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चीरहरण

AJAY AMITABH SUMAN
AJAY AMITABH SUMAN UVACH
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राजसभा में जिस दुर्योधन ने सबका अपमान किया,
वो ही वक्त के पड़ने पर गिरिधर की ओर प्रस्थान किया।
था किशन कन्हैया की शक्ति का दुर्योधन को भान कहीं,
इसीलिए याचक बनकर पहुंचा तज के अभिमान वही।

अर्जुन ईक्छुक मित्र लाभ को माधव कृपा जरूरी थी,
पर दुर्योधन याचक बन पहुँचा था क्या मजबूरी थी?
शायद केशव को जान रहा तभी तो वो याचन करता था,
एक तरफ जब पार्थ खड़े थे दुर्योधन भी झुकता था।

हाँ हाँ दुर्योधन ब्रजवल्लभ माधव कृपा का अभिलाषी ,
जान चुका उनका वैभव यदुनन्दन केशव अविनाशी।
पर गोविन्द भी ऐसे ना जो मिल जाए आडम्बर से,
किसी झील की काली मिट्टी छुप सकती क्या अम्बर से।

दुर्योधन के कुकर्मों का किंचित केशव को भान रहा,
भरी सभा में पांचाली संग कैसा वो दुष्काम रहा।
ब्रजवल्लभ को याद रहा   कैसा उसने आदेश दिया,
प्रज्ञा लुप्त हुई उसकी कैसा उसने निर्देश दिया।

शायद प्रस्फुटित होवे अबतक प्रेम बीज जो गुप्त रहा,
कृष्ण संधि हेतु हीं आये थे पर दुर्योधन तो सुप्त रहा।
वो दुर्बुद्धि भी कैसा था कि दूत धर्म का ज्ञान नहीं,
अविवेक जड़ बुद्धि का बस देता रहा प्रमाण कहीं।

अजय अमिताभ सुमन:सर्वाधिकार सुरक्षित