सारण में खाद की किल्लत से किसान परेशान

गड़खा प्रखंड क्षेत्र में किसान अब अपने खेतों में रबी फसल गेहूं आलू मक्का दलहन तिलहन की बुआई करने की तैयारी में है। रबी फसलों में गेहूं एवं आलू मक्का की बुआई के लिए डीएपी के साथ जिक फास्फेट यूरिया एवं मिक्सचर खाद की जरूरत होती हैं। क्षेत्र में इस समय आलू की बुआई की जा रही है लेकिन बाजार से डीएपी खाद गायब है।

JagranPublish: Sun, 28 Nov 2021 10:52 PM (IST)Updated: Sun, 28 Nov 2021 10:52 PM (IST)
सारण में खाद की किल्लत से किसान परेशान

सारण। गड़खा प्रखंड क्षेत्र में किसान अब अपने खेतों में रबी फसल गेहूं, आलू, मक्का, दलहन, तिलहन की बुआई करने की तैयारी में है। रबी फसलों में गेहूं एवं आलू मक्का की बुआई के लिए डीएपी के साथ जिक, फास्फेट, यूरिया एवं मिक्सचर खाद की जरूरत होती हैं। क्षेत्र में इस समय आलू की बुआई की जा रही है, लेकिन बाजार से डीएपी खाद गायब है।

अत्यधिक बरसात एवं बाढ़ से खरीफ फसल की बर्बादी झेल चुके किसानों को रबी फसल से जो उम्मीद थी। डीएपी खाद की किल्लत से उसपर भी पानी फिरता दिख रहा है। गेहूं की बुआई का सीजन भी शुरू हो गया है । ऐसे में डीएपी खाद की किल्लत ने किसानों के लिए भारी मुसीबत खड़ी कर दी है।

बताएं कि सरकार द्वारा किसानों के बीच खाद वितरण का काम इफको कंपनी को दिया गया है। बिस्कोमान में डीएपी गायब होने का लाभ उठाकर बाजार के दुकानदार महंगे दाम पर डीएपी की बिक्री कर रहे हैं। किसानों में विकास कुमार सिंह, विकेश कुमार, सुरेंद्र सिंह, मनोज कुमार, मंजेश मांझी आदि ने बताया कि डीएपी खाद की भारी किल्लत है और किसानों की समस्या कोई सुनने वाला नहीं है। किसानों की सुनें : फोटो 28 सीपीआर 8

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। जब भी रबी की बुआई का समय आता है बिस्कोमान में खाद की किल्लत होती है। इससे कालाबाजारी करने वालों की चांदी व किसानों की पीड़ा प्रशासन के अधिकारी एवं राजनीतिक दल के नेता नहीं महसूस करते हैं।

अरुण राय, आलोनी फोटो 28 सीपीआर 10

मिट्टी के पोषण के लिए खेतों में दिए जाने खाद में डीएपी की मात्रा लगभग तीन हिस्सा हुआ करती है। ऐसे में सरकारी प्रतिष्ठान से डीएपी नहीं मिलने पर होने वाली परेशानी को खेती करने वाले किसान ही समझ सकते हैं। बिस्कोमान में खाद का गायब होना कालाबाजारी को बढ़ावा देना है।

रविद्र सिंह फोटो 28 सीपीआर 9

बाढ व जलजमाव के कारण बुआई के मामले में पिछड़ चुके किसानों को डीएपी के गायब होने से दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। बाजार में दुकानों पर चोरी छिपे अधिक दाम पर खाद की बिक्री की जा रही है। बिस्कोमान पर रैक लगने का इंतजार एक महीने से हो रहा है।

रविरंजन सिंह फोटो 28 सीपीआर 11

खाद न मिलने से खेती पिछड़ रही है। इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ेगा। आलू की खेती पिछड़ गई तो बाद में पाला पड़ने से झुलसा रोग का भी सामना करना पड़ेगा।

रंजन सिंह बोले बीसीओ यह सही बात है कि डीएपी खाद की कमी हो गई है। इससे किसानों को परेशानी हो रही है। शीघ्र ही कमी को दूर किया जाएगा।

उदय कुमार, बीसीओ, गड़खा वर्जन इफको कंपनी के खाद का रैक अभी नहीं आया है। अगले महीने के प्रथम पखवारा तक आने की संभावना है। उसके बाद समस्या दूर हो जाएगी।

निर्मल सिंह, प्रबंधक बिस्कोमान गड़खा।

Edited By Jagran

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