Menu
blogid : 3738 postid : 573498

मोहम्मद रफी: इनकी गोल्डेन आवाज ने भाषाओं की सीमा को तोड़ा

महत्वपूर्ण दिवस
Special Days
  • 1020 Posts
  • 2122 Comments

जब कोई गायक किसी भाषा में अपनी आवाज देता है तो ऐसा माना जाता है कि उस गायक को अपनी भाषा की गहरी समझ और जानकारी है लेकिन हिन्दी सिनेमा के लीजेंडरी सिंगर मोहम्मद रफी की तरह शायद ही कोई ऐसा गायक होगा जिन्होंने अपनी भाषा में बेहतरीन गाने तो गाये ही दूसरी भाषा में भी बिना कोई ज्ञान और जानकारी के अपनी गोल्डन आवाज दी.

mohammad rafi 124 दिसंबर, 1924 को पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में मोहम्मद रफी जन्म हुआ था. महज 13 साल की उम्र से सार्वजनिक मंच पर गाने की शुरुआत करने वाले इस विरले गायक ने 13-14 भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, स्पैनिश, डच और पारसी भाषा में भी गाने गाए.  मोहम्मद रफी ने संगीत के लिए कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली. रफी साहब को संगीत का शौक अपने मोहल्ले में आने वाले एक फकीर के गाने सुनकर लगा था. फकीर के गाने रफी को अच्छे लगते थे. वे उसके गानों की नकल करने की कोशिश करते थे. धीरे-धीरे उनके बड़े भाई हमीद ने उनके अंदर छिपे असाधारण गायक को पहचाना और उन्हें संगीत की तालीम दिलाई.

Read: भारत की कोख से निकलेगा 29वां प्रदेश

मोहम्मद रफी को गाने के अलावा अगर किसी चीज का शौक नहीं था. वैसे तो उनका अधिकतर समय गाने और रिकॉर्डिंग में बीतता था लेकिन जब कभी उन्हें मौका मिलता तो वह बैडमिंटन खेलना पसंद करते थे. 6 बार फिल्म फेयर अवार्ड हासिल करने वाले पद्मश्री मोहम्मद रफी ने दिलीप कुमार, देवानंद, शम्मी कपूर, राजेंद्र कुमार, धर्मेद्र, राजेश खन्ना समेत तमाम बड़े अभिनेताओं के लिए गाया.

रफी साहब ने 43 साल पहले जब फिल्म 'पगला कहीं का' के लिए गाया था तो उन्हें पता नहीं होगा कि इसे वे अपने लिए गा रहे हैं. आज उन्हें इस दुनिया से विदा हुए 33 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन यह सच है कि लोग उन्हें आज भी भुला नहीं पा रहे. जिस तरह रफी साहब के गीत आज भी उसी आनंद के साथ गुनगुनाए जाते हैं, लगता ही नहीं कि उन्हें बिछुड़े हुए इतना लंबा अरसा हो गया है.

Read: सदाबहार नगमों के बादशाह मोहम्मद जहूर खय्याम

Mahendra Kapoor Profile in Hindi

तू संगीत का सागर है, तेरी एक गीत के प्यासे हम