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धर्म की परिभाषा क्या है

Abhishek Kumar
Abhishek Kumar
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हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार हिंदू धर्म को विश्व का सबसे प्रचीन धर्म माना गया है। हिंदू धर्म के अनुसार धर्म की परिभाषा के बारे में कहा गया है कि
“धर्म” संस्कृत भाषा का शब्द है। यह “धृ” धातु से बना है जिसका अर्थ होता है ” धारण करने वाला ” इस तरह हम कह सकते हैं कि “धार्यते इति धर्म:” अर्थात, जो धारण किया जाये वह धर्म है।

हिन्दू धर्म के अनुसार लोक परलोक के सुखों की सिद्धि हेतु सार्वजानिक पवित्र गुणों और कर्मों का धारण व सेवन करना ही धर्म है।

वास्तव में धर्म आत्मोन्नति, आत्मकल्याण का एक पवित्र मार्ग है। जो इस मार्ग पर चलना चाहें उन्हें धर्म के सही स्वरूप को खोजना चाहिए। अन्यथा व्यर्थ पाखण्ड़ों को ढोते-ढोते व्यक्ति व समाज अवसाद की स्थिति में डूबता जा रहा है। धर्म आत्मा के उद्धार का, आत्मा के उत्थान की एक सुव्यवस्थित पद्धति है जिसका अनुसरण कर हम एक सुंदर समाज का निर्माण कर सकते हैं।

 

ड‍िस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम क‍िसी भी दावे, तथ्य या आंकड़े की पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।