को साकार करने के लिए मुंबई आ गए थे. हिंदी सिनेमा में उन्हें पहली बार गाने का मौका 1943 में फिल्म ‘तमन्ना’ के जरिए मिला. इस फिल्म में उन्होंने प्लेबैक सिंगर सुरैया के साथ गाना गाया. इस पहले मौके के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने हिंदी, बंगाली समेत मराठी, गुजराती, मलयालम, कन्नड और असमिया आदि भाषाओं में कुल मिलाकर 4,000 गाने गाए हैं.

गायिकी का अंदाज

शुरुआत में मन्ना डे (Manna Dey) को गायिका में अपनी पहचान नहीं मिल रही थी क्योंकि उनकी सधी हुई आवाज किसी भी अभिनेता पर फिट नहीं बैठती थी. लेकिन संगीतकार उन्हें ज्यादा दिन तक नजरअंदाज नहीं कर पाए और अपनी अलग गायिकी के अंदाज की वजह से मन्ना डे धीरे-धीरे संगीत निर्देशकों के चहेते बने गए. मन्ना डे ने उस दौर में खुद को साबित किया जिस दौर में मुकेश, मोहम्मद रफी और किशोर कुमार जैसे बड़े गायक हुआ करते थे.

उनके लोकप्रिय गानों में- ये रात भीगी-भीगी (श्री 420), कस्मे वादे प्यार वफा सब (उपकार), लागा चुनरी में दाग़ (दिल ही तो है), जिंदगी कैसी है पहली हाय (आनंद), तू प्यार का सागर है (सीमा), प्यार हुआ इकरार हुआ (श्री 420) आदि है.

मन्ना डे को मिले कई पुरस्कार

हिंदी सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए मन्ना डे को कई पुरस्कार भी मिले.

1971 में पद्मश्री पुरस्कार और 2005 में पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

1969 में फिल्म मेरे हुजूर के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक, 1971 मे बंगला फिल्म निशि पदमा के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक और 1970 में प्रदर्शित फिल्म मेरा नाम जोकर के लिए फिल्म फेयर के सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

साल 2009 में उन्हें फिल्मों के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.


Manna Dey Profile in Hindi

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