सिवान में कथक सम्राट के निधन पर शोक

शहर के डाकबंगला रोड स्थित होम्योपैथिक चिकित्सक डा. यतींद्रनाथ सिन्हा के आवास पर शुक्रवार को पीपुल्स कल्चरल स्क्वाड एवं प्रगतिशील लेखक संघ के संयुक्त तत्वावधान में उस्ताद शायर कमर सिवानी की अध्यक्षता में शोकसभा का आयोजन किया गया।

JagranPublish: Fri, 21 Jan 2022 10:50 PM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 10:50 PM (IST)
सिवान में कथक सम्राट के निधन पर शोक

जासं, सिवान : शहर के डाकबंगला रोड स्थित होम्योपैथिक चिकित्सक डा. यतींद्रनाथ सिन्हा के आवास पर शुक्रवार को पीपुल्स कल्चरल स्क्वाड एवं प्रगतिशील लेखक संघ के संयुक्त तत्वावधान में उस्ताद शायर कमर सिवानी की अध्यक्षता में शोकसभा का आयोजन किया गया। इसमें प्रसिद्ध नाट्यकर्मी शाओली मिश्रा एवं कथक सम्राट पं. बिरजू महाराज के निधन पर दो मिनट मौन धारण कर उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई। इस दौरान दोनों विभूतियों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई तथा उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला गया। साथ ही साहित्यिक जगत में उनके अवदानों, लेखों एवं कलाओं पर चर्चा की गई। शोकसभा में होम्योपैथी चिकित्सक डा. यतींद्रनाथ सिन्हा, डा. अनिल कुमार श्रीवास्तव, अनवर, प्राचार्य ब्रजदेव सिंह यादव, बच्ची देवी, सुष्मा सिंह, कुमारी विभा द्विवेद्वी, कुमार अमृता द्विवेदी, अनिल कुमार शर्मा, कमल किशोर प्रसाद, पारसनाथ श्रीवास्तव, तेजनारायण साह, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, वीरेंद्र पांडेय, उमाशंकर प्रसाद, अशोक कुमार गुप्ता, लखन लाल, वीरेंद्र कुमार यादव, नवीन वर्मा कन्हैया जी, सुनील कुमार श्रीवास्तव समेत अन्य कलाकार, साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी शामिल थे।

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प्रतिमा बनाने में जुटे कलाकार

संसू, आंदर (सिवान) : बसंतपंचमी नजदीक आते ही इसकी तैयारी में सभी वर्ग जुट गए हैं। छात्र-छात्राएं भी सरस्वती पूजा की तैयारी में जुट गए हैं। इस बार बसंत पंचमी पांच फरवरी को है। इसको लेकर वे मां सरस्वती की प्रतिमा को ले मूर्तिकारों के यहां प्रतिमा की पसंद एवं अग्रिम राशि देने में लगे हुए हैं। वहीं मूर्तिकार भी मां सरस्वती की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। प्रखंड मुख्यालय समेत असांव, शिवपुर, चंदौली, पतार, मनिया, अर्कपुर सहित दर्जनों गांव में कलाकार मां सरस्वती की प्रतिमा बनाने में जुटे हुए हैं। आकार व सजावट के अनुसार मूर्तिकार मूर्तियों की कीमत लेते हैं। बता दें कि दिसंबर माह से ही प्रतिमा बनाने का कार्य शुरू कर देते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा प्रतिमा बनाई जा सके तथा समय पर उसे उपलब्ध हो सके।

Edited By Jagran

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