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वाह! यार जादूगर

Abhinav Tripathi
ABHINAV TRIPATHI
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हाल ही में आई लेखक नीलोत्पल मृणाल की पुस्तक यार जादूगर युवाओं को बेहद पसंद आ रही है.लेखक मृणाल द्वारा रचित यह उनकी तीसरी किताब है.’यार जादूगर’ नाम की यह किताब जिस प्रकार नामों में अन्य किताबों की नामों से भिन्न है ठीक उसी प्रकार पाठकों को भी पुस्तक के आखिरी पन्ने तक बंधे रखती है.

इससे पहले नीलोत्पल मृणाल दो किताब ‘डार्क हॉर्स’ तथा ‘औघड़’ लिख चुके हैं. दोनों पुस्तक की लाखो प्रतियां अब तक बिक चुकी है.पुस्तक प्रेमियों को लम्बे अरसे से इस पुस्तक का इंतज़ार था.आज के तकनिकी प्रधान युग में जहाँ जन्म से ही मोबाइल में लगी पीढ़ी के हाथों में किताब दिखना की किताब की सफलता की कहानी को प्रदर्शित करता है.सबसे बड़ी जो सामने आ रही है वह यह है कि युवाओं में किताबों के प्रति दिलचस्पी बढ़ते जा रही है.यह किसी भी लेखक के लिए बड़े बड़े सम्मानों से कही बढकर है.

मृणाल द्वारा रचित ‘यार जादूगर’ एक ऐसी किताब है जो प्रथम पृष्ठ से आखिरी तक पाठक को बांधें रखती है.एक लेखक के लिखने की शैली को सफल तभी माना जाता है जब किताब को पढ़ते हुए यदि पाठक किताब को बंद भी कर  दे तो किताब का कुछ अंश उसके दिमाग में जीवित रहे.’यार जादूगर’ गाँव,कस्बो में रहने वालों किरदारों की कहानी की व्यवस्था है.या यूँ कहें तो जीवन के सार की कहानी है.

इसके पात्र हंसाते जरुर हैं लेकिन इनकी व्यंगात्मक शैली वर्तमान पर चोट भी करती है.इस किताब की सबसे खास बात यह है कि इसकी कहानी जैसे जैसे आगे बढती चली जाती है काल्पनिक दृश्य भी दिमाग में बनते चले जा रहें है और वह आखिरी तक बरकरार रहती है.पुस्तक के समापन के बाद भी पढने की उत्सुकता जागृत करा देना अगर किसी लेखक की शैली में है तो वह है नीलोत्पल की कलम में.

लोगों की बात करें तो आलम यह है कि लोग एक बार में ही सारी किताब पढने को आतुर हैं यदि कोई बाधा न पड़े.नीलोत्पल की एक खासियत यह भी है कि उनकी लेखन शैली एकदम सामान्य,सटीक और आम जन की अधिकतर बोल चाल की भाषा ही होती है.यही कारण है कि कम समय में अत्यधिक लोग अब मृणाल की पुस्तकों की ओर खींचे चले आते हैं साथ ही यही सामान्य आम जन की भाषा का अत्यधिक प्रयोग ही नीलोत्पल को अन्य से खास बना देती है.

 

वाह! यार जादूगर