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रहस्य

Amar
Voice of Soul
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बदलते दृष्यों के मध्य रूकी दृष्टि,

अनकहे शब्दों के मध्य दृष्य सृष्टि।

कभी जानी-पहचानी,

कभी कुछ अनजानी।

न जाने वो क्या है,

जिसे समझ पाने की,

जरूरत ही क्या?

कुछ रहस्य!

जो बहती धारा को,

जाने न देती,

ऊँचाईयों तक।

फिर भी न जाने वो क्या है,

जिसे समझ पाने की,

जरूरत ही क्या?

डूब जाते हैं पत्थर,

समुद्र की गहराईयों में।

फिर भी न जाने कैसे,

कुछ तैर भी जाते,

पत्थर होकर।

दृष्य से अदृष्य के मध्य,

जिसे समझ पाने की,

जरूरत ही क्या......



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