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टीम में पर्मानेंट खिलाड़ी हैं सुरेश रैना

दिसंबर में दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम का चयन कर दिया गया है. एक साल से टीम से बाहर चल रहे अनुभवी तेज गेंदबाज जहीर खान की जहां टेस्ट टीम में वापसी हुई है वहीं दूसरी तरफ सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर को इस टीम में जगह नहीं दी गई. इस दौरे के लिए टेस्ट की तरह वनडे टीम का भी चयन किया गया है लेकिन इस टीम में कोई बदलाव नहीं किया गया. खराब फॉर्म से गुजर रहे युवराज सिंह टीम में जगह बनाने में कामयाब रहे. युवराज सिंह के अलावा एक खिलाड़ी और है जो बीते कई महीने से बुरे फॉर्म से गुजर रहा है इसके बावजूद भी वह टीम में है. नाम है सुरेश रैना.

suresh rainaधोनी का भरोसा

महेंद्र सिंह धोनी की गिनती उन खिलाड़ियों में होती है जो अपनी टीम के युवा खिलाड़ियों को लगातार मौके देता हैं. बल्लेबाज रोहित शर्मा को कौन भूल सकता है. रोहित शर्मा अपने कॅरियर की शुरुआती दिनों से ही खराब फॉर्म से गुजर रहे थे लेकिन कप्तान धोनी को उन पर भरोसा था. इसलिए उन्होंने लगातार उन्हें मौका दिया. यही चीज सुरेश रैना के साथ भी है. लेकिन कई बार धोनी की इस बात को लेकर आलोचना भी की जाती है. महेंद्र सिंह धोनी जिस आईपीएल टीम के शुरु से ही कप्तान हैं उस टीम में लगातार सुरेश रैना भी हैं. यही वजह है कि धोनी चाहते रहे हैं कि रैना उनके साथ राष्ट्रीय टीम में भी रहें.

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वैसे यह नहीं कहा जा सकता कि मध्यमक्रम के बल्लेबाज सुरेश रैना एक बेहतर खिलाड़ी नहीं है. सुरेश रैना एक बल्लेबाज के साथ-साथ मौजूदा भारतीय टीम के सबसे बेहतरीन क्षेत्ररक्षकों में से एक हैं. वह आज भले ही टीम में एक बल्लेबाज के तौर बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हो लेकिन कभी-कभी उनकी गेंदबाजी मैच का रुख बदलने में कारगर साबित होती है.

सुरेश रैना का जीवन

27 नवंबर, 1986 को रैना का जन्म श्रीनगर में हुआ था. उनके पिता कश्मीरी पंडित हैं. बचपन से ही उन्हें क्रिकेट का बड़ा शौक था और इसीलिए वह श्रीनगर से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में शिफ्ट हो गए. 1999 से सुरेश रैना ने क्रिकेट को गंभीरता से लेना शुरू किया. 2002 तक सुरेश रैना उत्तर प्रदेश की अंडर 16 टीम के एक काबिल खिलाड़ी के रुप में उभरे. इसी साल उन्हें भारत की अंडर 19 टीम के लिए इंग्लैण्ड दौरे पर भेजा गया जहां उन्होंने एक के बाद एक दो अर्धशतक लगाए. यहीं से सुरेश रैना ने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान खींचना शुरू किया. साल 2005 में उन्हें बॉर्डर-गावस्कर स्कॉलरशिप के लिए चुना गया और आस्ट्रेलिया में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया.

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