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नव संवत्सर विक्रम संवत 2078

Kaushal Pandey
KAUSHAL PANDEY
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हमारा नव संवत्सर विक्रम संवत 2078 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 13 अप्रैल 2021 मंगलवार से प्रारंभ हो रहा है, इस संवत्सर का नाम आनन्द होगा जो यह 60 संवत्सरों में अड़तालीसवाँ है।

इस संवत्सर के आने पर विश्व में जनता में सर्वत्र सुख व आनन्द रहता है। इस संवत्सर का स्वामी भग देवता को माना गया है। आनन्द संवत्सर में जन्म लेने वाला शिशु आनंद में मग्न रहने वाला, चतुर, कुशल, कृतज्ञ, विनीत स्वभाव वाला तथा पुत्रसुख से युक्त होगा।

ब्रह्माजी ने सृष्टि का आरम्भ चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से किया था, अतः नव संवत का प्रारम्भ भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है।
सम्वत 2078 में राजा व मंत्री भूमिपुत्र मंगल देव रहेंगे। वर्ष का राजा व मंत्री का पदभार स्वयं मंगल देव संभाले हुए है। इस संवत्सर में शनि देव को कोई भी विभाग नही दिया गया है। उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया गया है। गुरु के पास वित्त विभाग रहेगा जिससे धन का आवागमन होता रहेगा ।
राजकुमार बुध देव कृषि मंत्री है जिससे पुरे वर्ष अनाज की कमी नही आएगी किसान खुश रहेंगे ।

चंद्रमा पर देश रक्षा का भार रहेगा अतः देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत रहेगी। मंगल के दिन प्रारम्भ हो रहे इस सम्वत में रोग बढ़ेंगे, भय और राक्षस प्रवृत्ति के लोगों में पाई जाएगी। मंगल को युद्ध का देवता कहा जाता जाता है। यह हिंसा, दुर्घटना, भूकंप, विनाश, शक्ति, सशस्त्र बलों, सेना, पुलिस, इंजीनियरिंग, अग्निशमन, शल्य चिकित्सा, कसाई, छिपकर हत्या करने वाला, दुर्घटना, अपहरण, बलात्कार, उपद्रव, सामाजिक और राजैनतिक अस्थिरता के कारक ग्रह हैं।

विक्रम संवत 2078 के राजा मंगल होने से इस साल आंधी-तूफान का भी जोर रहेगा। जहाँ इस वर्ष महामारी से मुक्ति मिलेगी वही देश में हिंसा-उपद्रव और प्राकृतिक घटनाओं से देश दुनिया में लोग परेशान भी रहेंगे। इस संवत्सर वर्ष में उग्रवाद , लड़ाई-झगडे ,वाद-विवाद ,धरना प्रदर्शन ,राक्षसी प्रवृत्ति में बढ़ोत्तरी होगी।

संक्रामक रोगों से संपूर्ण देश प्रभावित रहेगा।
अतः सभी अपनी दिनचर्या और खान पान का विशेष ध्यान दे।
नियमित योग करे.
सदाचार का पालन करे।

भारत का कोइ भी पर्व अंग्रेजी महीने से नहीं होता... क्योंकि प्रकृति इसका साथ नहीं देती ....... हम प्रकृति का साथ देंगे तो प्रकृति भी हमारा साथ देगी. हमारे सारे त्यौहार धार्मिक मान्यतायों पर आधारित हैं., यानी एक धार्मिक त्यौहार है लेकिन क्या हम बता सकते हैं कि एक जनवरी को किस आधार पर हम नव वर्ष मनाएं जबकि भारतीय नव वर्ष जो चैत्र में शुरू होता है उस पर गृह नक्षत्र साथ देते हैं ...

इसलिए मेरा आग्रह है कि हम अपना भारतीय नव वर्ष मनाएं। आप सभी को नव वर्ष की शुभकामनाएँ… यह वर्ष भारतीयों के लिये ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के लिये भी सुख, शांति एवं मंगलमय हो। कृपया अधिक से अधिक लोगों तक यह जानकारी पहुंचाए।

पंडित कौशल पाण्डेय
राष्ट्रीय महासचिव :-श्री राम हर्षण शांति कुञ्ज, भारत

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जॉगरण डॉट कॉम किसी तथ्य, दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।