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कोरोना : विपदा या अवसर

Ashok Srivastava
एक विश्वास
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वर्ष 2020-2021 कोरोना का वर्ष था| हमने इसकी दो लहरों का सामना किया| विज्ञान के जानकर यह बात भलीभांति जानते हैं की कोरोना वायरस वर्षों से अस्तित्व में है| यह वायरस नया नहीं है और इसके बदले हुए रूप (वैरिएंट) का अस्तित्व में आना एक अलग विषय है| यह सच है और कोई इसे झुठला नहीं सकता कि यह पहले भी सर्दी-जुकाम से जुड़ा था और आज भी इसके मुख्य लक्षणों में सर्दी-जुकाम ही बताया जाता है| अन्य लक्षण बाद में और जुड़ते रहे और हर बार बताया गया की यह नए वैरिएंट के नए लक्षण हैं| तीसरी बात की गई इसके हर बार अधिक घातक होने की| बताया गया कि यह हर बार अधिक घातक और संक्रामक बन कर सामने आ रहा है|

अब प्रश्न यही है की हर बार एक नई कहानी तो बता दी गई और हम भयभीत भी हुए| हमारे काम-धंधे ही नहीं बच्चों की पढाई तक चौपट हुई जो हमारे सुरक्षित भविष्य की गारंटी बनती है| परन्तु दूसरी तरफ हमें उपदेश देने वाले कभी घरों में मस्त रहे तो कभी महफिलों में| हमारे लिए दुनिया भर की पाबंदियां परन्तु उनके लिए? मैं यह सब इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि यही मेरा अनुभव रहा है| मैं जो लिख रहा हूँ यह कौन पढ़ेगा? शायद दो-चार लोग, बस| फिर भी लिख रहा हूँ अपनी संतुष्टि की खातिर| मुझे पता है की आप का नाम है तो आप का झूठ भी बिकेगा वरना आपके सच को भी सुनने-वाला कोई नहीं मिलेगा| यह मात्र मेरा ही नहीं आपका भी अनुभव होगा की कोरोना काल में क्या-क्या हुआ है| और जो हुआ है उसमें क्या अच्चा और क्या बुरा हुआ था| कोरोना एक महामारी बन कर आया परन्तु हमारे देश में कोरोना कुछ लोगों के लिए एक अवसर साबित हुआ| इसको अवसर की तरह लेने वालों में शासन-प्रशासन और पक्ष-विपक्ष दोनों ही शामिल रहे हैं| आप मेरी बात को समझ रहे होंगे की मैं ऐसा क्यों कह रहा हूँ| ऐसा मैं जिस आधार पर कह रहा हूँ वह सब आप से भी छिपा तो नहीं ही है|

पहले विद्यालयों को बंद किया गया और विद्यालय लंबे समय तक बंद रखे गए| जिस देश में मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था इसलिए की जाती है क्योंकि सरकारों को पता है की उन्होनें आज तक गरीबी उन्मूलन का कार्य पूरा नहीं किया है| गरीबों के नाम पर जो कुछ हुआ वह बन्दर बाँट का कम सिद्ध हुआ न कि गरीबी उन्मूलन का| ऐसे में जो अपना पेट ही नहीं भर सकते हैं वे पढाई कैसे कर सकते थे? परन्तु किसी सरकार ने यह नहीं सोचा| जो दिन भर में दो रोटियों की व्यवस्था नहीं कर सकता है वह मोबाईल की व्यवस्था कर आनलाइन माध्यम से पढ़ी का कार्य कैसे कर सकता है?

जो लोग छोटे-मोटे काम करते थे या मेहनत-मजदूरी करते थे वे ही कहीं के नहीं रहे क्योंकि वही सब कम बंद हुए औए ऐसे लोग ही बेकारी के शिकार हुए| इनके साथ क्या हुआ आप सभी इस बात से अवगत हैं| इनके लिए सरकार ने अपने खज़ाना खोला और अन्न का भंडार भी| परन्तु किसको क्या मिला यह भी आप सब को याद होगा| अब लोग कहेंगे कि इसमें सरकार क्या कर सकती है? तो फिर सवाल तो यह भी है कि अगर सरकार नहीं तो इसको रोकने का कार्य और कौन करेगा? भ्रष्टाचार रोकना सरकार का ही काम है| यह काम अगर जनता करेगी तो वह नियमविरुद्ध माना जाएगा|

अंत में मैं इतना ही कहूँगा और यही कहने के लिए ही यह सब लिखा भी है की कोरोना एक महामारी के रूप में सामने आया। पर कुछ लोगों ने इसे अवसर की तलाश में महामारी के माहौल को और भी भयानक बना द‍िया। अगर ऐसा नहीं था तो उस चीन के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई क्‍यों नहीं हुई जिसको इसका जिम्मेदार माना गया? डब्ल्यूएचओ ने आज तक दुनिया की इस बात को नहीं माना की चीन इसके लिए दोषी है|
 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम क‍िसी भी दावे, तथ्य या आंकड़े की पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।