पेरिस से लौटे नरेश, दुनिया उनकी प्रदर्शनी की हुई कायल

हमारे बिहार के कई कलाकारों ने कंटेंपरेरी कला के क्षेत्र में बिहार का नाम पूरे विश्व में आगे बढ़ाया है। इनमें अग्रणीय उदाहरणों में सुबोध गुप्ता और शांभवी जैसे कलाकारों का नाम आता है। इस कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है- पटना में जन्में आर्टिस्ट नरेश कुमार का।

JagranPublish: Tue, 02 Nov 2021 01:45 AM (IST)Updated: Tue, 02 Nov 2021 01:45 AM (IST)
पेरिस से लौटे नरेश, दुनिया उनकी प्रदर्शनी की हुई कायल

सीतामढ़ी । हमारे बिहार के कई कलाकारों ने कंटेंपरेरी कला के क्षेत्र में बिहार का नाम पूरे विश्व में आगे बढ़ाया है। इनमें अग्रणीय उदाहरणों में सुबोध गुप्ता और शांभवी जैसे कलाकारों का नाम आता है। इस कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है- पटना में जन्में आर्टिस्ट नरेश कुमार का। नरेश, जो मुंबई में रहकर कला जगत में सक्रिय हैं। वैसे मूलरूप से उनका परिवार सीतामढ़ी का रहने वाला है। नरेश ने अपनी आरंभिक शिक्षण पटना स्थित आर्ट एंड क्राफ्ट कालेज से की है। बाद की शिक्षा इकोल दे बोजाल, पेरिस, फ्रांस से की है। इनकी कलाकृतियां पिछले एक दशक में इंडोनेशिया, जापान, कोरिया, हांगकांग, चाइना, फ्रांस, बेल्जियम, न्यू यॉर्क, आयरलैंड, लंदन और भारत में प्रदर्शित और संग्रहित होती रही हैं। होमटाउन एनाटोमी आर्टिस्ट के एक साल तक किए गए शोध में एक कड़ी हैं जहां भूगोल, मानव इतिहास, स्थानों और स्मृतियों के रेखाचित्र से नरेश पटना और बिहार के चारित्र को गढ़ने की कोशिश करते हैं। नील, अभ्रक, सीमेंट, शीशे और खेतों में इस्तेमाल होने वाली हसिया को अपना बिब बनाकर यह प्रर्दशनी जहां एक तरफ इस प्रदेश के एक लंबे प्रवासी इतिहास और शहरी और ग्राम्य जीवन के संवाद को सामने लाती है। सीतामढ़ी के निवासी आइएएस दीपक आनंद ने गांधी संग्रहालय में नरेश की प्रदर्शनी को देखकर उनकी प्रतिभा के कायल हो गए। अगले दिन उनकी पत्नी पीएमसीएच में रेडियोलाजी डिपार्टमेंट में सीनियर रेजिडेंट डॉ. शिखा रानी ने भी विजिट किया और वह भी कायल हो गईं। डा. शिखा ने नरेश की कंटेंपरेरी कला की प्रशंसा की और उनके साथ सेल्फी भी ली। उन्होंने बताया कि ये प्रदर्शनी शरीर, मृत्यु और घर के जटिल मानवीय सवालों की ओर ले जाती हैं। नरेश की प्रदर्शनी होमटाउन एनाटोमी, डिपार्टमेंट ऑफ यूथ कल्चर एंड स्पो‌र्ट्स, बिहार सरकार, तक्षिला फाउंडेशन, नई दिल्ली और गांधी संग्रहालय के सहयोग से विगत एक महीने से गांधी संग्रहालय के परिसर में प्रदर्शित हुई है। कोरोना पैंडेमिक के दौरान नरेश भी कई प्रवासियों की तरह मुंबई से अपने होमटाउन पटना आए। लॉकडॉन और कोरोना की भय वाली परिस्थिति में उन्होंने अपने शहर को एक नए नजरिए से देखा। यह प्रर्दशनी उसी का परिणाम है।

Edited By Jagran

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept