Menu
blogid : 27686 postid : 17

भगवान श्री कल्कि की मुक्तदायिनी आरती 

ankurgautam
curioussoul
  • 1 Post
  • 0 Comment

ॐ जय जय सुर रक्षक असुर विनाशक

पद्मावत के प्यारे,

जय जय श्री कल्कि भक्त हितकारी

दुष्टन मारन हारे,

जय जय खड्गधारी जय असुरारी

गऊ विप्रन के रखवारे,

क्षीर सागरवासी जय अविनाशी

भूमि भार उतारन हारे,

अलख निरंजन भव भय भंजन

जय संभल सरकारे,

भक्त जानो के पालनकर्ता

जय गउन रखवारे

जय जयकार करत सब भक्तजन

सुनिए प्राण प्यारे

वेगहि सुधि लेना मेरे स्वामी

हम सब दास पुकारे,

जय कल्कि भगवान्

"बार बरोबर बाढ़ है तापर चलत ब्यार, श्री कल्कि पार उतारिये अपनी और निहार"

 

 

 

डिस्क्लेमर : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण जंक्शन किसी भी दावे या आंकड़े का समर्थन नहीं करता है।